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नजरिया – कारोबार में आनलाइन मार्केटिंग की संभावनाएं

अखबार का कोना : दैनिक मान्यवर

संजय दुबे…
स्वतंत्र पत्रकार

कोरोना का असर आने वाले छह महीनों में भी खत्म नहीं होगा। ऐसी आशंकाए है कि इसके बाद बेरोजगारी और आर्थिक मंदी का दौर शुरू होगा। अभी फिलहाल सरकारें इस रोग को न फैलने को लेकर प्रयासरत है। इसके बाद जो सबसे बड़ी चुनौती आयेगी वो आजीविका की ही होगी। अभी ही तमाम आर्थिक घोषणाएं इसीलिए की गयी है कि खाने कमाने के चक्कर में लोंगे को कहीं जान न गंवानी पड़े। उत्तर प्रदेश में सरकार 35 लाख मजदूरो को 1000रू0 की राशि सीधे खातें में देगी। साथ ही गरीब परिवारों को अनाज भी देगी। पश्चिम बंगाल सरकार ने छह माह का अनाज देने का एलान किया है। दिल्ली सरकार ने लाकडाउन के दौरान स्थायी और संविदा कर्मचारियों को वेतन देने के लिए कंपनियां को कहा है। ये सारी घोषणाएं इसलिए की गयी है कि लोंगो को घरों में रोका जा सकें। जिससे इस महामारी को विकराल रूप धरने से रोका जा सकें। ये तो इसका प्राथमिक चरण है। यहीं पर इसे रोककर कोई भी देश इससे उत्पन्न होने वाली विकराल समस्या से बच सकता है। पर, बेरोजगारी की भयंकर मार से भी बच सकता है?ये सोचनीय और बहुत ही जरूरी है।
इस बीमारी से दुनिया में करीब ढ़ाई करोड़ लोगां के बेरोजगार होने की आशंका है। ऐसा आइएलओ (अंर्तराष्ट्रीय श्रमिक संगठन) का मानना है। वहीं भारत में भी एसबीआई रिसर्च के मुताबिक भारत की जीडीपी 0.09 फीसदी तक प्रभावित होगी। अब ऐसा क्यों होगा, इसे शायद बताने की जरूरत नहीं है। हाल के दिनों तक हर क्षेत्र में कारोबार की हालत ठीक नहीं है। ऐसे में नए उपजे इस हालात से हमारे देश के लिए बेरोजगारी से पार पाना आसान नहीं दिख रहा। मगर फिर भी एक क्षेत्र है जिसमें रोजगार सृजन की काफी संभावनाएं हैं। आनलाइन कारोबार । अभी राशन, सब्जी, दूध, अंडा, मछली जैसे तमाम प्रोडक्ट है। जिनके लिए ग्राहकां को बाजार जाना ही पड़ता है। इसके लिए बहुत ज्यादा इंफ्रास्टक्चर की जरूरत नहीं है। सरकार को थोड़ा बहुत उपलब्ध संसाधनों को बस बेहतर बनाना है। साथ ही जरूरत है थोड़ी नौजवानों को प्रेरणा और गारंटी की। इसके लिए सरकारी प्रयास की दरकार होगी। इसे बड़ी आसानी से राज्य सरकारें पूरी कर सकती है। मौजूदा दौर में हर राज्य सरकार के एजेंडे में वो सारी सुविधाएं शामिल है जिसकी इस क्षेत्र को दरकार है। जैसे- तेज गति वाला ब्राडबैंड इंटरनेट। बढि़या और चौड़ी सड़कें। सरकारी और प्राइवेट बैंको की मौजूदगी। ऐसा यूपी में एक जिला एक उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए भी हो रहा है। देश के लगभग हर क्षेत्र में आज इंटरनेट और आनलाइन कारोबार से वाकिफ काफी संख्या युवाओं की है। जो अपनी फैशनेबल पोशाक के साथ सुदूर गांवां में रह रहे अपने परिवार के बुजुर्गों की दवा तक खरीद रहे है। इनमें से कई तो ऐसे है जो इन कंपनियों को साफ्टवेयर बनाकर आपूर्ति करने वाली कंपनियों का हिस्सा है। उनमें भी काफी तादाद हिंदी पट्टी के नौजवानों की है। इनको अगर सरकार की तरफ से जरूरी संसाधन मुहैया हो जाय तब ये इस इलाके के साथ साथ देश की भी आर्थिकी संवार सकते है।
आज के कोरोना माहौल में सबसे ज्यादा अगर कारोबारी संभावना और मांग कहीं है तो आनलाइन मार्केट में ही है। यूं तो इससे लगभग हर वस्तुएं जुड़ चुकी है। कपड़े, जूते, इलेक्ट्रॉनिक जैसे हल्कें सामानों समेत आलमारी, फर्नीचर जैसे भारी भरकम सामान भी उपलब्ध है। फिर भी खाने पीने के साथ काफी ऐसी चीजें है जिन पर ग्राहक भरोसा नहीं कर पा रहा है। यहीं से अब नौजवान नवोन्मेषियों की जरूरत शुरू होती है। किसी भी इलाकें की एक खास चीज लोकप्रिय होती है। जैसे, अगर सब्जी को ही लिया जाय तो हर क्षेत्र में एक जगह की लौकी अच्छी मानी जाती है तो दूसरे जगह की पालक,गोभी,मटर आदि। अब मंडी के भीतर इन सारे जगह