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अवसर साहित्य पाठशाला नए लेखकों के लिए मार्गदर्शक है : सिद्धेश्वर

आकार में लंबी लघुकथा कहानी के करीब जाकर खड़ी हो जाती है!:डॉ योगेंद्रनाथ शुक्ल

पटना । 18/06/23! लघुकथा की बारीकियों को समझने के लिए, ऑनलाइन या ऑफलाइन लघुकथा की पाठशाला की सख्त जरूरत है l हमने इसी उद्देश्य ऑनलाइन इस पाठशाला को चला रखा है l हमें खुशी है कि इस पाठशाला से नए लघुकथाकार कुछ सीख रहे हैं और पहले से बेहतर सृजन कर रहे हैं । कविता से लघुकथा सृजन की ओर मुड़ गए हमारे सदस्य पुष्प रंजन, अपूर्व कुमार, मधुरेश नारायण, राज प्रिया रानी आदि इसके सशक्त उदाहरण है जो पहले से बेहतर लघुकथा लिखने रहे हैं और लघुकथा की बारीकियों को समझने लगे हैं ”
अवसर साहित्य पाठशाला के 27 वें एपिसोड में, पूरे देश में पहली बार इस तरह का साहित्यिक पाठशाला का ऑनलाइन आयोजन करने वाले संयोजक सिद्धेश्वर ने, संचालन के क्रम में ऑनलाइन उपरोक्त उद्गार व्यक्त किया! यह पाठशाला फेसबुक के अवसर साहित्यधर्मी पत्रिका के पेज पर ऑनलाइन प्रसारित की गई l इस पाठशाला में वरिष्ठ साहित्यकार निर्मल कुमार डे ने इंदु उपाध्याय, हरिराम, रश्मि लहर, अलका वर्मा की लघुकथाओं को उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत करते हुए, उनकी लघु कथाओं में अपेक्षित सुधार पर व्याख्यान दिया और सिद्धेश्वर ने बतलाया की लघुकथाकारों को काल दोष से बचना चाहिए ।
लेखकों द्वारा लेखकों के लिए प्रायोजित इस कार्यक्रम मैं सीखने और सिखलाने के उद्देश्य से, इंदौर के विख्यात लघुकथाकार डॉ योगेंद्र नाथ शुक्ल से सिद्धेश्वर ने ऑनलाइन एक भेंटवार्ता लिया जिसमें लघुकथा से संदर्भित सवालों का सारगर्भित जवाब दिया डॉ शुक्ल नेl साहित्यकार चित्रकार सिद्धेश्वर जी के सवाल -आजकल तथाकथित लघुकथाकार 2,2,3,3 पृष्ठों की लघुकथाएं लिख रहे हैं? ऐसा क्यों ? ” ,का जवाब देते हुए प्रो. (डॉ.) योगेंद्र नाथ शुक्ल ने कहा कि -” आज जबकि 700,800 पृष्ठ के उपन्यास 200,300 पृष्ठ में सिमट गए हैं। 6-6,7-7 पृष्ठ की कहानी तीन चार पृष्ठ की आकार लेने लगी है ऐसे समय में लघुकथा लंबी-लंबी लिखा जाना ,मेरी समझ में ठीक नहीं। आकार में लंबी लघुकथा कहानी के करीब जाकर खड़ी हो जाती है । यदि ऐसा आगे भी चलता रहा तो कहानी और लघुकथा का भेद ही समाप्त हो जाएगा। दरअसल लघुकथा नई विधा होने के कारण तथाकथित लेखक खुद के नाम को आगे लाने के लिए , नए-नए प्रयोग करने का मोह रखने के कारण कुछ न कुछ इस तरह का करते रहते हैं। जो लघुकथा के लिए हितकर नहीं ।
इनके अतिरिक्त सपना चंद्रा,पुष्प रंजन, संतोष मालवीय, नमिता सिंह, इंदू उपाध्याय, योगराज प्रभाकर, रजनी श्रीवास्तव अनंता, निर्मल कुमार दे,माधुरी जैन,डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना,विजया कुमार विजय, अंकेश कुमार,अंजू श्रीवास्तव निगम, अनिरुद्ध झा दिवाकर, संजय श्रीवास्तव, पूनम अनूप शर्मा, डॉ पुष्पा जमुआर, रत्ना मानिक, विजयाकुमारी मौर्य,आदि ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज की और चर्चा में भाग लिया।

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