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MY PAPA MY HERO…

            
क्या होता है पिता!

( रमा आनन्द )

हमारी जिंदगी में कितना मायने रखता है पिता शब्द !
ये समझते समझते तो हमारी आधी ज़िन्दगी निकल जाती है…
एक नई जान का सृजन उसके माता-पिता मिलकर करते हैं,
और उस जान का आगमन भले उसकी माँ के कोख से होता है…
लेकिन उसे गोद तो पहले पिता का ही नसीब होता है,
क्योंकि माँ तो बच्चे को जन्म देने के बाद बेसुध बिस्तर पर पड़ी होती है…
पिता हमारी जिंदगी का वो मजबूत दीवार होता है,
जो अपने बच्चों को हर एक परेशानी तकलीफ से बचा कर रखता है…
खुद भले ही कितने भी दर्द में हों, लेकिन हमें कहेंगे बेटाजी सब ठीक है, वो होता है पिता!!!
ये सच है कि माँ की बराबरी कोई नहीं कर सकता,
क्योंकि वो हमें नौ महीने अपने अंदर अपने खून से सिंचती है…
लेकिन जो पूरी जिंदगी हमें अपने खून पसीने से सींचता है, वो होता है पिता…
एक साल में मौसम भी चार बार अपना रुख बदलती है,
कभी गर्मी कभी बरसात कभी ठंढ तो कभी बसंत….
लेकिन जो अपने बच्चों के सामने अपने माथे पे एक शिकन न आने दे,
और बेहिसाब अपने बच्चों पे प्यार लुटाये वो होता है पिता…
न जाने ऊपरवाले ने कौन से साँचे में ढाला है पिता को,
जेब में भले ही एक रुपैया भी न हो,
लेकिन पूरे दुनिया को खरीदने के सपने दिखाने वाला वो हौसला बुलंद इंसान ही है पिता…
बचपन में अगर हम गिर जाए और हमें चोट लग जाये तो,
माँ बोलेगी नहीं नहीं अब मत चल चोट लग गया…
लेकिन गिरे हुए में जो हमें अपनी उँगली पकड़ाकर उठाये,
और फिर से हमें चलना सिखाए वही तो हैं हमारी ज़िंदगी का सबसे बड़ा सहारा हमारे पिता…
माँ की ममता तो सब समझ जाते हैं,
लेकिन पिता की फिक्र कोई नहीं समझ पाता…
पिता हमारी ज़िंदगी का वो मजबूत ढाल हैं जिसके बिना हमारा जीवन ही व्यर्थ है,
कहने को पिता शब्द दो अक्षरों का जोड़ है,
लेकिन इन्हीं दो अक्षरों में न जाने कितनी ज़िंदगियाँ निर्भर हैं और हर एक ज़िन्दगी को बड़े प्यार से अरमान से सजाता है पिता…
कितना भी लिख लूँ पिता के लिए बहुत कम है क्योंकि ,
पिता की तो पूरी जिंदगी बीत गई मुझे लिखते-लिखते…
अच्छी शिक्षा अच्छे संस्कार सही गलत की पहचान और कभी न हार मानने वाले,
दृढ़निश्चयी अनमोल पाठ हमें पिता से ही मिलता है…
मेरा व्यक्तिगत अनुभव है एक लड़की के जीवन का पहला हीरो उसके पापा ही होते हैं,
बचपन, जवानी, शादी, मायका, ससुराल इन सबमें कोई समझे न समझे कोई साथ दे ना दे लेकिन मेरे पापा हमेशा मेरे साथ खड़े होते हैं…
और उनका मेरे साथ होना मुझे बहुत सुकुन और शांति देता है,
पिता ही है ऐसा शब्द, जो हर पल मुझे हौंसला और जुनून देता है।

लेखिका रमा आनन्द लिखती हैं… MY PAPA MY HERO….
I LOVE MY PAPA MOST और मैं ये भी चाहती हूँ कि मेरी दोनो बेटियाँ भी अपने पापा को अपना हीरो माने और यही मान रखे जो मैं रखती हूँ मेरे पापा के लिए!!!

                                     ❤️ रमा ❤️

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