चिकित्सा, सामाजिक, पारिवारिक जिम्मेदारियों व उपलब्धियों से भरा रहा है डा. सरोज कुमार गुप्ता का कार्यकाल

( आनन्द कुमार )
अमिला/मऊ। चिकित्सा सेवा के साथ-साथ सामाजिक दायित्वों व पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच डा. सरोज कुमार गुप्ता का जीवन काफी संघर्षमय रहा है। हर परिस्थिति से लड़ना, हार न मानना स्वयं को मंजिल पाने के साथ, अपनों को मंजिल तक पंहुचाने के लिए संकल्पित रहना आपके जीवन का मुख्य लक्ष्य रहा है। आपका जीवन कर्मठता से भरा रहा है। सदैव आगे बढ़ने के जुनून से ओतप्रोत डा. गुप्ता पीछे मुड़कर देखना पसंद नहीं करते। अपने चिकित्सा सेवा काल में परिवार व बच्चों व मऊ के समाज से दूर रहकर भी वे सदैव उनसे जुड़े रहे। उत्तर प्रदेश के एटा जनपद में जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी के पद पर चिकित्सा सेवा दे रहे डॉक्टर सरोज कुमार गुप्ता 30 जून 2021 को 28 वर्षो की शानदार सेवा देते हुए अपने पद से सेवानिवृत हो गये।
मूल रूप से मऊ जनपद के अमिला बाजार के रहने वाले हैं। इनके पिता स्व.श्री बालचंद्र प्रसाद गुप्ता जो कि एक नेक दिल इंसान थे सदैव गरीबो की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहने वाले थे। उनके पुत्रों में ये सबसे बड़े हैं। 19 वर्ष की अल्पायु में ही आपके पिता का साया सर से उठ गया था। 5 बहन 3 भाई का परिवार था जिसमें की 3 बहनों की शादी पिता जी द्वारा हुआ था, बाकी 2 बहन तीन भाई की जिम्मेदारी इनके कंधो पर आ गयी थी। आय का कोई श्रोत नही था, मेडिकल की पढाई भी अधूरी थी, घर खर्च चलना मुश्किल था, परन्तु पिता के पुण्य कर्मों, ईश्वर की कृपा एवं खुद की कर्मठता द्वारा मऊ में एक छोटी सी दुकान किराए पर लेकर छोटे भाई को साथ ले सीमेंट का व्यापार शुरू किया, साथ मे पढाई भी जारी रखा । इनकी पूरी पढ़ाई सीमेंट गिट्टी लाने के लिये ट्रकों बसों में आते जाते समय सफर में ही होती थी । इन्होंने अपनी मेहनत एवं अपनी कर्मठता के द्वारा सफलता हासिल कर अपनी पढ़ाई पूरी की। साथ ही रात दिन एक करते हुए व्यापार के नए नए तरीके भी खोजते रहे उसमें भी सफलता प्राप्त करते रहे व्यापार से ही ये अपनी एवं अपनी दोनों बहनों दोनों भाईयों और तीन भांजियों की शादी भी की। जमीन खरीद मकान भी बनवाया। ये सब करने में 10 वर्ष का समय व्यतीत हो गया । सन 1984 में पिता का साया उठने के बाद सन् 1994 में लगभग सभी जिम्मेदारियों को पूर्ण कर प्रभारी चिकित्साधिकरी के पद पर मिर्जापुर के गांव मदधुपुर में अपने व्यापार की जिम्मेदारी भाईयो को सौंप चले गए ।और आज अपने पिता की एवम प्रशासन की जिम्मेदारी पूर्ण कर घर वापसी है। अब अपने बच्चों की जिम्मेदारी पूर्ण करने की बारी है। मेहनत लगन और ईमानदारी की मिसाल हैं डा. सरोज गुप्ता। आपकी पत्नी श्रीमती बीना गुप्ता मऊ में सोनी धापा इण्टर कालेज में प्रवक्ता हैं। आपका बड़ा बेटा डॉ. श्रीकांत मंगलम होम्योपैथिक चिकित्सक बन अपने पिता के पदचिन्हों पर चल उनका नाम रोशन करना चाहता है। बेटी सृष्टि स्वस्तिका MBBS, जी.यस .बी .एम .कानपुर मेडिकल कॉलेज से इंट्रेंसिप कर रही है। छोटा बेटा शशिकांत मंगलम इंजीनियर है।


