15 अगस्त को ब्रह्मस्थान स्थित मध्यदेशीय वैश्य अतिथि भवन के सभागार में मनाया जायेगा संत गणिनाथ का जन्मोत्सव कार्यक्रम
● अशोक आर्य के निर्देशन में यज्ञ – हवन तथा प्रसाद वितरण का होगा कार्यक्रम।
मऊ। सुविख्यात संत बाबा गणिनाथ जी महाराज समग्र वैश्य समाज व भारतीय संस्कृति के संरक्षक तथा उन्नायक थे। वे देवाधिदेव महादेव के शक्तिपुंज स्वरूप थे । हिमालय की गुफाओं के कैलाश मान सरोवर के गुरला स्थित मान्धाता पर्वत पर पिता मंनसाराम व माता शिवा के घोर तपस्या के पश्चात भाद्रबदी अष्टमी शनिवार रात्रि संवत 1007 विक्रमीय में योगीश्वर का अवतरण हुआ था।
उन्होंने अपने जीवन में अपने दिव्य आभा से समग्र समाज को आलोकित व प्रकाशित किया । अपने जीवन काल में उन्होंने समय पड़ने पर एक योद्धा और एक कुशल राजा के पद को सुशोभित किया तथा समय पड़ने पर समग्र समाज की सेवा की प्रतिज्ञा लेकर वानप्रस्थ मे चले गए। उक्त विचार है अखिल भारतीय मध्यदेशीय वैश्य सभा जनपद मऊ के जिलाध्यक्ष डॉ राम गोपाल गुप्ता के। डॉ रामगोपाल गुप्त ने अपने उद्बोधन में कहा कि कुलगुरु संत गणि नाथ जी का जन्मोतसव् इस वर्ष सादगी रूप मे साकेतिक ढंग से आगामी 15 अगस्त शनिवार को ब्रम्हस्थान स्थित मध्यदेशीय वैश्य अतिथि भवन के संभागार मे मनाया जाएगा। इस क्रम मे अशोक आर्य के निर्देशन मे यज्ञ हवन तथा प्रसाद वितरण किया जाएगा। समग्र समाज से निवेदन किया गया है कि यज्ञ मंडल में सम्मिलित होकर पुण्य के भागी बनें

