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डीयू में नए सत्र के लिए छात्र नेता शक्ति सिंह ने छात्रों की मदद के लिए कसी कमर

दिल्ली। सन् 1922 में दिल्ली विश्वविद्यालय मात्र 3 कॉलेजों के साथ शुरू हुआ था, अपने स्थापना वर्ष से ही विश्वविद्यालय ने शैक्षिक जगत में अपना महत्वपूर्ण स्थान बनाना शुरु कर दिया और वर्तमान में डीयू तथा उससे सम्बद्ध कॉलेज अब पूरे भारत में शैक्षिक उत्कृष्टता के लिए जाने जाते हैं। प्रत्येक वर्ष स्नातक,परास्नातक तथा एमफिल/पीएचडी पाठ्यक्रमों के लिए बड़ी संख्या में आते आवेदन डीयू की लोकप्रियता का प्रमाण हैं। हाल ही में चाहे मानव संसाधन विकास मंत्रालय की शिक्षा संस्थानों संबंधी रैंकिंग हो या अन्य मीडिया संस्थानों की रैंकिंग, सभी में डीयू के कई कॉलेजों ने साइंस, कॉमर्स तथा आर्ट्स स्ट्रीम में शीर्ष 10 में आधे से अधिक स्थानों पर कब्जा जमाया है।
दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में छात्रों की राज्यवार पढ़ने वाले आंकड़ों में, स्नातक व परास्नातक में दिल्ली के बाद सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश एवं बिहार से आने वाले छात्रों की संख्या बताई गई है। भारत के लगभग सभी राज्यों के साथ ही, कई अन्य देशों से भी छात्र पढ़ने के लिए डीयू आते हैं। विश्वविद्यालय में सत्र 2018-19 हेतु प्रवेश प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है तथा 19 जून को अंडर ग्रेजुएट कोर्सेज के लिए पहली कटऑफ आयेगी। छात्रों को प्रवेश के समय कोई समस्या ना हो, इसके लिए डीयू में पूर्वांचल से प्रमुख छात्र नेता एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद दिल्ली इकाई में प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य शक्ति सिंह हेल्पडेस्क एवं सोशल मीडिया के माध्यम से प्रवेश के लिए इच्छुक छात्रों से लगातार संपर्क में है तथा शक्ति सिंह एवं उनकी पूरी टीम यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि छात्रों को किसी प्रकार की समस्या ना हो, शक्ति सिंह के अनुसार “प्रत्येक वर्ष उत्तर प्रदेश सहित पूरे पूर्वांचल से बड़ी संख्या में छात्र डीयू पढ़ने के लिए आते हैं ,ऐसे में हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं कि जो भी छात्र डीयू प्रवेश के लिए आए,उसे कौन सा कॉलेज ठीक रहेगा, उन्हें प्रवेश हेतु किन आवश्यक कागजातों की आवश्यकता है ,साथ ही उनके रहने-खाने के हिसाब से कौन-सा स्थान ठीक रहेगा आदि के संदर्भ में छात्रों की मदद की जाए।जो भी छात्र दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश हेतु इच्छुक हैं और उन्हें किसी भी प्रकार की कोई समस्या है तो वह मुझसे 9919531958 नम्बर या सोशल मीडिया आदि के माध्यम से बेझिझक मदद ले सकते हैं।

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