इन्तजार रहेगा
( किशोर कुमार धनावत )
“उसका साथ”
मेरी खामोशी,
कमजोरी नहीं है,
एक सोच है।
यादों के पल,
समझाते हैं मुझे,
हिम्मत रखो।
मन में सदा,
सकारात्मक भाव,
जगाये रखो।
परेशानी तो,
उड़ती धूल होती,
बैठ जायेगी।
भव-सागर,
लहरें तो उठेंगी,
देखते रहो।
बीज- अंकुर,
निकलेगा जरूर,
समय पर।
वक्त बदला,
मोती बिखरे मिले,
झोली भरली।
शांत चित्त से,
सफलता मिलती,
वो ‘साथ में’ है।
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१-६-२०२१

