खास-मेहमान

दहेज़ क्या दोगे?

लड़की के पिता अपनी पत्नी और दोनों लड़कियों सहित भावी दामाद के घर पहुंचे. वे घर का मुआयना करने लगे.

“भाई साहब ! लड़की कहाँ रहेगी ? उसका किचन कहाँ होगा ?” उन्होंने समधी से पूछा.

“भाई साहब ! लड़की यहीं रहेगी. हमारा किचन सांझा ही है और बाद में भी लड़की को साथ ही रहना है . आप चिंता न कीजिये किसी बात की.”

“भाई साहब ! पच्चीस साल पाला है लड़की को और आप को सौंप रहा हूँ तो ये सब देखना भी एक बाप का फ़र्ज़ है न, इसलिए आप से पूछा .”

“जी ! बात तो आपकी सही है. वैसे घर तो आपने देख ही लिया है. अब बाकी बातें भी हो जाएँ जरा !”

“जी भाई साहब ! मैं भी यही चाहता हूँ कि सब क्लियर हो जाय. लड़के का बैंक बेलेंस कितना है ? क्या उसका अपना कोई मकान है ? या फिर आपके ऊपर ही निर्भर रहेगा ?” लड़की के पिता बोले.

“कैसी बात कर रहे हैं आप ? ये तो हमें पूछना है कि लड़की के लिए आप क्या दे रहे हैं ? क्या उसको मकान से हिस्सा देंगे ? और लड़की कितना कमाती है ?” लड़के का पिता बोला.

“अरे! भाई साहब ! लड़की आपको दे रहे हैं. जन्म से लेकर आज तक लाखों का खर्चा किया है इसके लालन -पालन और पढ़ाई पर. हर महीने सत्तर हजार कमाती है. अब आपके घर रहेगी तो सब आपको ही देगी. हमें तो कुछ नहीं चाहिए उससे. बस आप बता दीजिये कि आप कितना दहेज़ देंगे ?” लड़की की माँ बोली .

इस बात को सुनते ही सब के कान खड़े हो गए. सारे लड़के पक्ष के लोग दंग रह गए.

“बहिन जी ! ये तो उलटी रीत है. दहेज़ तो लड़की वाले देते हैं .” लड़के की माँ बोली.

“मतलब ये कि आपको दहेज़ चाहिए इस रिश्ते के लिए ?” लड़की की माँ ने जवाब दिया.

“आपकी बात से तो ऐसा ही लग रहा है कि आप दहेज़ के पक्ष में नहीं है . वैसे हमें भी सिर्फ लड़की ही चाहिए .”लड़के की माँ बोली .

“हा हा हा …हम भी दहेज़ लेने वालों को लड़की नहीं देंगे . हम भी मजाक कर रहे थे . अब लड़की भी जरा लड़के से पूछ ले कि उसकी कोई और पसंद तो नहीं है , कहीं प्यार करता है तो उसे वहीँ शादी करनी चाहिए . हम किसी की आहों पर बेटी का घर नहीं बसाना चाहते .” लड़की का पिता बोला .

“सर ! मेरा कोई अफेयर नहीं किसी से . मुझे आपका परिवार पसंद है . आप साफ़ बात करते हैं इसलिए ये रिश्ता मुझे पसंद है . साथ ही यह भी बता देना चाहता हूँ कि लड़की बैंगलोर मेरे साथ ही रहेगी फिर चाहे ये काम करे या न करे . घर की जिम्मेदारी भी किसी जॉब से कम नहीं होती . मैं अपना परिवार खुशहाल चाहता हूँ इसलिए मैंने किसी भी तरह के फंक्शन या दहेज़ के लिए मना कर दिया था माँ- पापा को .” लड़का बोला .

“तो रिश्ता पक्का . सुनो जी ! मिठाई और अंगूठी निकालो. मंगनी पूरी करो. शुभ काम में देरी क्यों !”

शब्द मसीहा

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