के किसान अपनी फसल लेकर पहुंचते है। जहां से छोटे कारोबारी इन मालों को ले जाकर अलग – अलग इलाकों में बेचते है। ऐसे में हर क्षेत्र में आनलाइन कारोबार के जानकार नौजवानों के लिए ये एक संभावनाआें का द्धार भी है। ये चाहें तो अपने इलाके के किसानां के खेतों से सीधे उसकी सब्जियों के उत्पाद को ग्राहकों के घर तक पहुंचा सकते है। इससे काफी असुविधा से किसान औैर ग्राहक दोनों बचेंगें। किसान के खेतों से उतनी ही सब्जी टूटेगी जितनी मांग होगी। रोज की उपलब्धता की गारंटी के चलते बाजार में अनावश्यक मांग नहीं होगी। जिससे बाजार पर फर्जी मांग की आपूर्ति का दबाब भी नहीं रहेगा। क्यांकि प्रायः ऐसा देखा जाता है कि जब बाजार में कोई वस्तु कम उपलब्ध होती है तब ग्राहकों के वापस लौटने से दुकानदार को उसकी ज्यादा मांग समझ में आती है। लिहाजा दूसरे दिन वो उसे ज्यादा खरीदता है। ऐसा मंडी के काफी दुकानदार करते है। क्योंकि कल का वापस हुआ ग्राहक पूरी मंडी जाकर वहीं माल पूछता है जो उसे नहीं मिलता है। वहीं वो जब दूसरे दिन मंडी आता है तब अपनी जरूरत भर माल लेकर चलता बनता है। जिससे मंडी के दुकानदारों का माल बच जाता है । फिर, जब किसान तीसरे दिन वहीं माल लेकर मंडी आता है तब आढ़तिए उसके माल में उतनी रूचि नहीं दिखाते जिससे किसान उसे औने पौने दामों में बेच कर जाने को मजबूर होता है। ऐसे में ग्राहक,उत्पादक,विक्रेता तीनों नुकसान उठाते है।
सब्जी मंडी तो महज एक नमूना है। अभी काफी ऐसे क्षेत्र है जहां आनलाइन मार्केटिंग की काफी संभावनाएं है। जैसे-दूध, राशन, फल, मीट आदि। हर क्षेत्र में लोग ताजे खाने पीने के सामानों को पसंद करते है। अभी कुछ सालों पूर्व तक मुज्जफरपुर, भागलपुर, समस्तीपुर, प्रयागराज ,वाराणसी जैसे क्षेत्रों में ताजी मछलियां मिलती ही मिलती थी। मगर आज ऐसा नहीं है। इन हर जगहों के बाजारों पर अब हैदराबादी मछलियों का कब्जा हो चुका है। एक तरफ जहां इसकी मांग बढ़ी वहीं दूसरी तरफ इसका स्थानीय स्तर पर उत्पादन घटा। नतीजा आंध्र प्रदेश के मछली उद्योग ने देश के हर मछली मंडी में अपना सिक्का जमा लिया। आज भी देश के हर क्षेत्र में छोटी बड़ी काफी पोखरियां और बड़े तालाब है। जिनके मीठे पानी की मछलियों की काफी मांग है। फिर भी ये उतना कारोबार नहीं कर पाती जितना इनका होना चाहिए। दरअसल इनकी एक सीमा होती है। लंबे परिवहन दूरी में इनकी लागत बढ़ जाती है। जिससे ये अपना माल एक निश्चित परिधि के भीतर बेचने पर मजबूर होते है। अगर इन्हें आनलाइन नेटवर्क से जोड़ दिया जाय तब ये बड़ी आसानी से हैदराबादी मछलियों से मुकाबला कर सकेंगी। क्योंकि ऐसा होते ही 100 किमी की परिधि में पड़ने वाले मछली उत्पादकों का एक अपना नेटवर्क बन जायेगा। जिससे इनको जिस क्षेत्र का आर्डर मिलेगा उसी क्षेत्र के तालाब से ताजी मछली को एक निश्चित समय के भीतर पहुंचा देंगें। लिहाजा इस क्षेत्र में असफलता का प्रतिशत अन्य क्षेत्रों से निश्चित ही कम होगा। आवश्यकता बस इसको एक मानक स्तर तक बनाने की है। इसके लिए सरकार को जरा ध्यान देने की जरूरत होगी। उसे हर राज्य के संभाग स्तर पर ऐसी कंपनियो के गठन के लिए हर संभव सरकारी मदद का एलान करना चाहिए। स्थानीय स्तर पर कंपनियों के लिए आवश्यक ढ़ांचा निर्माण उपलब्ध कराना होगा। ग्राहकां को शुचिता और पारदर्शिता की गारंटी भी उपलब्ध करानी होगी। जिससे लोगां के भीतर इस तरह के कारोबार करने वालों पर भरोसा जम सकें। जो इसके लिए अति आवश्यक है। जैसे अमेजन और अलीबाबा जैसी कंपनियां अपने उत्पादों को पसंद न आने पर एक निश्चित अवधि में वापसी की गारंटी देती है। ऐसा करना शुरूआती दिनों में जरा कठिन हो सकता है मगर इसका भविष्य निश्चित ही देश और समाज को एक नयी दिशा दशा प्रदान कर सकता है। जो हर लिहाज से देश के आर्थिक,पर्यावरण,सामाजिक क्षेत्र को एक सूत्र में भी बांधेगा।

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