पाद हस्तासन से मजबूत करें रोग प्रतिरोधक क्षमता
■ योगासन करने से शरीर में रक्त का प्रवाह तेजी से होता है।म
मऊ। रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी सिस्टम) को मजबूत कर हम कोरोना वायरस के संक्रमण से बच सकते हैं। रोग प्रतिरोधिक क्षमता बढ़ाने के लिए हमें पौष्टिक भोजन के साथ ही योग और ध्यान की भी जरूरत है। खास बात यह है कि यह सभी उपाय हम लॉकडाउन का पालन करते हुए बिना किसी बाहरी वस्तु या लोगों के संपर्क में आए आसानी से अपना सकते हैं।
योग वेलनस सेंटर जिला अस्पताल के योग प्रशिक्षक संजीत शर्मा ने बताया कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को आसानी से और घर बैठे ही मजबूत बनाया जा सकता है। वह बताते हैं कि पाद हस्तासन को रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में सर्वाधिक लाभदायक माना जाता है। इसके लिए आपको ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। बस आपको अपनी आदत में योग को शामिल करना पड़ेगा। योग प्रशिक्षक ने बताया कि शुरुआती दौर में इसे करने में थोड़ी परेशानी हो सकती है, लेकिन कुछ ही दिनों के अभ्यास के बाद यह प्रक्रिया बेहद आसान हो जाती है। वह बताते हैं कि अंग्रेजी में इसे स्टैंडिंग फॉरवर्ड बेंड के नाम से भी जानते हैं। योग के ऊपर हुए कई अध्ययनों में इस बात की पुष्टि हुई है कि पाद हस्तासन से हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलता है। उन्होंने ने आगे बताया कि इस योगासन को करने से पूरे शरीर में रक्त का प्रवाह तेजी से और ठीक तरह से होता है। इसका सकारात्मक प्रभाव इम्यून सेल्स पर पड़ता है। इस कारण पाद हस्तासन इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में लाभदायक माना जाता है।इसके अलावा ताड़ासन, उत्तानासन, मंडूक आसन, भुजंग आसन, प्राणायाम, भस्त्रिका, कपालभाति,अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, उद्रीथ और सेतुबंध आसन करके भी हम अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं।
इस तरह करें पाद हस्तासन…
किसी समतल स्थान पर दरी अथवा चादर बिछाकर उस पर इस तरह से खड़े हो जाएं कि दोनों पैरों के बीच में एक फीट की दूरी बनी रहे। अब अपने पैरों को सीधा रखें और एक गहरी सांस लेते हुए हाथों को नीचे की ओर ले आएं,ध्यान रहे कि इस दौरान आपके पैरों के घुटने कतई न मुड़ने पाएं। इसी अवस्था को बरकरार रखते हुए अपने हाथों से पैरों के अंगूठे को छूने की कोशिश करें। जब आप यहां तक की प्रक्रिया को अच्छे से करने लगें तो उसके बाद अपने हाथों को पीछे की ओर ले जाएं। अब एड़ी के ऊपरी हिस्से को पकड़ने की कोशिश करें। थोड़ी देर इसी मुद्रा में रहें और फिर वापस सामान्य मुद्रा में आ जाएं।
सावधानी – कमर शूल में यह आसन वर्जित है।


