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27 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के दिन ग्रहण लग जाने से दोपहर काल से सूतक काल लग जाएगा : भवानीनंदन यति

(श्रीराम जायसवाल)

जखनियां/गाजीपुर। गुरु पूर्णिमा महज़ एक सामान्य पर्व नही बल्कि गुरु के पूजन बंधन का विशेष दिन है। इस दिन गुरु के प्रति शिष्य आभार व्यक्त करते हैं और कहते हैं की आपके मार्गदर्शन में हमारा जीवन धन्य हुआ ऐसी ही कृपा बनाए रखना। इस वर्ष 27 जुलाई शुक्रवार को गुरु पूर्णिमा के दिन ग्रहण लग जाने से दोपहर काल से सूतक काल लग जाएगा, जिससे गुरु पूर्णिमा का पर्व प्रातः काल में ही मनाया जाएगा। व दोपहर तक गुरुपूजा, देवपूजा भंडारा प्रसाद इत्यादि संपन्न कराकर मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। उक्त बातें आगामी 27 जुलाई को पड़ने वाले गुरु पूर्णिमा महोत्सव के संबंध में प्रकाश डालते हुए सिद्धपीठ हथियाराम मठ के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति जी महाराज ने बताया।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष 27 जुलाई को गुरु पूर्णिमा मनाई जाएगी। किंतु इस बार की गुरु पूर्णिमा पर ग्रहण का साया भी है। ऐसे में गुरु का पूजन और वंदन लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है कि वे किस समय गुरुदेव का पूजन करें और किस समय नहीं। क्योंकि सूतक बहुत पहले लग जाएंगे। इसलिए गुरु का पूजन गुरुपूर्णिमा के दिन ग्रहण से पूर्व करना श्रेष्ठकर रहेगा।
महामंडलेश्वर जी ने बताया कि पञ्चाङ्ग के अनुसार ग्रहण करीब 4 घंटे का होगा और इसका सूतक काल गुरु पूर्णिमा के दोपहर से ही शुरू हो जाएगा ऐसे में सूतक कॉल में गुरु का पूजन करना उचित नहीं।
650 वर्ष प्राचीन सिद्धपीठ पर शिष्य भक्तों द्वारा धूमधाम से मनाई जाने वाली गुरु पूर्णिमा महोत्सव में चंद्र ग्रहण के दौरान लग रहे सूतक काल को लेकर समय परिवर्तन किए गए हैं। श्रीयति जी ने बताया कि 27 जुलाई शुक्रवार को प्रातः 6:00 बजे से 9:00 बजे तक गुरु पूजन व गुरु पूर्णिमा का पूजन संपन्न किया जाएगा, इसके बाद दोपहर 12:00 बजे तक सिद्धपीठ स्थित मंदिर प्रांगण में देव पूजन प्रांत भंडारा प्रसाद ग्रहण इत्यादि भी संपन्न करा लिया जाएगा। मंदिरों में ग्रहण के पूर्व सूतक से पहले आरती हो जाएगी शाम की आरती दोपहर में ही कर ली जाएगी और पूजन बंधन कर पट बंद कर दिए जाएंगे। अब ऐसे में गुरु पूजन सूतक काल से पहले करना शुभ रहेगा और गुरु का आशीर्वाद भी फलीभूत होगा।

उन्होंने ग्रहण काल में मानव कल्याण हेतु शिष्य भक्तों द्वारा किए जाने वाले व नही किए जाने वाले कर्मों पर भी विशेष प्रकाश डालते हुए बताया कि ग्रहण काल में भोजन न करें, गर्भवती स्त्रियां बाहर न निकलें, झूठ न बोलें और ना ही सोए ।
मांस-मदिरा का सेवन ना करें, प्याज-लहसुन भी ना खाएं। झगड़ा-लड़ाई से बचें, पूजा स्थल को स्पर्श ना करें।
इस दौरान शिव और गायत्री का जाप करना चाहिए
ग्रहण खत्म होते ही स्नानादि कर नए वस्त्र पहनें, अपने पितरों को याद करें, दान करें। अगर आसपास कोई धार्मिक स्थल है तो वहां जाएं, शिव जी की पूजा करनी चाहिए।

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