रचनाकार

वाहेगुरु का काम

(शब्द मसीहा केदारनाथ)

जैसे ही तीसरी मंजिल की किसी ने घंटी बजाई, तो गुप्ता जी ने तुरंत अपने छज्जे पर आकर देखा।

“अरे क्या हो गया? घंटी क्यों बजाए जा रहे हैं?” गुप्ता जी नीचे देखकर बोले।

“गुप्ता जी! जरा टोनी को बुला दीजिए। मैं फोन लगा रहा हूँ, लेकिन फोन नहीं लग रहा है।”

गुप्ता जी झुँझलाते हुए अंदर चले गए। शायद गुप्ता जी की नींद खुल गई थी घंटी बजाने के कारण। आजकल वैसे भी लॉकडाउन चल रहा है, सो घर में पड़े हुए टीवी देखने और सोने के अलावा कोई कर भी क्या सकता है। उन्होने टोनी को नीचे वर्मा जी खड़े होने की बात बताई और वापिस अपने कमरे में चले गए । अब टोनी अपनी बालकनी में आ गया था। एक ही मकान के दो हिस्से थे तीसरी मंजिल पर इसलिए गलत घंटी अक्सर बजती थी।

“ओए वर्मा जी ! की हो गया? दस्सो जी की काम है?” टोनी ने ऊपर से ही कहा।

वर्मा जी तुरंत अपना फोन लगाने लगे, लेकिन कोरोना की लंबी सी ट्यून के बाद भी फोन रीचेबल नहीं था ।

“टोनी भाई! अपना फोन उठाओ।” नीचे से वर्मा जी ने चिल्लाकर पुकारा।

“ओए वर्मा ! रुको जरा। साला जल्दी में मेरा फोन अंदर ही भूल आया।” और टोनी छज्जे से फिर अंदर चला गया ।

“ओ कौन आया जी ? कौन बुला रहा है?” टोनी की पत्नी ने पूछा।

“अपना वर्मा है, वही जो रोज सुबह -सुबह मुझे बढ़िया-बढ़िया मैसेज करता है। बहुत चंगा आदमी है जी।” टोनी ने कहा।

“ओए चंगा आदमी है, तो लॉकडाउन में तुम्हें बाहर क्यों बुला रहा है? क्या उसे मैसेज भेजने का कोई चंदा लेना है?” पत्नी ने कहा।

“ओए कुलजिंदर कौर! थोड़ी ठंड रख। अभी उससे फोन पर बात करता हूँ। तब तुझे सारी बात बताऊंगा।” और टोनी फिर से बालकनी पर जाकर खड़ा हो गया। उसने वर्मा को फोन लगाया।

“हाँ, वर्मा जी! आप बताओ क्या बात है। यार दोपहर का टाइम तो सोने का होता है।” टोनी ने हँसते हुए कहा।

“टोनी भाई! बात ये है कि तुम्हारी भाभी को मुझे किसी डॉक्टर के पास ले जाना पड़ेगा। यार! उसका बुखार दो-तीन दिन से जा नहीं रहा है, और सच बताऊं तो मुझे ऐसे लग रहा है जैसे कि उसे कोरोना हो गया है। तो मैं चाहता हूँ कि उसका टेस्ट करवा लूं। तुम्हें तो पता है कि मेरे पास तो स्कूटर है, और स्कूटर में उसको ले जाना ठीक नहीं है। अगर तुम मदद कर दो तो मैं डॉक्टर से टेस्ट करवा लूँ तुम्हारी भाभी का।” वर्मा जी ने कहा।

टोनी कुछ देर तो चुप रहा। फिर बोला-“ओए वर्मा ! तू जाकर भाभी को तैयार कर। मैं पाँच मिनट में कपड़े पहन कर गाड़ी निकाल के घर आता हूँ।” टोनी अपनी बात कह कर अंदर चला गया था। उसने अपना फोन एक तरफ रखा और अपना पैजामा उतार कर पैंट पहनने लगा।

“क्या हुआ? ये पैंट पहन कर कहाँ जा रहे हो?” कुलजिंदर ने पूछा।

“ओए, वो वर्मा की बीबी को जरा टेस्ट करवाने ले जाना है डॉक्टर के पास। बस अभी गया और अभी वापस आया।” टोनी हँसते हुए बोला।

“क्यों जी, पूरे मोहल्ले में उसे कोई और नहीं मिला? किस चीज का टेस्ट करवाना है? आजकल कोरोना बहुत चल रहा है। अपने घर पर भी तो छोटे-छोटे बच्चे हैं। अगर उसकी बीवी को कोरोना हुआ तो?” कुलजिंदर कौर ने अपनी चिंता जताते हुए कहा।

