जिन्दगी की फक़त इतनी सी कमाई है, मैंने सोचा तुझे और आंख भर आई है
■ आनलाईनप्लेटफार्म पर ऑडियो-वीडियो कवि सम्मेलन सम्पन्न
इंदौर। साहित्य कला मंच इंदौर शाखा ने व्हाइटसप ऑनलाइन आडियो-वीडियो कवि सम्मेलन का आयोजन रविवार को किया। प्रदेश के जाने-माने कवि/श़ायरों ने बेहतरीन रचनाएँ पढ़कर दाद बटोरी। सकारात्मक विचारों को आधार बनाकर तेजस्वी तथा प्रभावी काव्यपाठ ने परस्पर कवियों का हृदय जीत लिया। भोपाल के आचार्य दिनेश भोपाली, इंदौर के राहुल बजरंगी, सिंगरोली की ज्योति ज्वाला, धार के शुभम् पारासर, इंदौर के जितेन्द्र शिवहरे, भोपाल की डाॅ. मीनू पांडे, जयपुर की सपना भूमि, इंदौर की सीमा नाईक, रायसेन के बंटी आदमी, शुभम् सार्थक, राजगढ ब्यावरा के सुनिल ‘सरगम’ और इंदौर के सुनिल सिपाही ने काव्यपाठ किया। संचालन जितेन्द्र शिवहरे ने किया। आभार राहुल बजरंगी ने माना। यह जानकारी जितेन्द्र शिवहरे ने दी।
कवि/श़ायरों की रचनाएँ-
ज़िंदगी आज सारा मज़ा ले गई
खुशनुमा ख्वाब को वो हवा ले गई
जिंदगी जिंदगी सी कहाँ अब रही
मौत अब जिंदगी का पता ले गई
दिनेश भोपाली (भोपाल)
दर्द-ए-दिल की कोई शिफ़ा नहीं कहीं भी,
दर्द देकर फिर वो मलहम लगाने का ढोंग करते हैं
ग़र जो मोहब्बत है उनके दिल में भी,
तो क्यूँ दीदार -ए- यार से डरते हैं
सपना भूमि (जयपूर)
निगाहें जब भी करतीं हैं, मुखर संवाद करतीं हैं।
अजब सी जिद में बैठीं हैं, तुम्हें ही याद करतीं हैं।
जमीं पर आसमां पर भी, नज़ारे खूबसूरत हैं।
दिखे बस तेरा ही जलवा, तभी अल्हाद करतीं हैं।
जमाने की तबस्सुम तो, इन्हें न सुकून देती हैं।
खुदा से तेरी मुस्कान की ही ये फरियाद करतीं हैं।
डॉ. मीनू पाण्डेय नयन (भोपाल)
कद बदल लेते हैं माप बदल लेते हैं,
देव बदल लेते हैं जाप बदल लेते हैं,
इन नेताओं पर न करना भरोसा यारों,
वक़्त आने पर ये बाप बदल लेते हैं |।
कवि शुभम सार्थक
ज़िला- रायसेन मध्यप्रदेश
हमारी माँ के आँचल में अजब सी छाँव शामिल है ,
दया, करुणा, मदद, ममता, मधुरता भाव शामिल है,
पुरातन संस्कारों की कसौटी पर खरी उतरें ,
हमारी माँ के जीवन में हमारा गाँव शामिल है।
सुनील नागर “सरगम” (राजगढ़)
वो मेरे सामने आता क्यों है ।
नज़रे मुझसे वो चुराता क्यों है।।
दोस्ती की जिसे परवाह नहीं ,
दोस्ती फिर वो जताता क्यों है।।
बंटी आदमी “बैरागी”
जिला रायसेन म.प्र.
जिंदगी एक किताब होती हैं,
अनकहा सा ख़्वाब होती हैं,
पढ़ना इसे बहुत जरूरी है,
ये रब का खिताब होती हैं.
सुनिल रघुवंशी सिपाही (इंदौर)
प्यार ऐसा है नशा करोगे झूम जाओगे
वो खुद को भूल जायेगी
तुम खुद को भूल जाओगे ।
मानो करना छोड़ दो
मदहोश हो जाओगे
वो भी लूट जायेगी
तुम भी लूट जाओगे ।
प्यार है समन्दर
लहरों मे लेकर जाओगे
वो भी डूब जायेगी
तुम भी डूब जाओगे ।
शुभम् पाराशर ‘शनि’ (पीथमपुर धार)
जिन्दगी की फक़त इतनी सी कमाई है
मैंने सोचा तुझे और आंख भर आई है
जितेन्द्र शिवहरे जुगनू इंदौर।

