मधु चतुर्वेदी की किताब : धनिका व मन अदहन
पुस्तक समीक्षा: कनक राही…
चार खूबसूरत लड़कियाँ धनिका..अर्चना..प्रेमा..श्रद्धा । अंतिम साँस तक ना भूल सके ऐसी प्रेम कहानी । अब तक की पढ़ी, सुनी या देखी सबसे दुःखद वासु और अर्चना की मोहब्बत की दास्तान। “धनिका” खत्म कर लेने के बाद मैं पलके मूंद सोचती रही कि वासु आज चाहे दुनिया के किसी भी मल्टीनेशनल कम्पनी में काम कर रहा हो …चाहे वो अर्चना के जीवन से बेखबर है लेकिन क्या अब भी उसे अर्चना याद नही आती होगी ? क्या अर्चना आज भी वासु से कभी किसी मोड़ पर अनायास मुलाकात की प्रतीक्षा नही करती होगी …? ( इन शंकाओं का सच तो लेखिका जानती होगी क्योंकि उपन्यास के वास्तविक किरदारों से वो मिली है।)
मैं ये जरूर दावा कर सकती हूँ कि उपन्यास धनिका खत्म होने के बाद पाठक के ज़ेहन में दुःख.नैराश्य..रिक्तता क्षितिज तक पसर जाएगी ( ऐसा क्षोभ और सन्नाटा बॉलीवुड के मंझे कलाकार मनोज बाजपेई की फ़िल्म ” शूल” देखकर हुआ था ।)
उपन्यास एक सफल और बेहद सधा किस्सागो है जो पाठको को शब्दों की सूक्ष्म कारगरी से भव्य जीवन दर्शन दे जाता है ।
जब मैंने अपने दोस्तों और फेसबुक में लोगों से “धनिका” के बारे में सुना था तो लगा की मंगाउँ या नही । बेहद चर्चित यह उपन्यास कही …”ऊंची दुकान फीके पकवान” ना हो। किताब यदि औसत निकले फिर एक बार पढ़ने के बाद किताब के पैसे अखरने लगते है । यह भी अनुभव हो रहा था कि पाठक मधु जी की प्रशंसा में अतिवाद के शिकार है । मेरी एक सहेली जिसने “मन अदहन” मंगवाई थी से माँगकर पहले पढ़ी ।…मेरी वो सहेली मधु मैम के प्यार में बावली क्यों है ये मुझे मन अदहन पढ़कर समझ आया । मैंने बिना देर किए धनिका आर्डर की ।
लेखक द्वारा डूबकर लिखा गया यह उपन्यास धनिका पाठकों को भी आँसुओं के विराट समन्दर में डुबोता है । आप अपने किसी भी पसंदीदा उपन्यासकार का नाम जेहन में लाये या फिर पढ़े हुए किसी सर्वश्रेष्ठ नावेल या कहानी को याद करिये । लेखक ने यदि मन से लिखा है तो पाठक के दिमाग में उस कहानी का सिनेमा चलने लगता है ….। कोई भी कहानी या उपन्यास अपने किरदारों और घटनाक्रम से पन्ने दर पन्ने विस्तार पाते है । एक सधा हुआ लेखक कभी भी कहानी में कोई अस्वाभाविक चमत्कारिक घटना या फिल्मी रहस्योद्घाटन करने से परहेज़ रखता है । उत्कृष्ट रचनाएँ कहानी को सहज संवादों , स्वाभाविक घटनाक्रम को बाँध लेने वाले चुंबकीय वाक्य सौष्ठव , प्रवाह में ग्राह्यय भाषा में प्रस्तुत करती है ..।
“धनिका” और “मन अदहन” में मैंने कलम का यही जादू पाया ….शब्दों का यही मायजाल देखा …। बेहद सामान्य लोगों की कहानियाँ । सबसे ज्यादा चर्चित कहानी “मेरी झिल्ली” …पाठक के हृदय कोटर को आँसू से लबालब नही भर देती.? कहानी खत्म होने के बाद अजीब सा खालीपन…भव्य नैराश्य की अनुभूति .।
