IIM पास आउट लड़का भी सरकारी नौकरी (सिपाही-चपरासी-क्लर्क-बैंक पीओ-रेलवे गार्ड) के आगे फेल
● तजुर्बा-ए-अगुअई (योग्य वर की तलाश) पार्ट-5
( उज्ज्वल )
लड़का आइआइएम कोझिकोड से एमबीए कर रखा है। एक मल्टीनेशनल कंपनी में एजीएम रैंक का अधिकारी है। करीब 25 लाख के सालाना पैकेज पर है। पिता एक सरकारी बैंक में चीफ मैनेजर थे। रिटायर कर गये हैं। बोरिंग रोड पटना में अपना तीन कमरे का फ्लैट है। लड़का फिलहाल बेंगलुरू में रह कर जाॅब कर रहा है। दहेजमुक्त शादी करने को तैयार है। जहानाबाद का मूल निवासी है। बस इतनी सी शर्त रखी है कि लड़की भी पढ़ी-लिखी हो। इतनी भर हो कि उसके साथ बेहतर तालमेल के साथ जीवन चल सके। दुल्हन की तलाश में लड़के की उम्र 39 साल हो गयी है। घर वाले लोग उसकी शादी के नाम से चिढ़ने लगे हैं। चूंकि इन दिनों मैंने यह सामाजिक दायित्व उठा रखा है। ऐसे में फेसबुक पोस्ट के आधार पर लड़के के संबंधी ने मुझसे संपर्क किया। उसने बताया कि लड़के की ओर से किसी तरह के दहेज का कोई मामला नहीं है। त्रासदी यह है कि इतना बढ़िया नौकरी और पारिवारिक पृष्ठभूमि होने के बाद भी उसकी शादी में परेशानी हो रही है। मैंने कुछ लड़कीवालों को इसके बारे में जानकारी दी। इसके पूर्व लड़के की मां से बातचीत की। उनकी बातचीत में अपने बेटे की शादी को लेकर चिंता स्पष्ट झलक रही थी। थोड़ी झल्लाहट भी थी। मां ने कहा-लड़की की तस्वीर यदि उसे पसंद आ जाये और लड़की वालों को लड़का पसंद आ जाए, तब दहेज की कोई जिच नहीं रहेगी। लेकिन यह पसंद हो तब तो। हर मां का सपना होता है कि जीते जी उनकी संतानों का घर बस जाये। संतानों की गृहस्थी अच्छे से चले। यह ख्वाहिश बिल्कुल सामान्य है। लेकिन बिहार में कुछ खास जातियों के बीच लाॅर्ड मैकाले की शिक्षा नीति की जड़ें इतनी गहराई में चली गई हैं कि लगता है कि अभी सरकारी नौकरी की मानसिकता से उबरने में दो-तीन पीढ़ी लग जाएगी। इसके बाद भी बदलेगी कि नहीं इसकी गारंटी नहीं है।
मेरे संपर्क में कोई छह-सात लड़की वाले भी हैं। मैंने एक-दो लोगों से इस लड़के के बारे में चर्चा भी की। किसी के समझ में बातें नहीं आयी। अब तो मैं माथा ठोक रहा हूं। हे भगवन, इन लोगों को कब बुद्धि आयेगी कि सरकारी नौकरी से इतर लोगों का जीवन भी शानदार और बेहतर हो सकता है। रही बात उम्र की। कई लड़कियों की उम्र भी 30 के आसपास है। फिर भी उनको यह लड़का उम्रदराज मालूम पड़ रहा है।
क्रमशः
