पुण्य स्मरण

पुण्यतिथि विशेष: अपने चन्द्रशेखर जी

प्रशांत सिंह…
आज बात होगी भारत के भूतपूर्व और अभूतपूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर जी कि आत्मकथा “जीवन जैसा जिया “की। दुनियाँ चन्द्रशेखर को खाँटी राजनेता भर जानती है लेकिन चन्द्रशेखर अगर राजनीति के बादशाह हैं तो दूसरी तरफ वृतांत लेखन कला के सम्राट भी हैं। वृतांत लिखने की उनकी शब्दचित्र-शैली लाजवाब है, मानो हम पुस्तक पढ़ नही अपितु कोई चलचित्र देख रहे हों। इस शैली के आचार्य समाजवादी लेखक रामवृक्ष बेनीपुरी व फणीशवर नाथ रेणु माने जाते है जिनका निश्चित ही चन्दशेखर जी पर गहरा प्रभाव रहा होगा।

महान भारत की संसद को चन्द्रशेखर के रूप मे राजनीति का पुरोधा मिला तो श्री चन्दशेखर को भारत की महान संसद मिली। दोनों ने एक -दूसरे को बहुत कुछ दिया और कुछ लिया, पर खाली हाथ रह गया भारतीय साहित्य । भाषा की सर्जनात्मकता ,उसमें ऐंद्रिकता ,अति संप्रेषणीयता ,विचार और व्यवहार की स्पष्टता सभी कुछ से लबालब भरी उनकी लेखनी बहुत कुछ लिख सकती थी, कविता-काव्य-महाकाव्य की सर्जना हो सकती थी क्योंकि श्रीचन्द्रशेखर मे वो सभी मैटेरियल,वो सभी मेधा थी जो इसके लिए होनी चाहिए थी परन्तु राजनैतिक व्यस्तता ने चन्द्रशेखर को समय ही नहीं दिया।अब श्री चंद्रशेखर को चंद्रशेखर कहिए या का अध्यक्ष जी ये आप पर निर्भर करता है क्योंकि भारतीय राजनीति का थोड़ा सा भी जानकार इसे एक दूसरे ‌का पर्यायवाची मानता है। सारी जिंदगी अध्यक्ष जी ही कहे जाने वाले सुदूर बलियाँ से भी बहुत दूर इब्राहिम पट्टी गांव से दिल्ली आने वाले अध्यक्ष जी, दुनियाँ के राजनैतिक रंगमंच पर धुमकेतू की तरह मडराने वाले अध्यक्ष जी, इंदिरा जी के लान मे बैठ कर इंदिरा जी के सामने ही कांग्रेस को तोड़ने की बात कहने वाले अध्यक्ष जी, हर तरह के संबधों को सदन मे खड़े होकर स्वीकार कर लेन वाले अध्यक्ष जी—-निडर, साहसी और वजनदार अध्यक्ष जी को मुकम्मल समझने के लिए ये आत्मकथा बहुत ही सार्थक है। इस पूरी आत्मकथा में चन्द्रशेखर जी की जिन्दगी के विभिन्न पड़ाव हैं। इन सभी पड़ाव पर वे एक शाश्वत यायावर की तरह दिखाई देते हैं।एक ऐसा पथिक जो पथ पर फूल की अपेक्षा शूल मिलने पर ज्यादा सहज है।एक ऐसा राजनेता जो एक बार नहीं अपितु अनेक बार भारत सरकार के कैबिनेट मंत्री के पद को अस्वीकार किया और बना तो MP  सीधे PM। अब ये मार्ग बहुत सहज नहीं रहा होगा? बलियां में जीवन यापन के लिए ढाबा खोलने से लेकर प्रधानमंत्री के पद की शपथ तक वाले चंद्रशेखर को जानने के लिए और नेहरू के बाद के भारतीय राजनीति को समझने के लिए चन्द्रशेखर की इस जीवन गाथा में बार-बार झाँकने की जरूरत हमेशा बनी रहेगी ।

आपने शानदार जीवन जिया अध्यक्ष जी—सादर नमन।

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