जी हुजूर : आप सांसद तो हो ही जाएंगे, घोसी की जनता का आप पर बड़ा कर्ज है, उतारेंगे कैसे
(आनन्द कुमार)
मऊ। देश की मतगणना के साथ घोसी लोकसभा की मतगणना शुरू हो चुकी है, कौन बनेगा घोसी का सांसद कुछ घंटों में पता भी चल जाएगा। वैसे तो घोसी में लड़ाई भाजपा व बसपा में आर-पार है, लेकिन परिणाम ना आने तक किसी भी एक को जीता देना यह ठीक नहीं होगा। क्योंकि इन दो के अलावा भाकपा के अतुल कुमार अंजान व कांग्रेस के बालकृष्ण चौहान के अलावा 11 अन्य प्रत्याशी भी चुनावी मैदान में है।
घोसी का चुनावी मुकाबला जनता की अदालत में आने से पहले ही बड़ा दिलचस्प रहा है।हम किसी भी प्रत्याशी को जीतने का प्रमाण पत्र नहीं दे रहे हैं लेकिन जो आशंका है कि बसपा व भाजपा ही लड़ाई में हैं, तो उनमें से जो एक दल का सांसद विजेता बनेगा उनसे कुछ सवाल है। यह सवाल मेरा नहीं है, उस जनता की जो आपको वोट दिया है, उस पदाधिकारी, कार्यकर्ता व सपोर्टर की है जो आपकी जीत बनाने के लिए मेहनत किया है…
अगर सांसद हरिनरायण राजभर होते हैं तो…
हरिनारायण राजभर जी आप अभी वर्तमान सांसद हैं, कुछ ही क्षणों में निवर्तमान सांसद भी हो सकते हैं ? इसके अलावा आप सांसद बने भी रह सकते हैं। ऐसे में आप अपने 2014 से 2019 तक के बतौर घोसी के सांसद के सफर का आकलन और मूल्यांकन स्वयं करें तो आप अपनी तस्वीर स्वयं देख लेंगे। घोसी की जनता के लिए आपके कार्य विशेष नहीं रहे हैं। टिकट मिलने के पूर्व तक, पक्ष व विपक्ष को यह पूरी उम्मीदें थी कि आपको टिकट तो नहीं मिल सकता। लेकिन हुआ वह जो किसी ने सोचा नहीं था। भाजपा हाईकमान ने आप को टिकट देकर न सिर्फ एक बहुत बड़ा दांव लगाया बल्कि आपके ऊपर एहसान भी किया। संसद में आपकी बेहतर मौजूदगी, पुरुष आयोग बनाने की मांग और अयोध्या में भगवान राम को एक अदद प्रधानमंत्री आवास दिलाने के लिए आपका पत्र लिखना काफी मायने रखता है, यह आपको ख्याति भी दिलाता। इन सब सोच को देने वाला युवा आपके पास मौजूद है, लेकिन आप इन युवाओं का फायदा नहीं ले पाते। इसके अलावा आपका मऊ में पत्रकारों को खनन माफिया बताना और उनपर मुकदमा दर्ज कराना, संसद में तृणमूल के सांसद के साथ आपने जो किया, भाजपा के नेताओं सहित विपक्षियों के प्रति आपके बिगड़े बोल जग जाहिर है।
सांसद जी आप मानिए या ना मानिए आपके कार्य शैली से जनता तो जनता, भाजपा के लोग भी नाराज हैं । लेकिन आपको टिकट मिलने से सभी ने अपनी नाराजगी दूर कर आपको सांसद और मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए जी तोड़ मेहनत किया है। अब अगर आप दुबारा सांसद हो जाते हैं तो आप मानिए या ना मानिए लेकिन जनता ने आप से नाराज होकर आप से कष्ट में हो कर आपके क्षेत्र में विकास ना होकर भी आपको दिया है इसलिए जब तक है जान आप पर बहुत है अब आप इस एहसान हो अगर 2019 से लेकर 2024 तक सांसद होते हैं तो उतारेंगे कैसे इसे आप सोचना होगा क्योंकि किस्मत भी आपके साथ कदम चूमती है। जनता के प्यार व किस्मत के खेल में आप जीत भी जाएंगे तो यह सिर्फ आपका किस्मत होगा। जनता तो आज भी अपने लिए विकास और आपके पार्टी के कार्यकर्ता व पदाधिकारी को आपसे एक बेहतर सांसद की उम्मीद संजो कर रखे हैं। आपको अपने अंदर परिवर्तन लाना होगा। आपको जनता के लिए मौजूद रहना होगा। आपको घोसी के लिए कुछ करना भी होगा। आपका यह कह देना की जनता मोदी को वोट दिया। इससे काम चलने वाला नहीं है। क्योंकि भाजपा ने जाति समीकरण में आपको भले ही टिकट देकर सांसद बना दिया, लेकिन इतिहास के समीकरण में आपको याद कर पाना मुमकिन नहीं होगा और आपकी यह कार्य शैली भाजपा के टिकट वितरण पर बार बार प्रश्न उठाएगी।
