MAU में दिसम्बर तक मिले 54 कुष्ठ रोगी, से न करें इनके साथ भेदभाव : CMO

मऊ। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अन्तर्गत संचालित राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के अन्तर्गत समुदाय को कुष्ठ रोग से निजात दिलाने के लिये स्वास्थ्य विभाग द्वारा खोजी एवं निगरानी अभियान तहत घर-घर जाकर कुष्ठ रोगियों के खोजने का कार्य कर रही है, साथ ही उनकी पूरी निःशुल्क जाँच और इलाज का प्रबंध भी कर रही है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ श्याम नरायन दुबे ने बताया कि कुष्ठ रोग लाइलाज नहीं है और कुष्ठ रोग का पूर्णतः उपचार सम्भव है। कुष्ठ रोगियों को स्पर्श करने से कुष्ठ रोग नहीं होता है। कुष्ठ रोगियों से भेदभाव न करें, उनके साथ समान व्यवहार और बर्ताव करें आदि के बारे में समय-समय पर आशा, एएनएम और आनंगबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा सभी को जानकारी भी दी जा रही है।
जिला कुष्ठ रोग अधिकारी और नोडल डॉ श्रवण कुमार ने बताया कि इस रोग के संक्रमण का कारण रोगाणु या बैक्टीरिया जिसे माईकोबैक्टीरियम लेप्री कहा जाता है, संक्रमण का कारण बनता है। कुष्ठ रोग का उपचार संभव है लेकिन इलाज में देरी होने से विकलांगता हो सकती है। यह संक्रमण रोगी की त्वचा को प्रभावित करता है तथा रोगी की तंत्रिकाओं को क्षति पहुंचाता है। यह रोग आँख और नाक में समस्याएं पैदा कर सकता है। कुष्ठ रोग से डरे नहीं, कुष्ठ रोगियों के साथ सामान्य रोगियों की तरह व्यव्हार करें। वहीं कुष्ठ रोगी के साथ उठना, बैठना, खाना-पीना एवं सहज व्यवहार करें।
जिला कुष्ठ रोग परामर्शदाता डॉ कृष्णा यादव ने बताया कि जिले में गतवर्ष 67, इस वर्ष 2021 दिसंबर तक 54 कुष्ठ रोगियों की पहचान खोजी एवं निगरानी अभियान के तहत की गई और उनका निःशुल्क इलाज़ जिला अस्पताल व सामुदायिक व् प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के माध्यमों से किया जा रहा है। गृह भ्रमण और अभियान के दौरान जाँच में व्यक्ति के अन्दर कुष्ठ रोग के लक्षण पाए जाते हैं तो उसको कुष्ठ की निःशुल्क दवाएं तब तक दी जाएंगी, जब तक उसका कुष्ठ रोग पूरी तरह से ठीक न हो जाए। अब तक 54 कुष्ठ रोगियों को फुट वियर, 45 को सेल्फ केयर किट उपलब्ध करायी जा चुकी है।

