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भारतीय महिलाओं के उत्थान में डॉ बी.आर. अम्बेडकर का योगदान

( डॉ गुलाब चंद पटेल )

भारतीय समाज में खास तौर पर महिलाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय थी, अंतिम दो सौ वर्षो के समय काल में भारत वर्ष के लिए परिवर्तन युग था, 19 वी सदी में भारतीय नारी सती प्रथा, बाल विवाह, बाल हत्याएं, एक से अधिक पत्नी, विधुर फ़ेर विवाह प्रतिबंध, दहेज प्रथा, जाति बंधन, ऊँच नीच, जातिगत भेदभाव, अस्पृश्यता, निरक्षरता, कन्या शिक्षा का अधिकार नहीं, कुरीतियां और अत्याचार से स्थिति दयनीय थी,
एसी परिस्थिति में से महिला ओ को निकालने के लिए ब्रह्मो समाज के अग्रणी राजा राम मोहन राय, प्राथना समाज के अग्रणी महादेव गोविंद रान डे,, आर्य समाज के स्वामी दयानन्द सरस्वती जेसे अनेक समाज सुधारवादी और संस्थाएं, आगे आई थी, ये सभी महिलाओं के लिए सुधारवादी बनकर मर्यादित काम कर रहे थे, लेकिन ये सभी का कार्य ज्यादातर समाज के उपरी वर्गों के लिए केंद्रित था, एक सिर्फ ज्योतिबा फूले और उनके धर्म पत्नी ने महाराष्ट्र में शूद्र वर्ग में काम शुरू किया था,
20 वी सदी में भीमराव रामजी अम्बेडकर के उदय होने से ये सुधारा वादी निचले स्तर पर अस्पृश्य महिला ओ तक पहुचा, अस्पृश्य महिला, अस्पृश्य वर्गों में भी थी, और महिलाए भी थी, इस तरह उनकी वेदना, व्यथा और दुर्दशा तो दोगुनी होती जा रही थी,
भारतीय महिला समाज का स्वतंत्रता और समानता का संग्राम डॉ बाबा साहब अम्बेडकर के नेतृत्व में, निचले वर्ग की महिलाओं से, ‘महाड’ से शुरू हुआ था, चाव दार तालाब मे से पानी प्राप्ति का महाड सत्याग्रह (1829)डॉ बी आर अम्बेडकर के लिए धर्म युद्ध था, यह संग्राम में डॉ अम्बेडकर के एलान से महिलाए बहुत भारी संख्या में जुड़ी थी और विजय प्राप्त करवाया था,
यह सत्याग्रही महिलाओं को संबोधित करते हुए डॉ अम्बेडकर ने कहा था कि, ‘तुम्हारी जाती को तुम अस्पृश्य मानना नहीं… बिन दलित महिलाए जिस तरह सारी पहनती है, उस तरह तुम भी पहनो, कपड़े चाहे फटे हुए हो लेकिन उसे स्वच्छ रखिये, आप का घर भी स्वच्छ रखो, तुम्हारी गोद से जन्म लेना वो पाप, और अन्य कि कोख से जन्म लेना पुण्य, ऎसा क्यू? विचार तुम्हें करना है, तुम संकल्प करो की एसी कलंकित स्थिति में अब तुम जियें गी नहीं, तुम्हें पुराने गंदे विचारो का त्याग करना होगा, तुम्हारी पहचान की निशानी चांदी के गहने है न? छोड़ दें उसे, घर में आ मंगल बात होने नहीं देना, मरे हुए पशु का मांस खाना नहीं, शराबि पति, भाई, पिता या फिर पुत्र को खाना देना बंद कर दो, लड़कियों को शिक्षा दिलाए, ज्ञान और विद्या ही महिला ओ का कल्याण करने वाली हे, हमारी मूवमेंट का लक्ष्य अत्याचार, अन्याय, पुरानी रीत रस्म, परम्पराएं, किसी के विशिष्ट अधिकार विरुद्ध लड़कर, हमारे लोगों को कायम की गुलामी मे से मुक्त करना है, याद रखिए… जो संघर्ष करता हे, उसे ही सफलता प्राप्त होती है,


