पढ़ाई को निजी हाथों में सौंप कर गरीबों को शिक्षा से वंचित करने का आदेश वापस ले सरकार: देव प्रकाश
मऊ। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उच्च शिक्षा के लिए प्रदेश में बनवाए गए 75 नए महाविद्यालयो में अध्यापकों की नियुक्ति न किए जाने एवं उनके संचालन को निजी हाथों में देने एवं धन की कमी के चलते ऐसा करने की बात से संबंधित समाचार सम्मानित समाचार पत्र दैनिक जागरण के प्रदेश पृष्ठ पर दिनांक 08=04=2023 को प्रमुखता से छपा है। इस समाचार को पढ़कर राष्ट्रीय लोक दल, महामंत्री संगठन काशी प्रान्त देव प्रकाश राय ने गहरी चिंता जताई है और कहा कि यह ठीक नहीं है। श्री राय ने कहा कि समाचार पढ़ कर सरकार की सोच का पता चलता है कि अब गरीबों के बच्चों को सरकार पढ़ाई से दूर करना चाहती है। सरकार की पाखंड वादिता इस बात से भी समझी जा सकती है कि गरीबों को 5 किलो राशन तो मुफ्त में दिया जा रहा है किन्तु उनके बच्चों की सस्ती पढ़ाई के द्वार को साजिशन बन्द किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी से मांग किया है की पढ़ाई को निजी हाथों में सौंप कर गरीबों को शिक्षा से वंचित करने के आदेश को वापस लिया जाए एवं प्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए राजकीय महाविद्यालयों में सरकारी आयोग द्वारा चयनित आध्यापकों की नियुक्ति की जाय। अगर सरकार उच्च शिक्षा में निजीकरण को बढ़ावा देगी तो गरीबों से शिक्षा दूर हो जायेगी जो बाबा साहब डॉ भीम राव अम्बेडकर की भावनाओं के विपरीत है। उन्होंने कहा कि एक तरफ अगले 14 अप्रैल तक सरकार डाक्टर भीम राव अम्बेडकर साहब का जन्म दिन धूम धाम से मानने की तैयारी कर रही है वहीं दूसरी तरफ उच्च शिक्षा में निजीकरण के आदेश से सरकार की गरीबों के प्रति वास्तविकता का उजागर करता है जो अत्यंत ही खेद जनक है श्री राय ने बाबा साहब, बाबा साहब का रट लगाने वाले अपनी कथनी और करनी के भेद को अगर मिटाना चाहते हैं तो शिक्षा को निजी हाथों में जाने से रोकने की पहल करें।

