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सुप्रीम कोर्ट के प्रामाणिक हस्तक्षेप के बगैर प्रकाशित करवा कर किसी प्रकार का वातावरण तैयार करके उन कानूनों को लागू करने का विचार है तो देश के किसान इसका जमकर विरोध करेंगे : अंजान

किसान सभा द्वारा तीन कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट पैनल का विरोध नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा कृषि संबंधित तीन कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित पैनल की रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के पास ही रखा गया था। अभी तक सुप्रीम कोर्ट ने उसे जग जाहिर नहीं किया। लेकिन अचानक उसके एक सदस्य ने संवाददाता सम्मेलन में इस रिपोर्ट के संबंध में सारे तथ्य उजागर कर दिए। अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय महासचिव अतुल कुमार अनजान ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित पैनल का संज्ञान किसान संगठनों ने नहीं लिया ना तो अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति और संयुक्त किसान मोर्चा ने इस पैनल के सामने अपने विचार रखे। देश के किसी अन्य प्रमुख संगठनों ने ही अपनी बात रखी। इसका मूल कारण था कि पैनल के 3 सदस्य डॉ अशोक गुलाटी, प्रमोद जोशी एवं अशोक घनवार पिछले ढाई दशक से खुलेआम खेती के कंपनी करण की वकालत करते रहे हैं और इस संबंध में लेख आलेख दे कर के छोटे मझोले, गरीब सीमांत किसान के हितों के विरुद्ध अपनी बात रखते रहे। अचानक सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित पैनल के सदस्य अशोक घनवार ने बिना सुप्रीम कोर्ट की इजाजत के एक तरफा पैनल की रिपोर्ट को इस समय प्रस्तुत कर दिया जबकि प्रधानमंत्री जी ने इन कानूनों को वापस ले लिया है। डॉक्टर स्वामीनाथन कमीशन के सदस्य रहे अतुल कुमार अनजान ने आगे कहा कि प्रधान मंत्री द्वारा वापस ले जाने के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर यह कहा था कि यह कानून फिर से लाया जा सकता है । क्या यह फिर साजिश तो नहीं रची जा रही है । सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित 3 सदस्य समिति ने यह पेश किया की पचासी फीसदी किसानों ने विवादित कृषि कानूनों का समर्थन किया एवं मात्र 13% किसानों ने विवादित कानून का विरोध किया। यह तथ्य सत्य से परे है। क्योंकि देश के 80 फ़ीसदी छोटे, मझोले, सीमांत किसान हैं। इनकी खेती 2 हेक्टेयर से कम है। ई-मेल सहित अत्यंत आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल नहीं करते, ना करना जानते हैं। यह सारा विचार पैनल ने कहा कि उन्हें ईमेल के द्वारा प्राप्त हुए। अतुल कुमार अनजान ने आगे कहा कि अगर सरकार इस तरह के वक्तव्य को सुप्रीम कोर्ट के प्रामाणिक हस्तक्षेप के बगैर प्रकाशित करवा कर किसी प्रकार का वातावरण तैयार करके उन कानूनों को लागू करने का विचार है तो देश के किसान इसका जमकर विरोध करेंगे। शीघ्र ही व्यापक जन आंदोलन की कार्रवाई प्रारंभ करेंगे, क्योंकि केंद्र सरकार से किसान आंदोलन में किसान संगठनों से जो समझौता हुआ दिसंबर में हुआ था वह अभी तक लागू नहीं हुआ है।

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