खास-मेहमानचर्चा में

कहीं ये भी न हो जाएंं बजाज की तरह, हमारी सुनहरी यादों का ऐतिहासिक हिस्सा

(अमित चतुर्वेदी)

ये बजाज सुपर है, हमारी जेनरेशन के बच्चों के पिता लोगों की गाड़ी, आपको ये पसंद हो अथवा न हो, आपके बाप दादाओं ने इसे ही दिल दिया है…एक समय इसने भारतीय सड़कों पर राज किया है, छोटे मझौले शहरों में कई कई सालों की वेटिंग लिस्ट होती थी इस गाड़ी की, और लोग 15000 की इस स्कूटर को 3 से 5 हज़ार की ब्लैक में ख़रीदते थे इसे..जिसके पास होती वो अपने पड़ोसियों और मित्रों की जलन का केंद्र होता था, भारतीय लोगों और सड़कों के लिए अनुरूप, कम मेंट्नेन्स की इस स्कूटर ने दशकों तक राज किया, लोगों के दिल पर और भारत की सड़कों पर…

हालाँकि ये स्कूटर कोई बेस्ट स्कूटर नहीं थी, न ही टेक्निक्ली और न ही एकनॉमिक्ली लेकिन जानते हैं क्यों इसने इतने लम्बे समय तक राज किया, क्यूँकि इसे कोई चुनौती देने वाला नहीं था, लोग 15000 की इस स्कूटर के लिए नम्बर लगाकर त तो सालों इंतज़ार करते या फिर दो चार हज़ार एक्स्ट्रा देकर ब्लैक में ख़रीदते लेकिन ख़रीदते इसे ही…कारण वही…नो कॉम्पटिशन…लेकिन ये समय ज़्यादा देर नहीं चलता, बजाज ने कोई innovation और इम्प्रूव्मेंट नहीं किया और फिर समय बदला और ये गाड़ी पूरी तरह से चलन से बाहर हो गई।

देश की सबसे पुरानी पार्टी के भी वही हाल हैं, जब तक पूरे देश में कोई चुनौती देने वाला नहीं था, उसने राज किया, लेकिन जबसे तगड़ा कम्पेटिटर आया है तबसे हाल बुरे हैं, अगर इन्होंने भी अपने अंदर इम्प्रूव्मेंट नहीं किया तो एक दिन ये भी बजाज सूपर की तरह हो जाएगी, हमारी सुनहरी यादों का ऐतिहासिक हिस्सा…

लेखक- (जबलपुर मध्यप्रदेश में वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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