मऊ में आयुष्मान योजना के अन्तर्गत कुल 6 लाख लाभार्थी हैं पंजीकृत
निःशुल्क चिकित्सा का लाभ 5 लाख तक लेने के लिये, गोल्डेन कार्ड है आवश्यक
जिले में आयुष्मान योजना के अन्तर्गत कुल 6 लाख लाभार्थी हैं पंजीकृत

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन-आरोग्य योजना एवं मुख्यमंत्री जन-आरोग्य योजना से आच्छादित “आयुष्मान कार्ड विहीन परिवारों” को आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराने के लिये 26 जुलाई से 09 अगस्त, 2021 तक अभियान आयुष्मान पखवाड़ा चलाये जाने के सम्बन्ध में अमित मोहन प्रसाद ने जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को लिखे पत्र में अवगत कराया है कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन-आरोग्य योजना एवं मुख्यमंत्री जन-आरोग्य योजना से आच्छादित परिवारों को प्रतिवर्ष प्रति परिवार रू 5 लाख तक के निःशुल्क उपचार की सुविधा अनुमन्य है। योजना का लाभ प्राप्त करने हेतु प्रत्येक पात्र लाभार्थी के पास आयुष्मान कार्ड होना अनिवार्य है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ श्याम नरायन दुबे ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य जनपद के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। योजना के तहत जिले से राजकीय और निजी अस्पतालों को मिला कर 1012 कार्डधारियों ने 2.07 करोड़ रूपये का निःशुल्क चिकित्सा का लाभ प्राप्त कर लिया है। वहीं 3946 कार्डधारी जिले से बाहर 2.59 करोड़ रुपये का निःशुल्क इलाज लाभ ले चुके हैं।
उन्होंने बताया कि पांच लाख तक निःशुल्क लाभ लेने की यह योजना बहुत ही आसान है, इसके लिये इस योजना में पंजीकृत लाभार्थी को अपने आधार नंबर के साथ किसी भी अपने आस-पास के कामन सर्विस सेंटर या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर अपना पंजीकरण सत्यापन कराकर अपना गोल्डेन कार्ड प्राप्त कर सकते हैं। उस गोल्डेन कार्ड की सहायता से उस परिवार का कोई भी व्यक्ति आयुष्मान योजना से संबद्ध जिले से लेकर देश के किसी भी अस्पताल में 5 लाख तक का निःशुल्क चिकित्सा का लाभ ले सकता है।
आयुष्मान भारत योजना के जिला कार्यक्रम समन्वक (डीपीसी) डॉ पीएन दुबे ने बताया जिले में पिछली जनगणना के निमित्त कुल लगभग 6 लाख लाभार्थी इसके लिये पंजीकृत हैं जिसमें लगभग 1.80 लाख लोगों ने ही अब तक गोल्डेन कार्ड बनवा लिया है।
आयुष्मान कार्ड कितना है जरुरी-
दोहरीघाट निवासी मुहम्मद मोकिल 27 ने बताया कि इस कार्ड की आवश्यकता तब पड़ गई जब मेरे घर दस्तक अभियान के तहत 16 जुलाई 2021 को बीएलई तारकनाथ की टीम मेरे घर पर आई और मुझसे कार्ड बनवा लेने के लिये मनुहार करने लगे व्यस्तता के कारण उन्हें नजरअंदाज करते हुए मैं अपने कार्य को निकल गया। अगले ही दिन 17 जुलाई की शाम को मेरा एक्सीडेंट हो गया मेरे पैर फ्रेक्चर हो गया इलाज में ज्यादा खर्च होने लगा। अस्पताल वालों ने पूछा कि गोल्डेन कार्ड है? तो पूरा इलाज निःशुल्क हो जायेगा। मुझे मेरे घर आये तारकनाथ जी की दो दिन पहले की मुलाकत याद आई उनकी बात को नजरअंदाज करने पर पछातावा होने लगा, मेरे कहने पर मेरे परिवार वालों ने उनसे संपर्क किया उनकी टीम ने तुरंत मुझे कार्ड बनवाने के लिये सभी जरुरी प्रक्रियाओं को कराया, उम्मीद है कि मेरा कार्ड जल्द मिल जायेगा जिससे मुझे सरकार से आर्थिक सहायता मिलेगी।

