चर्चा में

बिहार के मुख्यमंत्री के नाम, पत्रकार उज्ज्वल का खुला पत्र

■ आपको महात्मा बुद्ध की कसम देता हूँ। इन पेड़ों को बचा लीजिए। मैं थक गया आपको और आपके अधिकारियों को ईमेल करते-करते। कोई गारंटी नहीं आपके अधिकारी कोई झूठे मुकदमे में फंसा कर मेरी आवाज को बंद न कर दें। ऐसे मुझे डर नहीं लगता। बस अंतिम बार कह रहा हूँ कि किसी भी तरह इन पेड़ों को बचा लीजिए।


सेवा में,
माननीय नीतीश कुमार,

मुख्यमंत्री, बिहार सरकार

महोदय,
आपने अपने सात निश्चय योजना में जल-जीवन-हरियाली को भी शामिल कर रखा है। बड़ी अच्छी योजना है। अपने तमाम सरकारी सेवकों को इसमें लगा दिया। यह भी काबिल-ए-तारीफ है। गया में सड़कों पर आपके अधिकारियों ने पौधे लगा दिए। स्वराज्य पूरी रोड में। आखिर आपको अपना पर्यावरण प्रेम भी दिखाना था।
अब आता हूँ अपनी बात पर। पटना-डोभी एनएच 83 के निर्माण में आपके अधिकारियों की उपस्थिति में एक झटके में कोई एक लाख से अधिक पेड़ काट दिए। चाहते तो इनमें से आधे से अधिक पेड़ों को रीट्रांस्प्लांट किया जा सकता था। अब आपके डीएम साहब अपनी उपस्थिति में पेड़ों को कटवाएंगे तब उन्हें कौन रोकेगा। मैंने थोड़ी सी जुर्रत की है। इन पेड़ों को काटने से रोकने की। इसी साल फरवरी-मार्च में बेलागंज में प्रस्तवित बाईपास रोड पर आगे 250 साल पुराने पेड़ को काटा जा रहा था। तत्काल तो डीएफओ की मदद से पेड़ काटने का काम रुक गया था। लेकिन इन दिनों फिर से इन पेड़ों को काटने का काम तेजी से चल रहा है। एनएचएआई के संवेदक रात-दिन एक करके सबसे पहले पेड़ों को ही काट रहे हैं। एक चोर की तरह। दिन में तो काटते दिखते नहीं। सुबह देखता हूँ तब उसका नमो निशान तक नहीं रहने दे रहे।
250 साल से भी अधिक इन विशालकाय बरगद और पीपल के पेड़ को काटे बिना भी सड़क बन सकती है। इन पेड़ों को बचाना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि…

  1. ये विशालकाय बरगद और पीपल पेड़ पूरे गांव के लिए भूगर्भ जलस्तर को बनाये रखते हैं और लोगों को आसानी से पीने का पानी सालों भर मिलता रहता है।
  2. ये विशालकाय बरगद और पीपल के पेड़ करीब दस हजार से अधिक पक्षियों का बसेरा है। इनके काटे जाने से पूरे गांव का परिस्थितकीय तंत्र गड़बड़ हो जाएगा।
  3. इस बरगद के पेड़ के नीचे पूरे गांव वासी ग्राम देवता के रूप में इनकी पूजा करते हैं। हर शादी-विवाह के मौके पर इस बरगद के पेड़ के नीचे विशेष पूजा की जाती है।
  4. इन पेड़ों को काटे जाने से पर्यावरण को बड़ा नुकसान होगा। ये विशालकाय पेड़ पूरे गांव को स्वच्छ और ताजी हवा आॅक्सीजन के रूप में प्रदान करते हैं।
  5. वर्ष 2019 में लू से सबसे अधिक मौतें गया में हुई थीं। ऐसे में इन विशालकाय पेड़ प्राणरक्षक की भूमिका निभाते हैं।

आपके अधिकारियों को ये बातें कब समझ में आएंगी। गया में जब इसी साल लू में सबसे अधिक मौतें हो रही थीं तब आप और आपके अधिकारी 18 डिग्री के तापमान में बैठ कर केवल मौत की समीक्षा कर रहे थे। इन पेड़ों को काट कर आप सड़क तो बनवा देंगे लेकिन कल जब ये शुद्ध हवा और पानी के बिना मरेंगे तब आपको कोई उपाय नहीं सूझेगा। मैंने मार्च 2020 में भी आपको ईमेल करके अवगत कराया था। एनएचएआई के चेयरमैन से भी इस पेड़ को नहीं काटने की गुहार लगाई थी। आपने मेरे ईमेल को वन एवं पर्यावरण विभाग को अग्रसारित कर अपनी जिम्मेवारी पूरी कर ली। सच कहता हूं यदि ये 250 और 300 साल से अधिक पुराने इन पेड़ों को काटा गया तब आपको 10 हज़ार उन पक्षियों की भी हाय लगेगी जो कई पीढ़ी से यहां रह रहे हैं। आप महात्मा बुद्ध के सिद्धयांत को मानते हैं। वे पक्षियों की हत्या को भी हिंसा मानते हैं। आपको महात्मा बुद्ध की कसम देता हूँ। इन पेड़ों को बचा लीजिए। मैं थक गया आपको और आपके अधिकारियों को ईमेल करते-करते। कोई गारंटी नहीं आपके अधिकारी कोई झूठे मुकदमे में फंसा कर मेरी आवाज को बंद न कर दें। ऐसे मुझे डर नहीं लगता। बस अंतिम बार कह रहा हूँ कि किसी भी तरह इन पेड़ों को बचा लीजिए।

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