चर्चा मेंमिसाल-ए-मऊ

मऊ को कब मिलेगा कल्पनाथ जैसा विकास पुरुष….

(आशीष कुमार गुप्ता)

ये सवाल घोसी लोकसभा सीट के पूर्व सांसद कल्पनाथ राय के गुजर जाने के बाद से ही बना हुआ है…क्योंकि कल्पनाथ राय के निधन के दो दशक बाद भी कोई उनकी जगह नहीं ले सका…और इसके साथ ही पूरे मऊ में विकास का पहिया जहां का तहां रूका हुआ है…उनके बाद यहां जनता ने दूसरे कल्पनाथ को खोजने की बहुत कोशिश की लेकिन ये संभव नहीं हो सका…पार्टियों के साथ-साथ सांसद भी बदलते रहे लेकिन किसी ने जाम पड़े मऊ के विकास के पहिए को टस से मस तक नहीं किया…चाहे बात तब के बहुजन समाज पार्टी के बालकृष्ण चौहान की हो…या फिर समाजवादी पार्टी के चंद्रदेव राजभर की या फिर दारा सिंह चौहान की जो उस समय बहुजन समाज पार्टी में थे, इतना ही नहीं भाजपा के मौजूदा सांसद व वर्तमान भाजपा के प्रत्याशी हरि नारायण राजभर भी विकास की बात करने वाले प्रधानमंत्री का कुशल नेतृत्व व सूबे में भाजपा की सरकार होने के बाद भी यह इतिहास नहीं बदल सके…कल्पनाथ जैसे सांसद की तलाश में मऊ की जनता ने लगभग हर पार्टी और हर बार किसी न किसी को नये सांसद के रूप में मौका दिया, लेकिन किसी में भी कल्पनाथ की झलक नहीं दिखाई दी…इतना ही नहीं पिछले पांच बार से मऊ सदर विधानसभा सीट पर सत्तासीन बाहुबली विधायक मोख्तार अंसारी ने भी मऊ के विकास में रत्ती भर का योगदान नहीं दिया है…

और अब मऊ की जनता की उम्मीदें भी धूमिल हो गई हैं कि मऊ को फिर कभी विकास पुरुष, मऊ के शिल्पी कल्पनाथ राय जैसा कोई मिलेगा या नहीं…इस बार फिर से लोकसभा चुनाव के रण में दो ऐसे उम्मीदवार हैं…जिनका इतिहास पहले जैसा ही रहा है…जिसमें बसपा से कांग्रेस में आए बालकृष्ण चौहान हैं…तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी से बलिया जनपद के हरिनारायण राजभर हैं…

इन दोनों पूर्व व वर्तमान सांसदों के अलावा मैदान में तीसरे उम्मीदवार के तौर पर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजपार्टी के गठबंधन के बैनर तले किस्मत आजमा रहे गाजीपुर जनपद के अतुल कुमार सिंह अतुल राय हैं…इतना ही नहीं फिर से मैदान-ए-जंग में सीपीआई के राष्ट्रीय नेता अतुल कुमार अंजान भी हैं…इसके अलावा भाजपा के दोस्त से राजनैतिक दुश्मन बने सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर की पार्टी से 2017 के विधानसभा चुनाव में मऊ सदर से प्रधानमंत्री मोदी ने जिसे कटप्पा की उपाधि दी थी वह कटप्पा महेन्द्र राजभर घोसी से प्रत्याशी बन, मोदी के प्रत्याशी हरिनारायण राजभर का खेल  बिगाड़ने में पूरी ताकत से लगें हैं । अब इन नेताओं में कल्पनाथ जैसा कौन बनेगा, सवाल बेमानी सा है लेकिन ये सवाल अब भी बरकरार है…उम्मीद तो यह भी है कि 19 मई को मऊ की जनता ‘नोटा’ का सोटा 2014 के मुकाबले खूब चला सकती है…लेकिन ये सोटा कितना कारगर होगा, किसको लाभ पंहुचाएगा और किसको हानि देखने वाली बात होगी…
अब जरा पीछे चलते हैं…और आपको 2014 के ये आंकड़े दिखाते हैं….
2014 में
मोदी लहर में भाजपा के हरिनारायण राजभर को 379797 वोट मिले थे जो विजेता रहे,
बहुजन समाज पार्टी के दारा सिंह चौहान 233782 वोट मिले थे जो दूसरे स्थान पर रहे।
तो वहीं मुख्तार अंसारी को 166443 वोट मिले थे जो तीसरे पोजिशन पर थे।
तो वहीं समाजवादी पार्टी के राजीव कुमार राय को 165887 वोट मिले थे, कांग्रेस के प्रत्याशी राष्ट्रकुंवर सिंह को 19315 व भाकपा के अतुल कुमार अंजान को 18162 वोट हासिल हुआ था। जबकि उस समय घोसी की 4 हजार 4 सौ 57 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया था।

