तमसा साहित्य लोकमंच ने सम्मान सत्र और कवि सम्मेलन का आयोजन किया
मऊ। तमसा साहित्य लोकमंच की तरफ से रविवार की देर शाम डुमरांव मोड़ पर सम्मान सत्र और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें साहित्य अकादमी मुंबई के राष्ट्रीय अध्यक्ष और जैनेंद्र पुरस्कार से सम्मानित कवि पवन तिवारी को अंगवस्त्र और प्रशस्ति पत्र देकर महर्षि बाल्मीकि सम्मान से सम्मानित किया गया। साथ ही वरिष्ठ नागरिक परिषद के सदस्य रामजी उपाध्याय और रमाशंकर सिंह को भी अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भोजपुरी के वरिष्ठ कवि दयाशंकर तिवारी ने किया। कवि गोष्ठी में महाराष्ट्र और पूर्वांचल के अन्य जिलों सहित स्थानीय कवियों ने काव्य पाठ किया। दूसरे सत्र की शुरुआत युवा कवि बापू नंदन मिश्र ने सरस्वती वंदना से शुरू हुई, लखनऊ से आए सौरभ त्रिपाठी ने “आंख से बह गया पानी न समझना मुझको, मैं हकीकत हूँ कहानी न समझना मुझको, सुनाकर खुब तालियां बटोरी, आजमगढ़ से आए कवि रूद्र नाथ चौबे ने आज चीखता जनगणमन, रक्त का हर एक कतरा जैसी देश भक्ति गीत सुनाकर श्रोताओं में जोश भर दिया, कवि महेंद्र मृदुल ने “घर की लक्ष्मी कहाती हैं बेटियां सुनाकर बेटियों के महत्व को बताया, जयहिंद सिंह ने जिस घर में बुजुर्गों का सम्मान नहीं है जैसी रचना सुनाकर समाजिक कुरितियों पर प्रहार किया, राजनाथ यादव राज ने चलो फिर से उजड़ा घरौंदा बनाएं जैसी समसामयिक कविता सुनाकर लोगों को उत्साहित किया लाल बहादुर चौरसिया ने उसने बोला राम, मैंने बोला राम, हुआ उसी के हाथ से, मेरा काम तमाम जैसी कविता सुना कर लोगों को सोचने के लिए मजबूर कर दिया मंच के सचिव और गीतकार लाल बहादुर सिंह ने गांव गवाते गवई पन जैसी रचना सुनाकर वाहवाही बटोरी, पवन तिवारी, राघवेंद्र सिंह, हास्य कवि नागेंद्र सिंह बागी, शैलेंद्र, राकेश पांडे सागर, पुरुषार्थ सिंह, आशा साहनी ने काव्य पाठ किया तमसा साहित्य लोक मंच के अध्यक्ष जितेंद्र मिश्र काका ने कहा कि मंच का उद्देश्य काव्य गोष्ठी और कवि सम्मेलनों के माध्यम से नवांकुर कवियों को प्रोत्साहित कर आगे बढ़ाना है और साहित्य के क्षेत्र में मुकाम हासिल करने वाले कवियों का सम्मान किया जा सके।
