रचनाकार

वह मां कहलाती है

( के.पी. चौहान आरजू )

फूलों के समान सुंदर कोमल
और नाजुक बच्चों को जो
इस दुनिया में लाती है
उन्हें जो इंसान बनाती है
वह मां कहलाती है

कांटे बनकर फूलों जैसे
अपने बच्चों की रक्षा के लिए
जो मौत से लड़ जाती है
वह मां कहलाती है

दुनिया के दु:ख-दर्द सहन करके

दफन कर लेती है अपने सीने में

जो चेहरे पर सिर्फ
मधुर मुस्कान ही दिखाती है
वह मां कहलाती है

जो स्वयं सो जाती है गीले में अपने जिगर के टुकड़े को
सूखे में जो सुलाती है
वह मां कहलाती है

अपने मुंह का निवाला
बच्चों को जो खिलाती है
स्वयं पानी पीकर सो जाती है
वह मां कहलाती है

आशु कवि-शिक्षक-के.पी.चौहान
(आरजू) ग्राम गुरान तह सांवेर जिला इंदौर म. प्र.
Mobi=9826031513

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