उत्तर प्रदेश

हां मैं उत्तर प्रदेश हूं

मेरी कलम से…

आनन्द कुमार

मैं शान्त हूं, मैं सरल हूं,
मैं निर्मल हूं, मैं निश्छल हूं,
मुझे अपने आप में रहने दो,
मुझे चुपचाप बहने दो।
मैं राम हूं, मैं घनश्याम हूं,
मैं मणिकर्णिका, मैं काशी धाम हूं,
मैं कबीर हूं, मैं ही रहीम हूं,
रविदास की अनन्य गाथा की,
मैं अनन्त तस्वीर हूं।
मुझे मत छेड़ो, मुझे चलने दो,
मैं हर नीति का कर्ता-धर्ता,
मैं राजनीति का निर्माता हूं,
मैं तय करता दिल्ली की कुर्सी,
मैं ऐसा भाग्य विधाता हूं।
मैं शान्त हूं, मुझे शान्त रहने दो,
मुझे चुपचाप चलने दो,
मैं भेदभाव नहीं करता हूं,
मैं जैसा हूं, मुझे वैसा ही रहने दो,
मैं भले ही उत्तर प्रदेश हूं,
लेकिन मैं भी देश हूं,
हां मैं उत्तर प्रदेश हूं,
मुझे शान्ति से रहने दो,
मुझे चुपचाप बहने दो,
मुझे चुपचाप रहने दो।

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