दूसरे दिन महाड परिषद् मे, महिला ओ ने अपने अपने गांव जाने से पहले, अपने नेता के आदेश से, अपनी सम्पूर्ण वेश भूसा बदल ली थी, चांदी के गहने उतार दिया था, युग पुरुष डॉ अम्बेडकर की युग वाणी का प्रभाव था, नारी मुक्ति की ये चिनगारी डॉ अम्बेडकर ने प्रकट की थी,
देश में एक व्यापक मान्यता प्रचलित है कि, डॉ बाबा साहब अम्बेडकर स्वयं अस्पृश्य वर्ग के हे, इस लिए उनकी लगन और निष्ठा दलितों के प्रति ही था, लेकिन हकीकत कुछ अलग ही थी, डॉ अम्बेडकर एक निष्ठावान, सम्वेदनशील व्यक्ति थे, उन्हों ने पीड़ा या दर्द का जहा और जब अनुभव किया था, तब उनका ह्रदय व्याकुल हो गया था, परिणाम स्वरुप खुद पीड़ाएं और यातनाएं दूर करने का मिशन बन चुके थे, डॉ बाबा साहब अम्बेडकर की नारी उत्थान की भूमिका को इस सन्दर्भ में गिनना होगा,
हिन्दू समाज में अस्पृश्य लोगों पर अत्याचार इस लिए होते थे कि उन्हें सबसे निम्न जाति मे धकेल दिए थे, परंतु भारतीय महिला की हालत इस बाबत मे तो सभी जाति और वर्ग में वो निम्न कक्षा की ही थी, और अस्पृश्य शूद्र महिला तो अति निम्न कक्षा में थी, डॉ अम्बेडकर का मिशन दलित महिला तक सीमित नहीं था, समग्रतः भारतीय महिला जगत को स्वतंत्रता और समानता दिलाने के लिए वो निश्चित थे, हा, उनकी काम करने की शुरुआत दलित महिला ओ से हुई थी,
अखिल भारतीय दलित वर्ग परिषद् का सम्मेलन सन 1942 मे नागपुर में आयोजित किया गया था, जिस में 70000 से ज्यादा लोग उपस्थिति थे, वहीं मंच के नीचे बाद में मिली हुई ‘महिला परिषद्’ मे डॉ अम्बेडकर ने संबोधित करते हुए कहा था कि, ‘महिला ओ का अपना खुद का एक संगठन होना अत्यंत महत्वपूर्ण है, समाज में स्थिर बन गई परम्पराओं ने और रीति रिवाजों को खत्म कर के तुमने महान कार्य किया है, आप की प्रगति से मुजे संतोष हे, अब तुम्हारे संतानो को शिक्षा दिलाए, उनकी महत्‍व कांक्षा ओ को जाग्रत करिए, उन्हें कहो कि जगत में महान होने के लिए ही आप का सर्जन हुआ है, उनके मन में ज़ाम गई लघुता ग्रंथी को भगा दो,
कन्या ओ को खास तौर पर कहना है कि, शादी करने मे जल्द बाजी न करे, शादी करने वाले को समझना होगा कि ज्यादा बच्चे को जन्म देना वो पाप हे, और सब से अधिक जरूरी बात यह है कि, विवाहित कन्या ने विवाह के बाद अपने पति के साथ निष्ठा से रहना चाहिए, पति के साथ मित्र भाव, समदर्शिता, नहीं की उसकी दासी के रूप में,
महिला के जीवन का विकास और उन्नती के लिए डॉ अम्बेडकर ने जीवन के केसे उम्दा पाठ पढ़ाए है वो देखो, ये तो सिर्फ नमूने के रूप में हे, डॉ अम्बेडकर ने सभी महिला ओ मे आत्म विश्वास और आत्म सम्मान जगाया था,