“ओए यार! तू इतना प्यार करती है मुझसे ? तू तो यार बच्चों से भी बहुत प्यार करती है।” टोनी हँसते हुए बोला।

“बीबी हूँ तुम्हारी, गाड़ी के स्पेयर पार्ट की तरह कहीं से खरीद कर नहीं लाए थे। अगर मैं तुम्हें प्यार नहीं करूंगी तो क्या तुमने कोई और पाल रखी है, जो तुम्हें प्यार करेगी?” कुलजिंदर कौर ने कहा।

“ओए तेरे अलावा मुझे कोई पसंद नहीं है। मैं वाहेगुरु से डरने वाला बंदा हूँ। तेरे जैसी प्यार करने वाली बीवी है, और मुझे क्या चाहिए? रब जी ने दो बच्चे दे रखे हैं। किसी बात की कमी नहीं है। लेकिन रब जी ने एक बात कही है तू उसे भूल रही है।” टोनी बोला।

“अब तुम्हारी और मेरी बात के बीच में, रब जी की बात कहाँ से आ गई। मैं भी तो रोज सारे परिवार की सेहत के लिए सुखमनी साहब का पाठ करके अरदास करती हूँ। बताओ मैं कौन सी बात नहीं मानती हूँ?” पत्नी ने सवाल किया।

“ओए तू तो बहुत अच्छी है। तभी तो तेरे ऊपर इतना प्यार आता है मुझे। पता है गुरु जी कहते हैं…. हिंदू- तुरक कोई राफजी इमामसाफी, मानस की जाति सबै एकै पहिचारबो।” टोनी ने पैंट की ज़िप बंद कर बेल्ट को कसते हुए कहा।

“इस बात का अब यहाँ क्या मतलब है?” कुलजिंदर कौर बोली।

“जो तू अभी कह रही थी कि वर्मा ने किसी और का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया? किसी और से मदद क्यों नहीं मांगी? ओए मेरी भोलिए ! वाहेगुरु जी ने सेवा का मौका दिया है। और रही बात कि मुझे कोरोना हो जाएगा, तो तू बिल्कुल ठीक कहती है। मैं अपना पूरा ध्यान रखूंगा। ला… मेरा पर्स और दो मास्क दे- दे। वाहे गुरु जी फरमाते हैं कि सूरा सो पहचानिए जो लड़े दीन के हेत। ये खाली पाँच ककार सजा लेने से कोई सरदार नहीं होता। सरदार होता है बिना कुछ सोचे किसी भी जरूरतमंद की मदद करने वाला। वाहे गुरु पर भरोसा रखने वाला। क्या तू मुझे मेरे वाहेगुरु के सामने मुझे मुँह दिखाने लायक नहीं छोड़ना चाहती?” टोनी ने कहा।

“अरे! ऐसा तो मैंने सोचा ही नहीं था। बाबाजी मुझे माफ करें। मैं तो बच्चों के प्यार में पड़कर तुमसे कह रही थी। सही कहते हो, अगर इंसान, इंसान के काम नहीं आएगा तो बाबाजी ख़ुद तो मदद करने के लिए आने से रहे। वह तो हमारे दिल में रहते हैं, और उनके कहने से ही इंसान अच्छा काम करता है। तुम्हारे अच्छे काम में मैं रोड़ा नहीं बनूंगी। मैं तुम्हारे लिए गर्म पानी करके रखूंगी। जब वापस आओगे, तब सारे कपड़े डेटॉल वाले पानी में डाल देना, और पानी में डिटॉल डालकर अच्छे से नहा लेना। अगर रब ने रखना ही है तो फिर डरना क्या। अच्छा काम करके ही रब के पास जाएंगे।” और कुलजिंदर कौर ने टोनी का पर्स और दो मास्क उसके हाथ में थमा दिये।

“वाहे गुरु जी दा खालसा….. वाहेगुरु जी की फतेह।” कहकर टोनी ने कुलजिंदर कौर का गाल चूम लिया।

“हटो जी। अच्छे काम में देर कर रहे हो। जल्दी जाओ। वापस तो घर ही आना है। दो बच्चों के बाप हो गए, फिर भी तुम्हारी आदत है कि नहीं सुधरी।” कुलजिंदर कौर बोली।

“ओए जिसकी वोटी इतनी बढ़िया हो, फिर कोई आदमी कैसे सुधर सकता है। तू ही तो मेरी ताकत है। चलता हूँ, और वाहेगुरु का काम करके आता हूँ।”

टोनी मुस्कुराते हुए कार की चाबी लेकर तेजी से नीचे उतरने लगा।

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