खास-मेहमान

योगी जी आ ही रहे हैं तो, बिलखते हुए मऊ को हंसा जाइए, कुछ दे जाइए

( आनन्द कुमार )

मऊ। सूबे के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी थोड़ी ही देर में आप मऊ आने वाले हैं। वैसे तो आपका मऊ से पुराना रिश्ता है। मऊ के बारे में हमेशा आपने सोचा है। मुख्यमंत्री बनने के बाद आप कई बार, मऊ के सरजमीं पर आए और चले गए। आपका हर बार आना चुनावी और राजनैतिक रहा है तथा कुछ पल के लिए आना रहा है। लेकिन इस बार आप मऊ आ रहे हैं तो काफी समय लेकर आ रहे हैं। आपका कार्यक्रम तीन घंटा से ज्यादा का है। कोई चुनावी रैली नहीं है, किसी के लिए वोट नहीं मांगना है। आप आ रहे हैं अपने ही कार्यों का धरातल पर ग्राउंड रिपोर्ट देखने, आप आ रहे हैं अपने ही कार्यकर्ताओं से मिलकर अपने ही सरकार का लेखा-जोखा देखने, तो योगी जी आइए, मऊ की धरती पर आपका स्वागत है, अभिनंदन है एवं वंदन है। लेकिन योगी जी स्वागत, अभिनंदन और वंदन के साथ मऊ के नागरिकों का एक दर्द भी है कृपया उसको भी छू लेने का प्रयास करिएगा, उसको भी समझ लेने का प्रयास करिएगा। आपका मऊ आना-जाना तो लगा ही रहेगा, लेकिन मऊ वालों की उम्मीदों को भी समझिए और मऊ के लिए कुछ करिए। यह मऊ की एक-एक आवाम का का दर्द है, यह मऊ के हर एक उस नागरिक का दर्द है जो आपकी पार्टी को वोट दिया है और नहीं भी दिया हैं। मुख्यमंत्री जी सुना है कि आप विकास कार्यों का घोषणा भी करेंगे, कुछ हुए कार्यों का उद्घाटन करेंगे तो कुछ नवीन कार्यों का शिलान्यास भी करेंगे। बिल्कुल करिए, आपके हर कार का स्वागत है, लेकिन योगी जी इस सरकार के आप के कार्यकाल की समयावधि समाप्त होने वाली है और आपके द्वारा मऊ को कुछ भी नहीं मिला है। मऊ वर्षों से अनाथ था और आज आपके सरकार में इतने जनप्रतिनिधि होने के बाद भी, पड़ोस का स्वयं आपके मुख्यमंत्री होने के बाद भी, वह भी वह मुख्यमंत्री जिसका मऊ से नाता है, जिसके आंखों में मऊ के लिए आंसू हो, जिसका मऊ से रिश्ता व लगाव हो, के होने के बाद भी आज अनाथ है। आप ही बताइए, आखिर आप मऊ का दर्द नहीं समझेंगे तो कौन समझेगा। अब कौन मऊ के इतने करीब का मुख्यमंत्री होगा, जो मऊ के बारे में सोचेगा, आपके सरकार बनने में मऊ ने आपको क्या नहीं दिया था, इतिहास में पहली बार तीन विधायक मऊ ने आपको दिया था लेकिन मऊ में विकास की कोई भी ठोस कार्य आपके द्वारा नहीं किया गया। जिसका मऊ वालों को आज भी इंतजार है। वैसे तो आप आज स्वयं विकास कार्यों की लेखा जोखा देखने आ रहे हैं। खैर आपके सामने जो भी लेखा जोखा प्रस्तुत किया जाए, अगर आप उसे मेरे चश्मे या जनता जनार्दन के चश्मे से देखने की कोशिश करेंगे तो, आप के आने की भनक लगते ही जिला प्रशासन ने शहर से सटे वर्षों से गड्ढा हुआ सड़क को ठीक कराने की आनन-फानन में कोशिश की। यह वही सड़क है जब उपचुनाव में अंधेरा होने के बाद आपका हेलीकॉप्टर नहीं उड़ पाया और ऐसे सड़क पर आपकी कार हिचकोले खाते हुए वाराणसी की ओर गई थी। तब आपने आदेश दिया था और चुनाव को एक साल से ज्यादा बीत गए, लेकिन अधिकारियों ने सड़क निर्माण की जुर्रत नहीं समझी और जैसे ही आपके आने की भनक लगी तो सड़क चमचम करने लगी, सड़क आनन-फानन में बन गई। योगी जी आखिर ? आप सूबे के मुख्यमंत्री हैं आप को दिखाने के लिए अधिकारियों के पास बजट भी आ गया, सड़क का निर्माण भी हो गया लेकिन इस खराब सड़क की वजह से कितने लाख लोगों को दुश्वारियां झेलनी पड़ी कितने एक्सीडेंट हुए लेकिन अधिकारियों को यह सब नहीं दिखी और आप के आते ही वे सड़क निर्माण की सुधि लेने दौड़ पड़े। इस विषय को याद दिलाने का कारण सिर्फ यह है कि आपके अधिकारी ऐसे ही हैं और आपकी सरकार ऐसे ही चला रहे हैं। कहीं न कहीं इन अधिकारियों की वजह से भी आपकी सरकार की बदनामी हो रही है । इन्हें भी देखने व दुरूस्त करने की जरूरत है और इनको समझाने की जरूरत है। योगी जी मऊ की आवाम के दर्द के बारे में कहना है कि यहां कोई भी इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज कुछ ऐसा बड़ा प्रोजेक्ट दे जाइए जो मऊ के ठप पड़े विकास में इतिहास बन जाए। जो कल्पनाथ राय के अधूरे सपनों को पूरा कर जाए। योगी जी कुछ ऐसा कर जाइए, कुछ ऐसा दे जाइए। मुख्यमंत्री जी आपके लिए इन विकास कार्यों की घोषणा करना चुटकी का काम है लेकिन मऊ के लिए यह किसी अमीरी से कम नहीं है। योगी जी मऊ आ ही रहे हैं तो कुछ दे जाइए मऊ के लिए कुछ कर जाइए, बिलखते हुए मऊ को हंसा जाइए, कुछ दे जाइए। इतना ही भारतीय जनता पार्टी में भी लोगों के प्रति दुर्भावना रखा जाता है ऐसे बहुत से लोग हैं जो पार्टी, मोदी जी और योगी के लिए जी जान लगाते हैं लेकिन उनको, आपके आगमन जैसे आयोजनों से दूर रखा जाता है यह भी भाजपा हित में नहीं है।

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