आ गया मौसम चुनावी तख़्तियां कहने लगीं
हैं सभी बेदाग़ सबकी बोलियाँ कहने लगीं।
आ गया मौसम चुनावी तख़्तियां कहने लगीं।।
बेवजह ज़ाया न जायेगा शहादत का लहू।
सरहदों पे तड़तड़ाती गोलियां कहने लगीं।।
बन सकी ना इक निवाला भूख के मारों का मैं।
कुछ अमीर-ए-शह्र की ये रोटियाँ कहने लगीं।।
जिन दरख़्तों की जड़ें होंगी बहुत कमज़ोर सी।
मैं उड़ा ले जाऊंगी ये आंधियां कहने लगीं।।
आ गयी है कुछ ग़लतफहमी हमारे दरमियां।
रूबरू सबके हमारी दूरियाँ कहने लगीं।।
वो नहीं दुनिया में लेकिन शख़्स था प्यारा बहुत।
कुछ पुरानी आज मुझसे चिट्ठियां कहने लगीं।।
भूल जाऊँ किस तरह से “अश्क” उस किरदार को।
आज भी वो साथ है परछाईयां कहने लगीं।।
लेखक परिचय…
अशोक कुमार एडवोकेट “अश्क चिरैयाकोटी”
सिविल कोर्ट मऊ- जनपद मऊ (उ0 प्र0)
पत्रकार – “आज”
चिरैयाकोट, जनपद- मऊ
9453300275 & 7084665684


वाह वाह, बहुत सुंदर प्रस्तुती। 👌👌