चर्चा में

आँकड़े नदारत हैं, शायद बहते हुए राजनीति की पवित्र गंगा में…

( शब्द मसीहा केदारनाथ )

आँकड़े
बड़े काम के होते हैं
बहुत कुछ फँसाते हैं
बहुत कुछ डुबाते हैं

आँकड़े
किसी के चेहरे का
मेकअप बन जाते हैं
चेहरा बचाने के लिए
कई चेहरे उतर आते हैं

आँकड़े
नदारत हैं , शायद बहते हुए
राजनीति की पवित्र गंगा में
इसलिए अब आँकड़े
सरकारी रिकॉर्ड में नहीं
श्मशानों और कब्रिस्तानों में
बेशक पाये जाते हैं, मगर
होने के बाद भी पुष्टि की तलाश है

आँकड़े
पुष्टि के वियोग में,
होते हुए भी, पुष्ट नहीं हैं
अपुष्ट आँकड़े चीखते हैं
मगर सत्ता के चश्में से
भला आँकड़े कहाँ दीखते हैं ?

आँकड़े
जो हमने नहीं देखे थे
कंगना ने बताए थे
सोये हुए देश के,
कुछ कंगन खनकाए थे

आँकड़े
अब कंगना को नहीं बताते हैं
सही खबर की तरह छिपाते हैं
कमाल के लोग हैं साहब ,
अक्सर कमाल कर जाते हैं
दो राज्यों की सीमाओं में
अब लाश नहीं, एलियन पाये जाते हैं

आँकड़े
ढ़ोल पीटकर बताए जाएँगे
कामयाबी के गुणगान गाये जाएँगे
स्थिति में सुधार के बाद ही,
कुछ चेहरे सामने लाये जाएँगे

आँकड़े
ये भी बताते हैं
कि चेहरे काले हो जाने पर
अक्सर छिपाए जाते हैं
अब ये धंधा है, भले ही गंदा है
गले पर कसा हुआ फंदा है
आँकड़े अब खुद शिकार हैं
हाँ, कुछ शिकारी बीमार हैं

चलो ! आँकड़े तलाशते हैं और
उन्हें सहेजते हैं, दो साल के लिए
यादों की पिटारी में, आंसुओं के साथ
तब तक वेंटिलेटर पर अंतिम साँस लेते
सच के लिए सब मिलकर प्रार्थना करें।

(लेखक दिल्ली में रेलवे विभाग में इंजीनियर हैं)

One thought on “आँकड़े नदारत हैं, शायद बहते हुए राजनीति की पवित्र गंगा में…

  • GOVIND MISHRA

    बहुत बहुत सुंदर दादा🌹🌹

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