विमल सिंह पत्रकार के साथ आंचलिक कलमकार भी थे, सरकार को करनी चाहिए मदद

( अरविन्द कुमार सिंह )
■ उनकी मौत से उपजे शून्य ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या एक पत्रकार और उसके परिवार का भविष्य सुरक्षित है..?
■ जिला प्रशासन और योगी सरकार इस गरीब कलमजीवी और श्रमजीवी के लिए क्या आर्थिक मदद कर रही है?
■ पत्रकार साथियों और उनके संगठनों को आगे आकर इस परिवार की मदद करनी चाहिए..
■ डीएम और सूचनाधिकारी आर्थिक मदद के लिए शासन को भेजें पत्र.. जर्नलिस्ट क्लब इसकी मांग करता..
…….. #Help_to_journlist_family’s
विमल मेरे क्षेत्र के धनहुआ गांव के निवासी थे. मेरी पहली मुलाकात जहानागंज में ही हुई थी. तब वे हिन्दुस्तान के लिए बतौर रिपोर्टर काम कर रहे थे. बाद में हिन्दुस्तान को छोड़ दूसरे मीडिया समूह के लिए भी सेवा देने लगे थे. लेकिन थे बहुत हिम्मती. कई ख़बरों को लेकर उनकी दिलेरी लोगों ने देखी भी थी. दोस्तबाज उनकी विशेष पहचान थी. ख़बरों को सुंघने की उनकी आदत बहुत शानदार थी. तब मैं भी ‘आज’ अखबार के लिए जहानागंज बीट से बतौर संवाददाता खबरनवीस था. और अमर उजाला से विश्वनाथ गुप्ता थे.
न जाने कितने मोर्चों पर हमने लोहा लिया और पुलिस प्रशासन की हेकड़ी बंद करा दिया. कितने दरोगाओं और अधिकारियों को निलंबित होना पड़ा था. यह हमारी ख़बरों की ताकत थी.
पिछले दिनों केजीएमयू में इलाज के दौरान विमल की सांसे थम गयीं और 2 अगस्त को विमल की कलम हमेशा- हमेशा के लिए शांत हो गयी. एक पत्रकार का निधन.. परिवार की गृहस्थी कच्ची. आय का साधन कुछ भी नहीं. आखिरी समय में इलाज के लिए जमीन भी बिक गई. पत्रकार मित्र धर्मेन्द्र श्रीवास्तव और साथियों ने पहले आजमगढ़ फिर लखनऊ वेंटिलेटर सपोर्ट पर ले गयें. लेकिन 12 दिन तक जीवन और मौत के बीच झूलती उम्मीदे आखिर में दम तोड़ दी. वे एक सड़क दुर्घटना के शिकार हो गये थे. उनके परिवार में दो पुत्र थे.दो बेटियों में मात्र की शादी कर पाए थे. उनकी विधवा के आंसू पोछने वाला शायद अब कोई नहीं है. इस परिवार की मदद होनी चाहिए.. एक कलमकार के कलम मदद होनी चाहिए.. इस स्मृतिशेष पत्रकार के परिवार की आर्थिक मदद होनी चाहिए.. मित्रों.. आगे बड़ों.. और यह एहसास कराया दो कि जिस कलम से क्रांति लिखी जा सकती है. उससे अपने भाई मदद भी की जा सकती है.
विलंब से ही सही इस मुहिम को आगे बढ़ाना होगा.. पत्रकार के परिजनों के आंसू पोछना होगा.
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और परिवार को सहन करने की शक्ति , ईश्वर से यही प्रार्थना है ।

