स्वास्थ्य विभाग की कार्यशाला : कोविड प्रोटोकाल के साथ स्वास्थ्य सेवाएँ घर-घर पहुंचाए, कोरोना को हराएं
● आशा और एएनएम की वर्चुअल कार्यशाला में स्वास्थ्य के मुद्दों पर हुई चर्चा
● कोविड को लेकर समुदाय में उपजे भेदभाव व भ्रांतियों को दूर करें : दया शंकर
● “जरूरी है बात करना” कार्यक्रम से परिवार कल्याण कार्यक्रम पकड़ेंगे रफ़्तार : शालिनी
● लोगों को इस तरह जागरूक करें कि वह सेवाओं को लेने के लिए खुद आगे आयें : रंजना
मऊ । कोविड-19 के दौर में भी मातृ-शिशु, प्रजनन व पोषण संबंधी स्वास्थ्य सेवाओं को समुदाय तक पहुंचाने के साथ ही इस आपदा से निपटने को लेकर लोगों को जागरूक करने में जुटीं फ्रंटलाइन वर्कर (आशा/आशा संगिनी व एएनएम) की मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में यूनिसेफ, उत्तर प्रदेश तकनीकी सहयोग इकाई (यूपी-टीएसयू) व सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) के सहयोग से एक वर्चुअल कार्यशाला आयोजित की गयी। कार्यशाला में उन्हें वर्तमान चुनौतियों से निपटने के गुण सिखाये गए। कार्यशाला का विषय था – “कोविड-19 एवं प्रजनन, मातृ-शिशु, किशोर स्वास्थ्य और पोषण संबंधी सेवाओं का संचार एवं चुनौतियां”, कार्यशाला में उनसे अपेक्षा की गयी कि जिस तरह से पोलियो को ख़त्म करने में उनकी अहम् भूमिका रही है, उसी तरह से कोविड-19 को भी ख़त्म करने में आगे आयें ।
जिला सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक संतोष सिंह ने बताया कि फ्रंट लाइन वर्कर्स को कोरोना महामारी से बचाव के लिए मास्क का उपयोग करना, एक दूसरे से दो गज की दूरी, बार- बार साबुन-पानी से हाथ धोने तथा समुदाय में लोगों को जागरूक करने और बाहर से आये लोगों की लाइन लिस्टिंग करने तथा किन लोगों को कोरोना संक्रमण के दौरान ज्यादा सावधानी बरतने कि जरूरत है आदि के बारे में बताया ।
यूनिसेफ से दयाशंकर सिंह ने बताया कि कोविड को लेकर जो भ्रांतियां और भेदभाव हैं उस पर चर्चा करते हुए कहा कि इनको दूर करने में फ्रंट लाइन वर्कर्स की अहम् भूमिका है। वह समुदाय में इस पर अवश्य चर्चा करें और केवल तथ्यात्मक संदेशों को ही समुदाय तक पहुंचाएं क्योंकि समुदाय में फ्रंटलाइन वर्कर (आशा/आशा संगिनी व एएनएम) लोग स्वास्थ्य विभाग का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने कहा कि पोलियो को ख़त्म करने में जिस तरह से सराहनीय भूमिका निभाई है, उसी तरह से कोरोना को हराने में भी आगे आयें ।
सीफार की नेशनल प्रोजेक्ट लीड रंजना दिवेदी ने स्वास्थ्य संचार के महत्त्व को बताते हुए कहा कि कोविड के साथ-साथ प्रजनन, मातृ-शिशु, नवजात, किशोर स्वास्थ्य के अलावा पोषण के स्वास्थ्य संदेशों को समुदाय तक इस तरह पहुँचाना है कि वह इन सेवाओं को लेने के लिए स्वयं आगे आयें।
यूपीटीएसयू से शालिनी रमन ने बताया यह समय परिवार नियोजन पर बात करने का है क्योंकि अनचाहा गर्भ जहाँ परिवार के सपनों को प्रभावित करता है वहीँ वह वित्तीय बोझ को भी बढ़ाता है। उन्होंने प्रतिभागियों से कहा कि सभी स्थगित स्वास्थ्य सेवाएँ नए दिशा निर्देशों के साथ शुरू किया गया है। आप सभी को कोविड से बचाव के सभी प्रोटोकोल का पालन करना है। किसी के घर की कुण्डी और दरवाज़ा नहीं खटखटाना है, परिवार के सदस्यों को घर से बाहर बुलाकर बात करनी है। वीएचएनडी के दौरान उचित दूरी का ध्यान रखते हुए सेवाएं देनी हैं। यह सुनिश्चित करना है कि सत्र पर सभी मास्क लगाये हों, बाल्टी पानी व साबुन की व्यवस्था हो ताकि सत्र पर हाथ धोने के बाद ही लोग अन्दर आयें। यदि आशा-एएनएम को खांसी, बुखार जैसे कोई दिक्कत है तो वह इस काम पर न आयें। कन्टेनमेंट ज़ोन में सत्र का आयोजन नहीं करना है। जिन घरों में कम वजन का बच्चा हुआ हो या समय पूर्व बच्चे का जन्म हुआ हो या बच्चा एसएनसीयू से वापस आया है या घर में ही प्रसव हुआ हो उन घरों में एचबीएनसी को प्राथमिकता देनी है। एचबीएनसी के दौरान कोविड संक्रमण से बचाव के प्रोटोकोल का पालन करते हुए बच्चे को नहीं छूना है, माँ से ही बच्चे के स्वास्थ्य की जानकारी लेनी है। साथ ही समुदाय को टीकाकरण के लिए भी जागरूक करें। गर्भवती को बताएं कि खतरे के लक्षण दिखने पर 102 एम्बुलेंस को काल करें और अस्पताल जाएँ लेकिन यदि गर्भवती कोरोना से संक्रमित है तो वह 108 को काल करे।
कार्यशाला में यूनिसेफ से सरोज राणा, कामख्या मौर्य, युशुफ शाह के साथ जनपद के सभी ब्लाक स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी और ब्लाक समुदाय प्रक्रिया प्रबंधक, आशा संगिनी व एनम व आशाओं ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का संचालन सीफार की रंजना दिवेदी ने किया। जिला समुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक संतोष सिंह ने फ्रंटलाइन वर्कर समेत सभी प्रतिभागियों और स्पीकर को धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यशाला पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बड़ागांव ब्लॉक की आशा संगिनी विद्यावती देवी ने कहा इस ट्रेनिंग से कोविड-19 कर जितनी जानकारियां दी गई थी उन्हें फिर से दोहराने के कारण जागरूकता बढ़ गई है अब और भी सचेत होकर गृह भ्रमण के दौरान कार्य किया जाए सकेगा। नवजात बच्चों का लक्षण के आधार पर उनका जांच करना बिना छुए , इसकी जानकारी की पुनरावृत्ति हुई ।
एएनएम संगीता चौहान ने बताया प्रसव के दौरान जिन सुरक्षा के उपायों को अपनाना चाहिए वह पुनः जानकारी मिली और इससे और भी कार्य में सुधार आएगा जिससे कि कोविड-19 का खतरा कम होगा और सभी सुरक्षित रहेंगे।