भारतीय संविधान में डॉ अम्बेडकर ने महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा, स्वतंत्रता और समानता दिलाने के पक्ष में थे, उन्होंने इस लिए ही भारतीय संविधान में भारत के कानून मंत्री और भारतीय संविधान के रचयिता के रूप में नारी समाज को न्याय दिलाने में बहुत प्रयास किए, इस लिए स्वतंत्र भारत में संविधान से नारी देश की नागरिक हे, गुलाम नहीं है, धर्म, जाति, लिंग, प्रदेश में महिला ओ को समान तक प्राप्त हे, अब स्वतंत्र हे, वाणी की अभिव्यक्ति के लिए, सभा, संगठन रचने के लिए देश में चाहे वहा भ्रमण कर ने के लिए, शासकीय कार्यालयों में नोकरी ओ मे और सरकारी पदों मे उनका समान अधिकार है, शिक्षा प्राप्ति के लिए और पढ़ाई कराने के लिए उनका अबाधित अधिकार है, वे स्वतंत्र मताधिकार धारण करती है, लोक प्रति निधि के रूप में चुनाव जीतने के लायक है, ऎसे अनेक संवैधानिक अधिकार, जो महिला ओ को स्वतंत्रता के बाद प्राप्त हुए हैं, उस के लिए छेड़ा गया अभियान मे डॉ अम्बेडकर का महत्व पूर्ण योगदान है, इन्हें इतने से संतोष नहीं था, उन्होंने महिला कामदार के लिए भी मूवमेंट चलाया, प्रसूति के समय महिला कामदार को छुट्टियां मिले और सह वेतन मिले ऎसा उद्योग पति और सरकारों को जिम्मेदारी सौंपी गई, फिर भी उन्हें पर्याप्त नहीं लगने से भारतीय महिला ओ के विशेष अधिकारों के लिए लोक सभा में उन्होंने हिन्दू संहिता विधेयक (हिन्दू कोड बिल) पेश किया था, डॉ अम्बेडकर ने यह विधेयक पेश किया गया था तब पुरुष प्रधान देश में हलचल मच गई थी, विधेयक में विवाह की विविधता पर अंकुश लगाने के लिए, महिला ओ को पति से मुक्त होने का अधिकार, पूंजी पाने का अधिकार, बच्चे को गोद लेने के लिए पत्नी की मंजूरी, जरूरी, जेसे अनेक नए बदलाव अम्बेडकर लाए थे,
यह विधेयक में दूसरे बहुत सारे प्रावधान रखे गए थे, लेकिन प्रचंड विरोध के कारण अंत में ऊपर मे दी गई चार बाबत को स्वीकार के सभी के बाद मे अलग अलग तौर पर कानून बने, डॉ बाबा साहब अम्बेडकर हकीक़त मे अभिनंदन के अधिकारी हे,
भारतीय महिला ओ की स्थिति मे सुधार लाने में डॉ अम्बेडकर का आदर्श गौतम बुद्ध थे, भारतीय महिला ओ को पुरुष समकक्ष, श्रेष्टता, स्वतन्त्रता, समानता और प्रतिष्ठा दिलाने का उदेश्य था, डॉ बाबा साहब अम्बेडकर ने महिला ओ के उत्थान के लिए संविधान में उसके अनुरूप कानून व्यवस्था बनाकर अधिकार दिए गए, डॉ अम्बेडकर को नमन करते हैं।

लेखक परिचय…

डॉ गुलाब चंद पटेल
कवि लेखक अनुवादक
नशा मुक्ति अभियान प्रणेता
ब्रेसट कैंसर अवेर्नेस प्रोग्राम आयोजक
भूत पूर्व ऑफिस सुपरिटेंडेंट जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक ऑफिस अहमदाबाद
इंडियन लायंस गांधी नगर स्वर्णिम क्लब
पता :हरि कृपा प्लॉट 127 /1 सैक्टर 14 गांधी नगर पिन 382016
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