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बुंदेलखंड के विवेक रूसिया जर्मनी से कर रहे हैं देश के लोगों की मदद

बुंदेलखंड के बेटे ने जर्मनी से गरीब और निराश्रित परिवारों को भेजा राशन

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के हरपालपुर कस्बे में जन्मे और वर्षों पहले जर्मनी में जा बसे एक एन.आर.आई. युवक विवेक रूसिया ‘सुकून’ का नाम चर्चा का विषय बना हुआ है।

ये बुंदेलखंड की मिट्टी और उनके माता पिता के संस्कारों का ही असर है, कि सालों पहले सात समंदर पार जर्मनी में बस जाने के बावजूद आज भी उनका दिल अपने देश, अपने गाँव और उसके लोगों के लिए धड़कता है।

जर्मनी में बसे विवेक रूसिया को जब जानकारी मिली, कि कोरोना लॉकडाउन के चलते हरपालपुर नगर में भी सैकड़ों परिवार भुखमरी की कगार पर पहुँच गए हैं, तो उन्होंने जर्मनी से ही नगर के गरीब और निराश्रित परिवारों की मदद करने की ठानी और पांच-दस नहीं बल्कि पूरे एक सौ एक जरूरतमंद परिवारों को लॉकडाउन के बीच लगभग महीने भर का राशन उपलब्ध करवाने का बीड़ा उठाया। विवेक ने जब अपने इस संकल्प का जिक्र अपने मित्रों से किया तो उन्होंने स्वतः ही इस नेक कार्य में सहयोग करने के लिए अपने हाथ बढ़ा दिए और इस तरह विवेक की समाजसेवी और राष्ट्रभक्त छवि के चलते विवेक के कुछ एन.आर.आई. मित्र भी उनकी इस मुहिम से जुड़ गए।

लेकिन अब भी बड़ा सवाल यह था कि, इस महामारी के बीच बाहर निकल कर असल में जरूरतमंद परिवारों की खोज करके उनके दरवाजे तक राशन पहुंचाएगा कौन? और इस कठिन कार्य के लिए आगे आये विवेक के बड़े भाई और हरपालपुर के प्रतिष्ठित साहूकार कृष्ण कुमार रूसिया और उनके पुत्र हर्षुल रूसिया। एक ओर जहाँ विवेक ने राशन खरीदने के लिए जर्मनी से धन मुहैया कराया तो वहीँ दूसरी ओर उनके बड़े भाई कृष्ण कुमार और उनके पुत्र हर्षुल ने नगर की गलियों में घूम घूम कर सर्वे करके मुसीबत से घिरे परिवारों का पता लगाना शुरू कर दिया, तो वहीँ घर की बेटियाँ और महिलाएं राशन की बोरियों से गरीब परिवारों के लिए राशन किट बनाने में जुट गयीं, क्यूंकि कोरोना संक्रमण के चलते बाहर से किसी की सहायता ली नहीं जा सकती थी। प्रत्येक राशन किट में करीब एक हजार रुपये मूल्य का अच्छी गुणवत्ता वाला लगभग 19 किलो राशन है।
विवेक रूसिया ने बताया की एक सौ एक परिवारों के संकल्प के साथ शुरू हुयी इस सेवा में अब तक लगभग एक सौ पच्चीस से अधिक परिवारों के लिए राशन की व्यवस्था हो चुकी है। रूसिया ने बताया कि जरूरत पड़ने पर इस सेवा कार्य को आगे भी बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने इसका इसका श्रेय ईश्वर की कृपा, अपने मित्रों के सहयोग और कोरोना संक्रमण के खतरे से बेपरवाह दुखी मानवता की सेवा में लगे अपने बड़े भाई, उनके पुत्र एवं नगर के लोगों को दिया।
आपको बता दें कि विवेक रूसिया ‘सुक़ून’ जर्मनी के अलावा भारत, इंग्लैंड और अमेरिका में भी कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में जर्मनी में दुनिया की एक जानी मानी कंपनी के मुख्यालय से यूरोप और दक्षिण अफ्रीका क्षेत्र का मानव संसाधन सूचना प्रौद्योगिकी (एच.आर.आई.टी.) विभाग सम्हालते हैं, साथ ही वह जर्मनी में बसे भारतीय समुदाय के बीच कवि, पत्रकार और समाजसेवी के रूप में ख़ासे लोकप्रिय हैं और न सिर्फ हरपालपुर बल्कि पूरे बुंदेलखंड का नाम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर रहे हैं।

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