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प्रोटोकाल का पालन करते हुए बच्चे को स्तनपान जरूर कराएँ कोविड पाजिटिव धात्री : सीएमओ

मऊ। कोविड पाजिटिव होने के बाद भी धात्री माताएं शिशुओं को स्तनपान कराना न बंद करें क्योंकि ऐसा करने से बच्चे का सुरक्षा चक्र प्रभावित हो सकता है |
विशेषज्ञों का भी कहना है कि धात्री माताएँ यदि कोरोना पॉज़िटिव हैं तो स्तनपान कराने से संक्रमण होने का कोई भी खतरा नहीं है। इसके साथ ही कोरोना की संभावित तीसरी लहर केवल बच्चों को ही नहीं बल्कि सभी को प्रभावित कर सकती है, इसलिये जच्चा-बच्चा दोनों को रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत रखना है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सतीशचन्द्र सिंह का कहना है- विश्व स्वास्थ्य संगठन ( डब्ल्यूएचओ) ने एक स्टडी में पाया कि कोरोना पॉज़िटिव 43 महिलाओं के दूध की जांच की गयी तो मात्र तीन महिलाओं के दूध में बहुत ही कम मात्रा में कोविड-19 के लक्षण पाए गए। इसलिये मां जरूरी प्रोटोकाल का सावधानी से पालन करते हुए शिशु को स्तनपान कराती रहें | स्तनपान का लाभ शिशु के साथ ही मां को भी मिलता है। माताओं को ब्रेस्ट कैंसर, ओवेरियन कैंसर, मधुमेह आदि रोगों की भी संभावना कम हो जाती है।
डॉ सतीशचन्द्र सिंह ने बताया – वर्तमान परिवेश में यदि कोई धात्री कोविड-19 पॉज़िटिव है तो वह भी अपने बच्चे को  स्तनपान करा सकती है। इसके लिए डब्ल्यूएचओ ने भी सिफ़ारिश की है, उसका कहना है कि मां के दूध से बच्चे को कोरोना होने की बहुत कम संभावना है। यदि मां कोरोना पॉज़िटिव हो जाती है और दूध पिलाना छोड़ देती है तो ऐसे में बच्चे के जीवन पर खतरा ज्यादा है। कुपोषण के साथ ही अन्य दूसरे प्रकार की बीमारी और हाइपोथर्मिया के शिकार होने की भी संभावना है। ऐसे में कोविड-19 से ग्रसित मां बच्चे को स्तनपान कराती रहें । स्तनपान कराने से पहले या कराते समय सावधानियां जरूर बरतें। स्तनपान कराने से पहले अपने हाथों और स्तनों को अच्छी तरह साबुन से धुल लें। स्तनपान कराते समय अपने नाक व मुंह को मास्क द्वारा आच्छे से ढकें। स्तनपान के बाद माता और शिशु को अलग अलग कमरे में रखें।
जिला महिला चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ प्रवीण सिंह ने बताया – प्रसव के बाद 48 घंटे तक माँ एवं शिशु की उचित देखभाल के लिए चिकित्सालय में रुकें। नवजात को तुरंत न नहलायें केवल शरीर पोंछकर नर्म साफ़ कपड़े पहनाएं। जन्म के एक घंटे के भीतर माँ का गाढ़ा पीला दूध अवश्य पिलायें और छह माह तक सिर्फ और सिर्फ स्तनपान कराएं। शिशु जितनी बार चाहे दिन या रात में बार-बार स्तनपान कराएं। रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास या किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचाव के लिए छह महीने तक केवल माँ का दूध पिलाएं, शहद, घुट्टी, पानी आदि बिल्कुल न पिलाएं। नवजात शिशु की आवश्यक देखभाल के लिए जरूरी है कि प्रसव राजकीय चिकित्सालय में ही कराएं।

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