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दर्जनों पुस्तकों के लेखक डा. एम नसीम आज़मी के निधन पर शोकसभा

मऊ। महान विद्वान, शिक्षाविद्, शायर व एक दर्जन से अधिक पुस्तकों के लेखक डाक्टर एम नसीम आज़मी की मौत से पूरा मऊ शहर शोकाकुल है।
उर्दू दुनिया में डाक्टर एम नसीम आज़मी के नाम को किसी परिचय की ज़रूरत नहीं थी, इन्होंने जिस क्षेत्र में भी कदम रखा वहां अपनी एक अलग पहचान बनाई। शायरी की दुनिया में कदम रखा तो फैज़ान-ए-आगही के रूप में इनका काव्य संग्रह सामने आया। लिखने पढ़ने का शौक था तो पत्रकारिता के क्षेत्र में भी कदम रखा तो 1975 से 1991 तक मासिक पत्रिका “अदब निखार” का प्रकाशन किया। जब इन्होंने ने उर्दू अदब में कलम उठाया तो इनकी किताबें “असर अंसारी फिक्र व फन के आईने में (1998)”, “नवाए सर्विश(2001)”,तालिमी तजज़िए(2002)”,तालीमी जेहात(2006)”,”असर अंसारी हयात और खिदमात(2007)”, मौलाना मोहम्मद कासिम नानोतवी के तालिमी तसव्वुरात(2009)”, “नकद-ए-सुखन(2010)”, “मिज़ान-ए-आगही(काव्य संग्रह 2011)”, “तालीम और तालीमी अफ्कार(2011)” , ” असर अंसारी पर चंद तहरीरें(2011)”, “तालीमी नेकात(2013)”, “तालीमी एशारात(2014)”, “उर्दू के चंद फिक्शन निगार(2015), “फैज़ान-ए-आगही(2016)”, “राजा राममोहन राय और उनके तहरीकी व तालीमी कारनामे(2016)” आदि पुस्तकें सामने आयीं। इसके अतिरिक्त इन्होंने “अदबी गज़ट” के नाम से 2010 से एक पत्रिका भी प्रकाशित की, जो आज भी अपने परिवर्तित नाम से जारी है।
डाक्टर एम नसीम आज़मी पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे और अलीगढ़ में इलाज चल रहा था इसी बीच ज़िंदगी और मौत की जंग लड़ते हुए ये ज़िंदगी की जंग हार गए और 17 अक्टूबर को जब अलीगढ़ में सर सय्यद डे मनाया जा रहा था उसी समय अदब का एक सितारा हमेशा के लिए सो गया और दुनिया छोड़ कर चला गया। इनका शव 18 अक्टूबर की सुबह इनके पैतृक आवास डोमन पुरा मऊ पहुंचा। और जुमा की नमाज़ के बाद इनकी नमाज़-ए-जनाज़ा शहर के शाही इमाम कारी मसीहुर्रहमान साहब ने पढ़ाई और पैतृक कब्रिस्तान भटकुंआ पट्टी इमामगंज में दफन किए गए।
डाक्टर एम नसीम आज़मी के दुनिया छोड़ कर चले जाने के बाद पूरे उर्दू क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई और श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया और शोक व श्रद्धांजलि सभाओं का सिलसिला आज भी जारी है

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