खेती किसानी : किसानो के लिए बाजरा की खेती है लाभदायक
(अशोक जायसवाल)
◆15 जुलाई से 15 अगस्त के बीच होती है बुआई
◆उच्चकोटि का पाया जाता है लौह तत्व
◆सामान्य जलवायु मरूस्थलों में भी भरपूर फसल होती है
बिल्थरारोड/बलिया। वर्तमान में पानी की कमी को देखते हुए बाजरा की खेती काफी लाभदायक साबित हो सकती है। मक्का व ज्वार की तरह बाजरा भी मोटे अनाजों में खरीफ की एक मुख्य फसल है। इस फसल की अपनी एक अलग विशेषता है। राजस्थान की मरूस्थलों से लेकर हरियाणा व प्रदेश की सामान्य जलवायु वाले स्थानो पर भी भरपूर फसल देती है। राज्स्थान में इस फसल का क्षेत्रफल 5 मिलियन हेक्टेयर के लगभग है। इस सम्बन्ध में अपना मऊ से बातचीत में कृषि विशेषज्ञ एसएन सिंह ने बताया कि जलवायु परिवर्तन देखते हुए अनुमान है कि भविष्य में बाजरे का क्षेत्रफल निश्चित रूप से बढ़ेगा। बाजरे में पोषक तत्व के रूप में प्रोटीन 11 से 13 फीसदी, वसा 5 से 8 फीसदी एवं खनिजों में कैल्शियम, पोटैशियम, फास्फोरस, लोहा, मैग्निशियम, कापर, सोडियम विशेष रूप से पाये जाते हैं। इसके अतिरिक्त कैरोटीन, थायोमिन, रिबोफ्लोमिन, नियासिन एवं एमिनोएसिड भी पाया जाता है। इसमें पाया जाने वाला लौह तत्व उच्चकोटि का होता है।
बाजरे की प्रजातियां…
बाजरा की जो प्रजातियां हैं उसमें संकर प्रजाति का उत्पादन सर्वाधिक है। जिसमें पूसा 322 व 23, आईसीएमएच 451 काफी प्रचलित है। ये किस्में 75 से 90 दिन में तैयार हो जाती हैं एवं उत्पादन 17 से 30 कुन्तल प्रति हेक्टेयर प्राप्त हो जाता है।
बुआई का समय…
बाजरे की बुआई के लिए उपयुक्त समय 15 जुलाई से 15 अगस्त तक होता है। किसानो को प्रति एकड़ दो किलो बीज का प्रयोग करना चाहिए। इससे अधिक बीज का प्रयोग करने पर फसलों में कलियां कम होती हैं और पैदावार प्रभावित होती है। बुआई से पहले किसानों को बीज का शोधन जरूर करना चाहिए। इसके लिए प्रति किला बीज के लिए तीन ग्राम थीरम का प्रयोग करना चाहिए।
मानक के अनुसार करें उर्वरक का प्रयोग…
बाजरा की खेती के लिए किसानां को मानक के अनुसार ही उर्वरक का प्रयोग करना चाहिए। बोआई के समय प्रति एकड़ डीएपी 35 किलो, यूरिया 24 किलो व पोटास 27 किलो का प्रयोग करना चाहिए। बुआई के 25 से 30 दिनों के अंदर प्रति एकड़ 25 किलो यूरिया का प्रयोग टापड्रेसिंग के लिए किया जाना चाहिए।

