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NBAIM ने कृषि पद्धतियों में सूक्ष्मजीवों का समावेशन अंगीकरण और उपादेयता पर गोष्ठी का किया आयोजन

मऊ। राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो कुशमौर, मऊ के तत्वाधान में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित DST-SSTP परियोजना के अंतर्गत दिनांक वृस्पतिवार को जनपद के ग्राम सभा सेमरी जमालपुर जनपद मऊ में के पंचायत भवन में एक कृषक प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के वित्त-पोषण के अंतर्गत ब्यूरो के प्रधान वैज्ञानिक डॉ रेनू के नेतृत्व में इस परियोजना का संचालन मऊ जनपद में पिछले ढाई वर्षों से किया जा रहा है। जिसमें ब्यूरो के प्रधान वैज्ञानिक डॉ पवन कुमार शर्मा, वैज्ञानिक डॉ प्रमोद साहू एवं डॉ आदर्श की भी सहभागिता है। सेमरी जमालपुर में आयोजित कृषक प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रम के माध्यम में गाँव के 100 से अधिक किसानों को फसल उत्पादन हेतु खेती में प्रचलित परंपरागत रासायनिक गतिविधियों से अलग सूक्ष्मजीवों के उपयोग पर आधारित जैविक एवं उन्नत तौर.तरीकों पर ब्यूरो के वैज्ञानिकों के द्वारा व्यापक रूप से विचार विनिमय किया गया और और इन पद्धतियों से होने वाले लाभों पर चर्चा की गयी। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यही है की जनपद के किसान धीरे- धीरे ही सही पर रसायन, आधारित कृषि पद्धतियों से हटें और बदले में सूक्ष्मजीव और अन्य पौध, उत्पादों पर आधारित खेती के उपायों को आत्मसात करें जिससे कृत्रिम रसायनों के अधिकाधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों से बचा जा सकेगा। ब्यूरो के निदेशक डॉ अनिल कुमार सक्सेना के अनुसार परंपरागत कृषि रसायन आधारित खेती के तौर-तरीकों में बदलाव वर्त्तमान में अत्यधिक वांछित है, इसका प्रमुख कारण कृषि रसायनों के व्यापक और अत्यधिक उपयोग से न केवल खेतों की दशा का ख़राब होना है बल्कि इन रसायनों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर घटक दुष्परिणाम भी दिखने होने लगे हैं। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए बताया कि वैज्ञानिकों के अथक प्रयास से ब्यूरो में 7000 से अधिक कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीवों का एक बड़ा संग्रह तैयार किया गया है और उनमें से कतिपय जीवों की व्यापक रूप से उपयोगिता को देखते हुए उनके अनुकल्प भी तैयार कर लिए गए हैं जो आज किसानों तक पहुँचाये जा रहे हैं जिससे पिछले वर्ष इन्ही सूक्ष्मजीवों के उपयोग से जनपद ही नहीं वरन आसपास के जनपदों के कई किसानों ने रासायनिक खादों के उपयोग में 25 से 30 प्रतिशत की कटौती करने में सफलता प्राप्त की है।
DST-SSTP परियोजना के प्रभारी डॉ रेनू ने बताया की इस परियोजना के अंतर्गत आयोजित किये जा रहे प्रशिक्षण और प्रदर्शन कार्यक्रम में सूक्ष्मजीव आधारित फसल उत्पादन पद्धतियों के समावेशन और अंगीकरण के माध्यम से किसानों में जागरूकता को बढ़ावा दिया जा रहा है, किसानों को विभिन्न प्रकार के अनुकल्प, तकनीकी पुस्तिका आदि प्रदान की गयी है। जिसके माध्यम से सूक्ष्मजीवों के उपयोगी पहलुओं को समझा जा सके, उन्होंने बताया की हम न केवल इन पद्धतियों के तकनीकी और व्यवहारिक पहलुओं को किसानो के बीच में प्रसारित कर रहे हैं बल्कि इन तकनीकियों को बारीकी से उनके सामने सजीव रूप से करते हुए प्रदर्शित भी कर रहे हैं।
डॉ प्रमोद साहू ने बताया की हम न केवल इन पद्धतियों के तकनीकी और व्यवहारिक पहलुओं को किसानो के बीच में प्रसारित कर रहे हैं बल्कि इन तकनीकियों को बारीकी से उनके सामने सजीव रूप से करते हुए प्रदर्शित भी कर रहे हैं, इसी कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने किसानों के खेतों में ही प्रतिभागी किसानों के समक्ष बीज, जड़ और मृदा शोधन के प्रयोगों को प्रदर्शित करने के साथ ही खेतों में उगे आलू और गेंहूं की फसलों पर इन जीवों के जलीय अनुकल्पों का छिड़काव भी किया और साथ ही मिट्टी में इन जीवों से संपोषित कम्पोस्ट का भी प्रयोग भी करके दिखाया, प्रायः बीज.उपचार के समय एक बार ही उपयोग किये जाने वाले सूक्ष्मजीव अनुकल्पों को फसल की महत्वपूर्ण विभिन्न अवस्थावों के दौरान भी प्रयोग किये जाने के विषय में भी व्यापक रूप से प्रदर्शन प्रदान किया गया जिससे इंटरैक्टिव लर्निंग के माध्यम से किसान इन पद्धतियों को आत्मसात कर सकें।
वैज्ञानिक डॉ आदर्श ने समस्त उपस्थित जनों को जानकारी दी की इस योजना के माध्यम से न केवल प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।बल्कि के साथ ही चयनित गाँव के कतिपय उन्नत एवं प्रगतिशील किसानों के खेतों पर प्रायोगिक रूप से सूक्ष्मजीव शोधित बीजों की बुवाई से लेकर कटाई तक की निगरानी की जा रही है जिसके माध्यम से किसानों के खेतों से ही पौधों और और मिट्टी से प्राप्त डाटा का विश्लेषण करके सूक्ष्मजीव और इन पद्धतियों के बारम्बार उपयोग से फसलों पर पड़ने वाले लाभकारी प्रभावों का अध्ययन किया जा सके।
ब्यूरो के प्रधान वैज्ञानिक एवं परियोजना के सह अन्वेषक डॉ पवन कुमार शर्मा ने इस मौके पर एकत्रित किसानों को भारत सरकार के स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वछता के विभिन पहलुओं के बारे में और कोविड 19 से बचाव के लिए सावधानिओं की जानकारी दी। कोविड 19 से बचाव के लिए को मास्क अवं सैनिटिज़ेर भी वितरित किये गए।
ब्यूरो की युवा वैज्ञानिक डॉ ज्योत्स्ना तिलगम ने मजूद महिलाओं को कृषि ही नहीं बल्कि हर क्षेत्र में आगे बढ़कर भागीदारी देने का अनुरोध किया। एवं अपनी पहचान बनाने पर अनुरोध किया। ब्यूरो में शोध अध्येता डॉ सुधीर यादव और परियोजना से जुड़े शोध सहयोगियों पूजा यादव, गरिमा राय, अमित, अजित पाण्डेय, राजन सिंह, आस्था तिवारी, आशुतोष राय, रामअवध, रबिन्द्र, हरिओम आदि की विशेष भूमिका रही।

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