पर्यावरण के प्रति समर्पित सेवा भाव से काम करते हैं रितेश व राजन
जिन पर हमें नाज है…
● यदि उन्हें जिद है कि फलक पर बिजलियाँ गिराने की तो हमे भी जिद है वही आशियाँ बनाने की
(डॉ अरुण कुमार मिश्र)
कोपागंज/मऊ। मंजिले उन्ही को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है पंख से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है। उक्त युक्ति को चरितार्थ कर रहे हैं नगर कोपागंज के दोनों भाई रितेश चौरसिया और राजन चौरसिया किसी ने सच ही कहा है कि मन में यदि कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो परिस्थितियां और हालात आड़े हाथ में नहीं आती चाहे जीवन में कितना ही उतार-चढ़ाव क्यों ना आवे। एक बेहद ही साधारण परिवार में जन्मे दोनों भाई अपनी मेहनत और और जज्बा से जो मुकाम हासिल किया है उस पर पूरे नगर ही नहीं पूरे जनपद को भी नाज है यह अपनी मेहनत के बल पर पर अनेक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी पा चुके हैं इन्हें पूरा क्षेत्र पर्यावरण प्रेमी के रूप में जानता है। अभी हाल ही में जनपद मऊ के वालीबाल टूर्नामेंट टीम के संयोजक व समाजसेवी अलक्क्षेन्द्र विक्रम सिंह ने राजन चौरसिया, रितेश चौरसिया को अंगवस्त्रम व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया, गणतन्त्र दिवस 26 जनवरी पर पुलिस लाइन में जनपद के पूर्व कप्तान ललित कुमार सिंह ने पर्यावरण के लिए सजग प्रहरी के रूप में काम करने के लिये सम्मनित करते हुय सार्वजनिक मंच से लोगों से अपील किया आज हम सभी को इन द्वयभाइयों से सीख लेना चाहिए। इसके पूर्वभी संयुक्त राष्ट्र संघ से दोनों भाई दो बार सम्मानित भी हो चुके हैं और उनके पर्यावरण प्रेम को देखते हुय दोनों भाइयों को पर्यावरण सदस्य के रूप में भी नामित किया।
बताते चलें कि राजन व रितेश कोपागंज क्षेत्र के प्राचीन गौरीशंकर मन्दिर व आसपास के धार्मिक स्थलों पर अब तक हजारो पौधे लगा चुके है और इतना ही नही प्रति दिनइनकी देख भाल करना भी इनके जीवन की दिनचर्या में सुमार है।
वहीं कोपागंज क्षेत्र में कुछ लोग पिसान पोत पथ भंडारी बनने वाली कहानी को बयांं करते है ये दूसरो के हाथों लगाए गए पौधों के पास खड़ा हो कर फोटो खिंचवा कर उसे अपने हाथों लगाया गया बताते है और इसकी खबर भी अपने पक्ष में चलवा देते है इन्हें ऐसा करने में जरा भी संकोच नही होता कि लोग क्या कहेंगे।