लेकिन 2019 की तस्वीर 2014 से बिल्कुल अलग है…क्योंकि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी एक साथ चुनाव लड़ रही हैं…और कल्पनाथ राय के निधन के बाद 1999 में पहली बार बसपा ने बालकृष्ण चौहान की बदौलत खाता खोला तो, 2004 में सपा के चन्द्रदेव राजभर विजयी हुए। 2009 में पुनः बसपा ने दारा सिंह चौहान पर दांव लगाया और विजयी हुयी। सबसे बड़ी बात यह है कि कल्पनाथ राय के निधन के बाद 1999 में जदयू की बदौलत कल्पनाथ राय के पुत्र सिद्धार्थ राय दूसरे स्थान पर रहें। नहीं तो भाजपा पहले स्थान पर आना तो दूर, घोसी में दूसरे स्थान के लिए भी तरसती रही और जब तक कल्पनाथ राय थे तब तक घोसी लोकसभा व मऊ सदर विधान सभा सीट के लिए काम और राम के नाम पर वोट की चर्चाएं होती थी जो अब थम सी गयी है। लेकिन 2014 में सारे मिथक टूट गये और भाजपा ने ऐतिहासिक मतों से पहली बार हरिनारायण राजभर के नाम पर मोदी लहर में कमल खिलाया। इतना ही नहीं 2014 में मोख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल भी अलग चुनाव लड़ी थी जो अब बहुजन समाज पार्टी का हिस्सा है…तो फिर समझा जा सकता है कि घोसी लोकसभा सीट की राह बीजेपी के लिए आसान नहीं है…क्योंकि 2014 में हरिनारायण राजभर को मोदी लहर का भी फायदा मिला था…लेकिन इस बार गठबंधन के लहर के आगे मोदी के लहर का असर कमजोर दिख रहा है तो हरिनारायण राजभर की पहले जैसी छवि भी कहीं ना कहीं प्रमुख कारण बन रही है…
इसके साथ ही बसपा व सपा के प्रत्याशी के ऊपर नामांकन के ठीक बाद एक युवती द्वारा छेड़खानी का लगाये गये आरोप व दर्ज कराये गये मुकदमे की भी जनता में खूब चर्चा है, आरोप के बावजूद अतुल राय की फरारी व बसपा सुप्रीमों मायावती का ट्विट, माया व अखिलेश यादव का अतुल राय के पक्ष में आकर वोट मांग जाना तथा इसे विपक्षी का साजिश बताना कहीं ना कहीं अतुल राय के लिए शुभ संकेत भी साबित हो सकता है। इसके अलावा एक प्रश्न यह भी बार-बार अवतरित हो रहा है कि कल्पनाथ राय के निधन के बाद विजेता बनी बसपा, एक पारी के अंतर पर घोसी को सांसद देती रही है, लेकिन इस खेल में भाजपा के घुसने के बाद और सपा से गठबंधन होने के बावजूद क्या बसपा इस सीट पर विजयी हो पाएगी या फिर भाजपा इतिहास की ओर अग्रसर है यह देखना होगा।

घोसी लोकसभा क्षेत्र में मुकाबला जोरदार है…लेकिन इन नेताओं से किसी को आस नहीं है…मऊ की जनता इस बात से भी दुखी है कि वहां लंबे समय से किसी ऐसे उम्मीदवार को टिकट नहीं मिला…जो स्थानीय हो, टिकट बंटवारे से पहले बड़े जोर शोर से स्थानीय उम्मीदवार को टिकट देने की मांग उठी थी लेकिन बसपा व भाजपा ने निराश ही किया, कांग्रेस ने बालकृष्ण चौहान को उम्मीदवार बनाया लेकिन पुराने कार्यकाल को देख जनता दूरी बनायी हुयी दिखाई देती है, राष्ट्रीय नेता के रूप में अतुल कुमार अंजान लाल झण्डे के पुराने गढ़ में भाजपा व बसपा+सपा गठबंधन को कमजोर करने की लगातार कोशिश में लगे हैं लेकिन कामयाबी कितनी मिलेगी यह भविष्य के गर्त में है…इतना ही नहीं इस बार भी कल्पनाथ राय के परिवार से भी कोई सदस्य घोसी के रण में नहीं है….
एक बार फिर से कल्पनाथ जैसे नेता की उम्मीद जगी है…लेकिन देखने वाली बात ये होगी की कल्पनाथ जैसा कोई या कल्पनाथ के कल्पनाओं जैसा भी कोई मऊ की ‘बदनसीब जनता’ को मिलता है या नहीं
उम्मीदें बहुत है…
फैसला आपके हाथ में है….
तारीख तय है 19 मई
सुबह 7 से सायं 6
और दिन रविवार
कोशिश करिएगा कि कल्पनाओं के ‘कल्पनाथ लौट’ आएं……

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *