भाई में भरत का भाव मिले…
मेरी कलम से ….अखिलानंद यादव
अपनो से आंगन हो जुड़े
मां-बाप के सपने हो पूरे
दूर हो सारे शिकवे गीले
भाई में भरत का भाव मिले
जो स्वयं सुख से दूर रहे
भाई के लिए हर चाह मिले
भाभी भी मां की जैसी हो
परिवार प्रति वो हितैषी हो
हल हो जाए हर मुश्किल
गर बात भी ऐसी -वैसी हो
मिलकर अपने साथ रहे
खुशियों से भरा प्रासाद रहे
भाप बनकर हर संशय
वायुमंडल में आबाद रहे
हालात जब घर के सुधरे
आनंद आंगन में उतरे
सम्मान मिले मां – बाप को
समय शराफत से गुजरे
अपनो से आंगन हो जुड़े
मां-बाप के सपने हो पूरे


