मुमताज की पेंटिंग लॉकडाउन में हुई गुमनाम
अखबार का कोना : जनसंदेश टाइम्स
■ हाय रे कोरोना, तेरे कहर ने सभी हुनरमंद कलाकारों को भी कर दिया लॉक
■ कोरोना की मार से ऑनलाइन पेंटिंग बिक्री हुई ठप, गम में डूबा पेंटिंग कलाकार
(मोहम्मद अशरफ)
मऊ। हाय रे कोरोना तेरा यह कैसा कहर, तेरे कहर ने कलाकारों को भी नहीं बख्शा और तूने अपने आगोश में लेकर उन्हें भूखे मरने के लिए छोड़ दिया। एक पेंटिंग कलाकार जब अपनी कलाकृति पेश करता है, केवल वही समझता है कि वो कितने मुश्किलों से गुजरता है। कुछ ऐसा ही इन कलाकारों के साथ हुआ है, जो इस इस महामारी से गुजरना पड़ रहा है। मऊ के उभरते हुए पेंटिंग कलाकारों को इस खतरनाक कोरोना ने एक झटके में इनकी अस्तित्व और पहचान को खत्म कर दिया। जनपद के अधिकतर पेंटिंग कलाकारो को कोरोना ने गहरा जख्म दे दे दिया है, जिससे अब इन्हें उभरने और सवरने में काफी लंबा समय लगेगा, जिसका एक मात्र सहारा था, वह भी खत्म हो गया। कोरोना के गहरे जख्म से लॉकडाउन ने पेंटिंग कलाकारों के अरमानो पर पानी फेर दिया है। इन कलाकारों द्वारा बनाई हुई पेंटिंग को खरीदना तो दूर कोई झांकने तक नहीं आ रहा है और तो और अन्य प्रांतों के लोग भी पेंटिंग को मगवाना बंद कर दिए हैं। बिक्री न होने से पेंटिंग कलाकारों के पेट पर काफी गहरा चोट पहुंचा है, जिससे उनके सामने दो जून की रोजी-रोटी के लिए संकट पैदा हो गया है। इन पेंटिंग के हालातों के बारे में जनपद के मशहूर पेंटिंग कलाकार एवं राष्ट्रीय ललितकला प्रशिक्षण के प्रबंधक मुमताज खान आर्टिस्ट से मिला गया। मुमताज कहते है एक समय था कि पेंटिंग की काफी मांग होती थी और इसकी महत्व को लोग समझते थे। लेकिन धीरे-धीरे इसकी महत्व कम होने लगी और आज कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन की वजह से पेंटिंग की महत्व और भी कम हो गयी है। उन्होंने बताया कि 1985 में संस्था जनपद में स्थापित कर दी गई थी। संस्था स्थापित होने के बाद इसमें पढ़ने वाली छात्राओं को निःशुल्क सिलाई, कढ़ाई, ब्यूटी, पार्लर पेंटिंग सिखायी जाती है, जिसमे 700 छात्राएं सीखती है। इन्हीं छात्राओं द्वारा बनाई हुई पेंटिंग को लखनऊ, बनारस, दिल्ली व बॉम्बे में ऑनलाइन बेचा जाता है, जिनसे मिलने वाले पैसे से हमारे परिवार एवं इन छात्राओ का खर्च चलता था। लेकिन लॉकडाउन ने हमे बर्बाद कर रख दिया है। कहा कि बड़ी उम्मीद के साथ त्यौहार पर नये फैशन का सारा कपड़ा बच्चियों द्वारा तैयार कराकर दुकान पर देने की सोच ही रहे थे कि लॉकडाउन की वजह से सब धरा का धरा रह गया। मुमताज ने कहा लॉक हम हुए और डाउन हमारा धंधा हुआ।



