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जो दूसरे आंगन में खुशियों के लिए जाते हैं आज उनके आंगन में खुशियां लेकर पंहुची पूजा राय

■ अन्तर्राष्ट्रीय बुजूर्ग दिवस पर किया किन्नरों का सम्मान

मऊ। जिस किन्नर समाज का कर्म ही हो दूसरों के आंगन में जाकर उनकी खुशियों के लिए नाचने, गाने और आशीर्वाद देने का, आज बुजुर्ग दिवस पर उनके आंगन में आकर अगर कोई सामान्य समाज का नागरिक गले में माला पहनाएं, उनको अंगवस्त्र से सम्मानित करे, भोजन साथ बैठ कर करे व गले लगा ले, तो निश्चित ही उस समाज को जो आत्मिक खुशी मिली होगी उसका कोई मोल नहीं है।
भारत के प्राचीन इतिहास में किन्नरों का समाज में एक सम्मानजनक स्थान रहा है और इन्हें गायन विद्या का मर्मज्ञ माना जाता था। तुलसीदास ने “सुर किन्नर नर नाग मुनीसा” के माध्यम से किन्नरों के उच्च स्तरीय अस्तित्व को रेखांकित भी किया है। लिंग के आधार पर किसी भी व्यक्ति के साथ किये जाने वाले सामाजिक भेदभाव को लैंगिक असमानता या लैंगिक भिन्नता माना जाता है।

क्या हममे से कभी किसी ने सोचा है कि किन्नर जो हमेशा दुसरो के खुशियों मे समिल्लित होते, आम लोगो को आपना आशीर्वाद देते है, इनकी खुशियों का क्या?
किन्नरों को समाज की मुख्य धारा में लाने के लिए समय−समय पर सरकार तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा अनेक प्रयास किये जाते रहें हैं। ऐसे में
सर्वोत्कृष्ट पहल के तहत शुक्रवार को जनपद मऊ में हर वक्त अपने किए गए कार्यों से चर्चा में रहने वाली गूंज एक गुहार की संचालिका व समाजसेविका पूजा राय ने अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस के अवसर मऊनाथ भंजन नगर के राजाराम का पुरा स्थित मिठनपुरा हिजड़ा मस्जिद में रहने वाले बुजुर्ग किन्नरों के एक बीच जाकर उन्हें अंगवस्त्रम् व माल्यार्पण कर सम्मानित किया, तथा किन्नरों के साथ जमीन पर बैठ भोजन भी किया तत्पश्चात पूजा राय ने कहा कि हम ऐसे लोगों तक पहुंच उनकी मदद कर उनमें आत्मविश्वास का नई ऊर्जा का संचार करना चाहते हैं जिनकी कोई सुध तक लेने वाला नहीं है। जो किसी तरह से अपना रैन बसर करने पर मजबूर हैं।
इस अवसर पर सबसे बुजुर्ग किन्नर मकबूल हाजी, कुल्हदी, काजल गुरबानी और काजू चाचा, पूजा, मनीषा, चांदनी को सम्मानित किया गया।

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