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रामकथा : श्रीराम और केवट के बीच हुये मार्मिक संवाद का सुंदर चित्रण कर किया मंत्रमुग्ध

घोसी/मऊ। नगर के पकड़ी मोड़ स्थित जेपी उद्यान में धर्म चेतना समिति द्वारा आयोजित नव दिवसीय मानस पाठ व रामकथा के आठवेे दिन मगलवार की रात्रि को कथावाचक पं शांतनु महाराज ने भगवान श्री राम के वनगमन के साथ श्रीराम और केवट के बीच हुये मार्मिक संवाद का सुंदर चित्रण कर सब को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कहा कि भगवान तो प्रेम का भूखा है।वह अमीर गरीब को नही देखता।धर्म जागरण के साथ राम कथा के सफल आयोजन को लेकर पण्डित शांतनु महाराज को धर्मचेतन समिति की तरफ से अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया।उमेश चन्द्र पाण्डेय को प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त होने पर शांतनु जी द्वारा राधा कृष्ण का चित्र देकर सम्मानित किया गया।

पं. शांतनु महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि जब वनगमन के समय श्रीराम जी अयोध्या की सीमा से बाहर होते है, तब महामंत्री सुमन्त को सभी के साथ वापस जाने को कहा। सुमन्त जी जब पुनः वापस होने को कहते है,तब श्री राम ने दबाव देकर वापस होने को कहते हए कहा कि हम सब अब संन्याशी है।इस लिये अब आप की सीमा नही है, वापस जाय। शांतुन महाराज ने श्री राम और केवट के बीच नदी पार कराने को लेकर हुये संवाद का भावपूर्ण चित्रण करते हुये कहा कि जब भगवान राम ने केवट से नदी पार कराने के लिये जब बुलाया तो केवट ने कहा कि भगवान मैं आप के मरम को जानते है।

केवट पहचान गए थे कि हमको नदी पार कराने को कहने वाले परब्रम्ह भगवान जी है।इस पर केवट ने कहा आप के पैरों के स्पर्श से शिला देवीअहिल्या बन गयी।मेरी नाव तो लकड़ी की है। इसी से मेरी जीविका चलती है।जब तक आप मुझसे अपने पाव नही धुलवाते है,तब तक मैं आप को नदी पार नही करा सकता। इस पर लक्ष्मण जी क्रोधित होकर उसको डांटते है। परंतु केवट टस से मस नही हुआ। शान्तनुजी ने कहा कि भगवान भक्त केवट के हट को देखकर पैर को धुलवाने को तैयार हो जाते है। इस पर केवट अपनी पत्नी की कठौती को लाने को इनके पैर धोकर हम सब धन्य हो जायेगे। काठ के कठौती में जब पैर को धुलेंगे तो वह भगवान के चरणों के पानी को सोख लेगा और जब जब उसमे आटा को गुथे गे तब तब उसका अंश खाने में आ जायेगा।

शांतनु जी ने कहा की तीनों लोक को तीन कदम में नापने वाले भगवान,चाहते तो एक पग में नदी को नाप सकते थे।वह तो दूसरों के मर्यादा को रखने वाले भगवान श्रीराम है। भगवान जानते थे कि सामने मेरा भक्त है। चरण धुलाने में उसका अगाध प्रेम है। सीता जी से कहते है कि भक्त गरीब अमीर नही होता,उसका प्रेम हमे प्रिय है।

इस अवसर पर अजय मिश्रा, भीमसेन, अंकित, सुरेश, सुनील, सर्वेश की टीम ने वाद्य यंत्रों के साथ मधुर संगीत के साथ भजन पेश कर सबको भक्तिमय कर दिया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से पद्मा मिश्रा, माधुरी पाण्डेय, उमेश चन्द्र पाण्डेय, जेपी मिश्रा, जनार्दन सिंह, नीलम श्रीवास्तव, डा कैलाश नाथ, सुनील गुप्ता, एस के मिश्रा, मुन्ना गुप्ता, अभय तिवारी आदि रहे

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