मैं हमेशा से उम्दा साहित्य की शौकीन हूँ । मुझे बड़ा फक्र था अपनी इस धारणा पर कि आज के लेखक पाठकों को वो मानसिक खुराक नही दे रहे है कि पाठक पुराने साहित्यकारों की रचनाओं की तरह उनके लिखे के नशेड़ी बन जाए ।लेकिन मधु चतुर्वेदी ने मेरी इस धारणा को धराशाई कर दिया । लम्बे समय बाद ऐसी रोचक शैली, ऐसा मनहर कहन पढ़ने मिला कि पाठक बीच में उनकी चुम्बकीय किताब छोड़ ही ना पाए। किताब पूरी करने से पहले मैंने अपना फोन नही उठाया ।
“मन अदहन” चूंकि कहानी संग्रह है तो अलग अलग फ्लेवर के भाव प्रधान की कहानियाँ मिलती है । मन अदहन में कही किसी कहानी में ऐसी गम्भीरता कि स्तब्ध पाठक एकाएक भावशून्य हो जाए लेकिन फिर अगली ही कहानी ऐसी कि इतनी हँसी आई कि मैंने अपने छोटे भाई को फोन करके दो पन्ने पढ़कर सुनाए और वह भी हँस हँस कर लोटपोट हो गया ।
असल साहित्य वही है जो जनमानस को स्वयं से जोड़ ले…जो समाज की कहानी को समाज की जुबानी ही सुनाए । मन अदहन की कहानियाँ “हमारी शादी” “बड़ी आँखों वाली” “बेबी दीदी की शादी” में नटखटपन , शरारत और लेखिका के हास्यबोध पर अचरज होता है तो “गाँव की ओर” और “मेरी झिल्ली” में उनकी गहरी संवेदनशीलता पर नतमष्तक होने की इच्छा । लेखिका ने बेवज़ह के बौद्धिक पांडित्य प्रदर्शन और क्लिष्ट शब्दावली से परेहज रखते हुए बातचीत की सहज सरल भाषा का सुंदर सफल प्रयोग किया है ।
धनिका उपन्यास अपने सूक्तियुक्त वाक्यों , परिपक्व भाषा , प्रेमचन्द्र, महादेवी की गहरी छाप और अचंभित करते बिम्बो के प्रयोग से उच्च साहित्यिक श्रेणी में आ खड़ी होती है । मैं पुराने और युवा लेखकों को समान रूप से पढ़ती चली आ रही हूँ ..।आज के युवा लेखक यदि ग्रामीण पृष्ठभूमि पर उपन्यास लिखते है तो कही ना कही वे रागदरबारी की नकल करते लगते है …यदि वे कालेज राजनीति और लव स्टोरी पर लिखते है तो धर्मवीर भारती की गुनाहों का देवता और चेतन भगत को कॉपी करने के प्रयास में दिखते है । प्रेम कहानियों में जबरदस्ती की कल्कहानीपनाशीलता और सतही प्रयोग कर डालते है। ये नए लेखक प्रायः सफल लेखकों के असर से बेअसर नही है ।
लेकिन मधु चतुर्वेदी की कहानी संग्रह ” मन अदहन ” और उपन्यास “धनिका” 24 कैरेट खालिश और मौलिक शैली में लिखा गया है …। मेरा दावा है कि जिन्होंने अपने जीवन में एक किताब भी ना पढ़ी हो उनके हाथ से भी ये किताब पहले पन्ने के बाद नही छूट सकती ….। मधु ईश्वर आपको दीर्घायु रखे ..। फिल्मों से भी ज्यादा रोचक लिखने वाली मधु को ढेर प्रेम 💞
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