राजस्व अभिलेखों से 1994 के बाद सड़क ‘छू मंतर’ — भूमाफियाओं और राजस्व विभाग की मिलीभगत का खुलासा
मऊ। सदर तहसील क्षेत्र के बैजापुर गांव में बरलाई–पूराघाट मार्ग की सरकारी सड़क के रिकॉर्ड से “गायब” होने का मामला सामने आया है। जांच में पता चला है कि 1994 तक यह सड़क राजस्व अभिलेखों में दर्ज थी, लेकिन उसके बाद रहस्यमय तरीके से उसे अभिलेखों से हटा दिया गया। अब उसी जमीन पर भूमाफियाओं ने खरीद–फरोख्त का खेल शुरू कर दिया है।
यह सड़क वर्ष 1983 में किसानों की जमीन अधिग्रहित कर 120 फीट चौड़ी बनवाई गई थी, ताकि मऊ शहर से पूराघाट बाजार तक सीधा आवागमन सुनिश्चित हो सके। उस समय सरकार ने प्रभावित किसानों को मुआवजा भी दिया था। लेकिन वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड में सड़क का कोई उल्लेख नहीं है।
राजस्व विभाग की इस अनदेखी (या साज़िश) का फायदा उठाकर भूमाफियाओं ने सड़क की जमीन को निजी संपत्ति की तरह बेचना शुरू कर दिया। इससे प्रभावित किसानों ने हाल ही में जिला प्रशासन से शिकायत की थी, परंतु सड़क का रिकॉर्ड अब तक राजस्व अभिलेखों में नहीं मिला।
शिकायतकर्ता हरिओम राय ने सोमवार को जिलाधिकारी मऊ के समक्ष उपस्थित होकर कई प्रमाणित दस्तावेज़ प्रस्तुत किए, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि राजस्व विभाग की मिलीभगत से सड़क को रिकॉर्ड से हटाया गया है। डीएम को सौंपे गए दस्तावेज़ों में सड़क का उल्लेख 1994 तक मौजूद है, जबकि वर्तमान अभिलेखों में उसका नामोनिशान नहीं है।
डीएम ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य राजस्व अधिकारी को जांच सौंप दी है और दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
इस पूरे प्रकरण ने न केवल राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि जनता की जमीन और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाया है।
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📢 जनहित में उठ रही मांगें
• सड़क को तत्काल पुनः राजस्व अभिलेखों में दर्ज किया जाए।
• दोषी अधिकारियों और भूमाफियाओं पर एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए।
• किसानों को उनकी जमीन और हक़ की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

