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कुछ अलग : अपने पुत्र के जन्मदिन दिन पर एक माँ का साहसिक पोस्ट

मोंटी…
आज 22 जनवरी….।
बेटा आज आपका जन्मदिन है…………
तुम को तो अब किसी चीज की जरुरत नहीं…..
तुम इन सबसे बहुत ऊपर हो चुके हो…
.लेकिन तुम्हारी माँ तुम्हारी पसन्द जानती है…..मैं खुशी से खुशी बिखेरूगी …….
मैंने खुद ही सजधज के तस्वीर निकाल ली…..
.मैं जानती हूँ तुम्हारी नज़र मैं दुनिया की सबसे खुबसूरत माँ हूँ…..कैसी लग रही हूँ….बताओ…..

आज आपको बेटू …………
मैं सिर्फ़ और सिर्फ़ आपको आज प्यार भेज सकती हूँ..
जिस दुनिया में तुम हो मैं अभी नहीं आ पा रही हूँ।।।जो ज़िम्मेदारी मुझे ईश्वर ने सौंपी है ,सिर्फ़ अथक उसे पूरा करने में लगी हूँ ,मैं जानती हूँ मेरा रोना दुखी होना तुम्हें एकदम पसंद नहीं ,और मैं तुम्हें दुखी नहीं करना चाहती ,मैं तुम से बात कर रही हूँ और fb पर लिख रही हूँ ,तो सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरी उन बहनों के लिए जिन्होंने मेरी तरह अपने इकलौते पुत्र को खोया है ,मैं उनकी शक्ति बनना चाहती हूँ ,मैं चाहती हूँ कि जैसे तुम्हारी रूह से मैं बात करती हूँ…तुम जवाब देते हो ,इशारे दे ते हो ,मुझे एहसास देते हो तुम्हारे होने का ….. उन्हें भी महसूस हो………….
सत्य ये है कि ….आत्मा न जन्म लेती है ,न मरती है ,न जलती है…. आत्मा अजर अमर है ……और मैंने ये अनुभव तुम्हारे जाने के बाद किये हैं….. जीवन का सत्य……..
अभी…. अभिषेक… तुमने जीवन का सत्य….दिखाया.

……… वियोग में योग का दर्शन करवाया ………

आप नीचे लिंक पर क्लिक करके भारती शर्मा जी के पोस्ट व उसपर मिलने वाली प्रतिक्रिया को स्वयं पढ़ सकते हैं, तथा अदम्य साहस रखने वाली मां के बारे में जान सकते हैं।

https://www.facebook.com/bharati.sharma.90

सुबह-सुबह सोशल मीडिया पर पर फेसबुक फ्रेंड भारती शर्मा के पोस्ट ने हमें स्तब्ध कर दिया और मैंने अपने शब्दों को रोक न सका। सच कहूं तो माँ होना आसान है लेकिन भारती होना मुश्किल।

मेरी कलम से…
आनन्द कुमार

जीवन कठिन बहुत है,
लेकिन मन, सरल सहज है,
भारत की इस भारती का,
साहस अदम्य, प्रबल है।
आंखों में दर्द रख कर,
जो मुस्कुराहट को बिखेरे,
प्रेम समर्पण के पथ पर,
भावनाओं को समेटे,
ऐसी माँ भारती को,
मेरा बार-बार नमन् है।
निश्चित ही तेरे “मोंटी” का,
“अभिषेक” हो गया है,
भारत की जन्मभूमि से,
परलोक में प्रवेश हो गया है,
आज भी तुमने उसे,
मरने नहीं दिया है।
सच में तुम ऐसी माँ हो,
जो भीड़ में अलग हो।
तेरे शब्द-शब्द से,
निशब्द आज सब हैं,
तेरे हर एक शब्द से,
स्तब्ध आज सब हैं।
जीवन कठिन बहुत है,
लेकिन मन, सरल सहज है,
भारत की इस भारती का,
साहस अदम्य, प्रबल है।
जन्मदिन भी है,
माँ का दिन भी है,
भारती के आंचल में,
साहस का दिन भी है।
प्रेरणा का दिन भी है,
जीने का दिन का भी है,
सच कहे तो आज,
कुछ अलग दिन ही है।

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