अगर सांसद अतुल राय होते हैं तो…
बसपा-सपा गठबंधन के प्रत्याशी अतुल राय का सांसद होना भी किस्मत वाला होने से कम नहीं है। वैसे तो अतुल राय शुरू से ही प्रथम और द्वितीय की लड़ाई में बने हुए हैं। लेकिन बसपा का घोसी लोकसभा का प्रभारी बनते ही अतुल राय का बाहरी के नाम पर विरोध और विरोध में बसपा के पुराने सांसद बाल कृष्ण चौहान को बसपा से निकाल देना तथा प्रभारी से प्रत्याशी बनने के दौर तक अतुल राय भाग्य के मजबूती के साथ घोसी में डटे रहे।
अतुल राय के नामांकन के बाद एक युवती द्वारा उनके ऊपर सोशल मीडिया के माध्यम से छेड़खानी का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराना। अतुल राय द्वारा इस मामले में अपनी सफाई देना। इसके बावजूद मामला बढ़ते जाना व मामले में अतुल राय का तब से अब तक फरार रहना और उनके नामौजूदगी में भी अतुल राय का चुनाव घोसी लोकसभा में सपा, बसपा व उनके अपनों के द्वारा मजबूती से लड़ा जाना कहीं ना कहीं अतुल राय के लिए किस्मत का अच्छा होना भी है। इतना ही नहीं अतुल राय पर आरोप लगने के बाद इनके पक्ष में मायावती का ट्विट इसके अलावा घोसी में आकर अखिलेश यादव के संग मायावती का बड़ा व सफल रैली करना कहीं ना कही अतुल राय के लिए दुख के इस दौर में खुशियों की सौगात भरा रहा होगा। अब कुछ घण्टों में पता ही चल जाएगा कि अतुल राय सांसद होंगे या नहीं?
लेकिन इतना तो तय है अगर अतुल राय सांसद होते हैं तो यह उनके जीवन की सबसे बड़ा खुशियों का पल होगा, जब वह देश की सबसे बड़ी पंचायत में बैठेंगे। लेकिन इसके साथ उनके ऊपर लगे आरोप भी उनके लिए दुख के बड़े कारण होंगे, ऐसे में उनको सबसे पहले अपने ऊपर लगे आरोपों से वह दाग हटाना होगा नहीं तो संसद से लेकर सड़क तक उनके ऊपर बार-बार उंगलियां तो उठती ही रहेंगी। इसके अलावा अगर अतुल राय सांसद होते हैं तो घोसी की जनता के साथ साथ बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी व अतुल राय के अपनों का बहुत बड़ा एहसान होगा। घोसी में मिले इन एहसानों के तले अतुल राय आजीवन दबे रहेंगे, एक-एक जन के एहसान की भरपाई वे किसी भी रूप में नहीं कर पाएंगे। ऐसे में अतुल राय को एक बेहतर सांसद होकर घोसी की जनता को दिखाना होगा की घोसी ने जिसे चुना है वह उनके हर कदम पर खरा उतरेगा। इसके अलावा बाहरी के मुद्दे पर भी वे घोसी की जनता से घर की तरह मिलेंगे, घोसी में कुछ अलग करेंगे।
… बाकी सभी 13 प्रत्याशी जिनमें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के अतुल कुमार अंजान, कांग्रेस पार्टी के पूर्व सांसद बालकृष्ण चौहान आदि हैं। जनता जनार्दन की अदालत में यह कहां तक पंहुचते हैं यह भी देखना होगा।
अब देखना होगा कि घोसी का सांसद कौन होगा यह तो कुछ देर में पता ही चल जाएगा लेकिन जनता जनार्दन को तो उम्मीद आखरी दम तक रहेगी। अब होने वाले सांसद महोदय आप बेहतर सांसद कैसे बनोगे यह आपकी अपनी जिम्मेदारी है।



