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मऊ, बलिया व आजमगढ़ में 30 जनवरी से चलाया जायेगा स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान

आजमगढ़। प्रदेश के आज़मगढ़ मंडल के मुख्यालय सहित बलिया और मऊ जिले में लोगों को कुष्ठ रोग से छुटकारा दिलाने हेतु 30 जनवरी 2019 से 13 फरवरी तक स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान चलाया जायेगा और इस अभियान की शुभारम्भ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि 30 जनवरी के दिन से शुरू किया जायेगा, क्योंकि महात्मा गाँधी ने कुष्ठ रोगियों के प्रति निस्वार्थ मदद की थी।
इस 15 दिवसीय अभियान के दौरान कुष्ठ रोग से जुडी भ्रांतियों को जागरूकता के माध्यम से दूर किया जायेगा| साथ ही कुष्ठ रोगियों को शासन से मिलने वाली सुविधाओं के सम्बन्ध में जानकारी भी दी जाएगी।
कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ. एन. एन. वर्मा ने बताया कि 2 सप्ताह तक चलने वाले जागरूकता अभियान के दौरान शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। सभी सरकारी कार्यालयों और संस्थाओ में कुष्ठ रोग को लेकर जिलाधिकारी की घोषणा व शपथ को संबंधित विभागाध्यक्ष द्वारा पढ़ा जायेगा| ग्राम स्तर पर प्रधानो को यह जिम्मेदारी दी जायेगी।
उन्होंने बताया कि 2 सप्ताह तक जागरूकता अभियान चलाने के बाद 15 से 28 फरवरी तक एल०सी०डी०सी० (कुष्ठ रोग खोज अभियान) शुरू होगा। जिसमे स्वास्थ्य विभाग की टीमें डोर टू डोर जाकर कुष्ठ रोगियों की खोज करेंगी| संभावित रोगियों का परिक्षण कर उन्हें संबधित पीएचसी व सीएचसी रेफर किया जायेगा| कुष्ठ रोग की पुष्टि होने के बाद पीएचसी और सीएचसी स्तर पर ही एमडीटी की दवा दी जायेगी।
उन्होंने बताया कि जनपद में मरीजो को दो तरह के कार्ड जारी होते है| एक लाल और दूसरा पीला। लाल कार्डधारक मरीज को 12 माह और पीले कार्ड धारक मरीज को 6 माह तक दवा लेनी होती है।
क्या है कुष्ठ रोग…
इस रोग के संक्रमण का कारण रोगाणु या बैक्टीरिया होता है, जिसे माईकोबैक्टीरियम लेप्री कहा जाता है, जो संक्रमण का कारण बनता है। यह संक्रमण रोगी की त्वचा को प्रभावित करता है तथा रोगी की तंत्रिकाओं को नष्ट कर देता है। यह रोग आँख और नाक में समस्याएं पैदा कर सकता है।
क्या हैं इसके लक्षण…
सामान्य त्वचा की तुलना में थोड़े लाल, गहरे या हल्के स्पॉट/धब्बे हों, यह स्पॉट/धब्बे सुन्न हो सकते हैं तथा यहं तक कि यह त्वचा के प्रभावित हिस्से पर होने वाले बालों को झड़ने की समस्या को भी पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा हाथ, उंगली, या पैर की उंगली का सुन्न होना। आँखों की पलक झपकने में कमी आना।

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