बुआ जी कहीं भतीजा, ज्यादा नुकसान न कर दे ?
■ दोस्ती के बाद दुश्मनी का यह राजनैतिक पैंतरा, बड़ा ही गड़बड़झाला लगता है
■ मऊ से पूर्व मंत्री राजेन्द्र कुमार व उमेश चन्द पाण्डेय भी बसपा को कर चुके हैं बाय बाय
( आनन्द कुमार )
मायावती जी राजनीति में जो जायज नहीं था उसको भी जायज करके दिखाया था अखिलेश यादव ने वह भी अकेले नहीं आपके सहयोग से। लेकिन कम समय में ही गठबंधन को हटबंधन में बदलकर आपने अपने राजनैतिक विरोधियों को वह ताकत दे दी जिसको वह कभी सोचे भी नहीं थे। मायावती जी लोकसभा 2019 का चुनाव सपा के साथ लड़ने व यूपी में सपा से ढाई गुना ज्यादा सीट पाने के बाद, किस समीक्षात्मक आधार पर आपने सपा का वोट बसपा पर ट्रांसफर न हो पाने का आरोप लगाकर सपा मुखिया अखिलेश यादव से किनारा कस लिया यह तो आप ही जानती हैं।
लेकिन यह कहना है कि आपका वह कदम, जल्दबाजी वाला ही था। आपका बयान तो अखिलेश यादव को लज्जित ही किया होगा। लेकिन अखिलेश यादव आपके गठबंधन से अलग होने की बात पर चुप्पी साध कहीं न कहीं वह दर्द सीने में दबा लिये और उसको कहना मुनासिब नहीं समझा।
लेकिन यह कहना है कि आपका वह कदम, जल्दबाजी वाला ही था। आपका बयान तो अखिलेश यादव को लज्जित ही किया होगा। लेकिन अखिलेश यादव आपके गठबंधन से अलग होने की बात पर चुप्पी साध कहीं न कहीं वह दर्द सीने में दबा लिये और उसको कहना मुनासिब नहीं समझा।मायावती जी यूपी या देश में नेताओं का पार्टी बदलने का सिलसिला कोई नया नहीं है। यह खेल तो वर्षों से होता आया है और होता रहेगा। लेकिन जिस प्रकार से अखिलेश यादव नाप तोल कर हर एक जनपद में राजनीति कर रहे और उनके दल में आने वालों का टारगेट नेता बसपा का है। कहीं ना कहीं यह विषय आपके लिए चिंता करने व सोचने का है।
पिछले दिनों बस्ती जनपद सहित आस पास जनपदों में कद्दावर नेता तथा आपके ही सरकार के पूर्व मंत्री रामप्रसाद चौधरी समेत पूर्व विधायक जितेंद्र कुमार, मालती देवी, दूधनाथ, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष, विपिन शर्मा, पूर्व ब्लाक प्रमुख, कबीर चौधरी, पूर्व प्रत्याशी, रामप्रसाद पासी पूर्व प्रत्याशी कानपुर, सुदर्शन पासी, शाहजहांपुर, राजेंद्र चौधरी पूर्व विधायक, मुकेश चौधरी जिला पंचायत सदस्य, अवधेश यादव जिला पंचायत सदस्य, ज्ञान चंद्र चौधरी जिला पंचायत सदस्य, कपिलदेव जिला पंचायत सदस्य, हरिराम चौधरी जिला पंचायत सदस्य, मनीराम मौर्या पूर्व ब्लॉक प्रमुख, अजय सिंह पूर्व ब्लाक प्रमुख, कुमकुम भारती पूर्व ब्लाक प्रमुख, सीताराम पूर्व जिला अध्यक्ष बहुजन समाज पार्टी सहित कई नेता सपा में हुए शामिल।
इसके अलावा मऊ के मधुबन से पूर्व विधायक उमेश चन्द पाण्डेय, पूर्व राजस्व मंत्री राजेन्द्र कुमार, अनिल कुमार पूर्व विधायक मुजफ्फरनगर बसपा में शामिल हो चुके हैं। बसपा के इन प्रमुख नेताओं को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने स्वयं पार्टी की सदस्यता दिलाई है।
बसपा छोड़ सपा में शामिल हुए नेताओं में बस्ती के पूर्व मंत्री राम प्रसाद चौधरी ने तो हजारों समर्थकों के साथ लाल टोपी पहन इतिहास ही बना दिया।
मायावती जी आपने राजनीति का अपना तरीका इधर काफी परिवर्तित किया था लेकिन अखिलेश यादव से मोहभंग कर लेना और सपा पर वोट ट्रांसफर न कराने वाला आपका आरोप कहीं न कहीं अखिलेश यादव को ठेस पंहुचायी हुयी प्रतीत होती है और लगता है कि आपका यह भतीजा, आपका वह आरोप दिल पर ले लिया है। तभी तो अभी यूपी में भाजपा की जय- जय की राजनीति के बीच भी वह विपक्ष में होकर सत्तारूढ़ दल से आपके दल को अपने नजरिये से भांप रहा है। जिसका तिनका-तिनका नुकसान आपको भले ही नजर नहीं आ रहा हो, लेकिन परिणाम की भयावहता की सच्चाई से इंकार नहीं किया जा सकता।
बसपा सुप्रीमों मायावती जी बाकी मर्जी आपकी यह तो मेरी मन मर्जी है मेरे शब्द हैं आपको चूभे तो क्षमा या आप इसे कुछ समझे तो स्वागत।

