मऊ के चन्द्रशेखर सिंह का बिहार पीसीएस में चयन, लक्ष्य की बदौलत पाया मंजिल
(आदर्श कुमार गुप्ता)
मऊ। सपने देखो उड़ान भर लो तुम, लक्ष्य का एक-एक मुकाम तय कर लो तुम, हारना जिसने सीखा नहीं कभी, उस चन्द्रशेखर सा लक्ष्य रख लो तुम। जी हां कई बार सिविल सर्विसेज परीक्षा के करीब पंहुकर भी जब मंजिल न मिले और लगातार सफलता, असफलता की ओर ढकेले फिर भी मन मे मजबूत इरादा हो और नजर सिर्फ लक्ष्य पर हो तो मंजिल मिलती जरूर है और सफलता एक ना एक दिन कदम जरूर चुमती है।
ऐसा ही कुछ हुआ जनपद के ताजोपुर निवासी ईश्वर शरण सिंह व श्रीमती सुमित्रा सिंह के आंगन में। उनका पुत्र चंद्रशेखर सिंह ने बिहार पीसीएस में 214 वां रैंक लाकर असिस्टेंट कमिश्नर पद पर चयनित होकर जिले का मान बढ़ाते हुए परिजनों को गौरवान्वित किया है।
मूल रूप से नगर के ताजोपुर गांव निवासी ईश्वर शरण सिंह के चार पुत्र व तीन पुत्रियों में चन्द्रशेखर सिंह बड़े पुत्र हैं। इनके छोटे भाई अखण्ड प्रताप सिंह इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रनेता हैं। उनसे छोटे भाई राजगुरु सिंह दिल्ली से सिविल की तैयारी कर रहे हैं तथा दिव्य प्रकाश सिंह एमएससी बायोटेक्नोलॉजी से करके मऊ में ही एग्री जंक्शन का काम देखते हैं। तीन बहने विवाहित हैं।
चन्द्रशेखर सिंह ने पढ़ाई के दौरान ही अपने लक्ष्य को जुनून के साथ संजो कर रखा। वे अपने सपनों को सच करने के लिए सदैव मंजिल की ओर कदम बढ़ाते रहे।
हाई स्कूल वह इंटरमीडिएट बापू इंटर कॉलेज सादात, गाजीपुर से पास करने के बाद स्नातक की पढ़ाई बीएससी 2006 में चंद्रशेखर इलाहाबाद विश्वविद्यालय से किये हैं। उन्होंने स्नातकोत्तर वर्ष 2009 में पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर से किया। इसके बाद 2012 में नेट क्वालीफाई किया। उनका विषय भूगोल रहा है। वे वर्ष 2010 से ही अपने लक्ष्य में लग गए। चंद्रशेखर सिंह को यूपीएससी में 5 बार मेंस और एक बार इंटरव्यू, यूपी पीसीएस 6 बार मेंस और तीन बार इंटरव्यू तक पहुंचने के बाद भी सफलता ना मिलने पर वे कभी निराश ना हुए। उन्होंने फिर भी अपने लक्ष्य को दिलों दिमाग में संजो कर रखते हुए अपना प्रयास जारी रखा और बिहार पीसीएस में दूसरी बार में ही सफलता अर्जित कर पूरे मऊ जनपद सहित परिजनों, शुभचिंतकों व दोस्तों का मान बढ़ाया। चंद्रशेखर सिंह को बिहार पीसीएस में 214 वां रैंक मिला है। वे असिस्टेंट कमिश्नर का पदभार संभालेंगे। इस सफलता पर उनके परिजन जहां काफी गौरवान्वित है। वहीं चंद्रशेखर सिंह का कहना है कि उनके आदर्श उनके पिता और स्वामी विवेकानंद है उन्होंने बताया कि उनके चाचा मनोज सिंह, चाची नीलम सिंह, गुरुजनों, परिजनों, शुभ चिंतकों सहित पत्नी श्रीमति अंजलि सिंह का इस सफलता के पीछे विशेष योगदान है। चन्द्रशेखर सिंह की पत्नी अंजलि सिंह वर्तमान में सीनियर सीएसए जेट एयरवेज में सर्विस करती हैं।
उन्होंने आज के युवाओं को अपने सफलता के बाद अपने संदेश में कहा कि युवाओं को किसी भी परिस्थिति में कभी भी अपना धैर्य नहीं खोना चाहिए। उन्हें अपना धैर्य हमेशा बनाए रखना चाहिए और निशाना लक्ष्य की तरफ होना चाहिए।
“अपना-मऊ” टीम की तरफ से चन्द्रशेखर सिंह व परिजनों को हार्दिक बधाई।

