एक सवाल: ‘बनारस’ नाम अब कौन रखेगा !
एक छोटा सा प्रयास बड़ा सा काम के लिए, कुछ अलग और कुछ खास के लिए संस्कार, संस्कृति व सरोकार की धरोहर बनी अपनी काशी, वाराणसी या बनारस चाहे जो कह लीजिए सब चलेगा। धर्म का संगम जिस शहर के गंगा के हर किनारे पर बसता है, जहां की बोली, भाषा व शैली में एक अलग मिठास पनपता है, जहां बनारसी पान, बनारसी लस्सी व बनारसी कचौड़ी, बनारसी साड़ी आदि अनेकों नामों से बनारस के बाजार बहुतेरे सामान से अटे पड़े हो ऐसे बनारस में जहां देश ही नहीं पूरे विश्व के कोने कोने से धर्म की प्राप्ति के लिए आस्था का सैलाब उमड़ता हो, जहां कण-कण में गंगा माँ समाई हो, जहां प्रेम का समर्पण ठहर-ठहर हो, जहां विरोध में भी प्रेम का रस टपकता हो। ऐसे बनारस की अपनी एक अलग ही कहानी है। धर्म की नगरी बनारस की पहचान अब धार्मिक, शैक्षणिक, आध्यात्मिक के बाद राजनैतिक भी बन चुका है। बनारस ने देश को प्रधानमंत्री दिया है, वह भी वह प्रधानमंत्री देश का भले ही है लेकिन उनकी गूंज विश्व के कोने-कोने तक है। लेकिन अपना बनारस एक माइल स्टोन पर बनारस नाम के लिये तरस रहा है यह तरसना, छटपटाहट ठीक नहीं। बनारस नाम के लिए माइल स्टोन पर बनारस की पहचान के लिए तड़पना परे, तरसना पड़े यह ठीक नहीं है ऐसे में वरिष्ठ पत्रकार पूर्व सम्पादक जनसंदेश एके लारी का यह लेख व प्रयास काफी सारगर्भित है। इस ओर चलने की जरूरत है, इस ओर बढ़ने की जरूरत है।
मंडुआडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर ‘बनारस’ करने की मुहिम साथियों के सहयोग से चला रखा था। मुहिम परवान चढ़ी। तत्कालीन रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने गाजीपुर से लगायत बनारस तक ये ऐलान भी किया कि नाम बदला जाएगा। अब हालत बदल चुके हैं। मनोज जी चुनाव हार चुके हैं। नयी सरकार का गठन हो चुका है। बनारस ने पहली बार प्रधानमंत्री को अपना सांसद चुना है। क्या अब ये उम्मीद करनी चाहिए कि हमारे सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी इस काम को मूर्त रूप देंगे। हांलाकि पिछले कार्यकाल के अंतिम महीनों में वाराणसी में आयोजित एक समारोह में मनोज जी ने मोदी जी और योगी जी के सामने यह मुद्दा जरूर उठाया था। तब ये उम्मीद बनी थी मोदी सरकार अपने पहले कार्यकाल के अंतिम समय में नाम बदलने के काम को अंजाम दे देगी। पर ऐसा नहीं हुआ।
साथियों,
फिर से इस मुहिम को चलाने की आवश्यकता आ पड़ी है। ऐसा इसलिए कि हम जिस शहर के वासी है वहां ‘बनारस’ नाम का कोई माइल स्टोन नहीं है। यह शहर आध्यात्मिक और सांस्कृतिक नगरी है। पूरी दुनिया में सबसे अधिक बनारस और काशी के नाम से ही जाना जाता है।
अपील…
गर आपको भी है ‘बनारस’ नाम से है प्यार तो सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफार्म का इस्तेमाल कर केन्द्र और प्रदेश सरकार से अपील करें।
नोट:चाहे तो पोस्ट शेयर कर के भी इस मुहिम का हिस्सा बन सकते हैं।
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