शब्द मसीहा : मेरे पापा फ़ौज में हैं
“तुम्हारे घर कितनी बार फोन किया कि आकर मिलो . मगर कोई सुनता ही नहीं है . कैसे अजीब से बाल बनाकर और कपडे पहन कर आती हो तुम . हर बार माँ फोन उठाती और कह देती है सब सही हो जाएगा . तेरा बाप कहाँ मरने गया है ? वो भी तो आ सकता है . जरा चिंता नहीं बच्चे की . बाहर जाओ क्लास से .” टीचर ने लड़की पर बिफरते हुए कहा .
“मरने ही गए हैं . मेरे पापा फ़ौज में हैं . वो तो बीमार माँ को भी देखने नहीं आते.” वह बस्ता उठाकर बाहर जाने लगी .
मेडम का सारा गुस्सा झर पड़ा था . उसने बच्ची को बाहों में भर लिया .
(लेखक- केदारनाथ शब्द मसीहा दिल्ली रेलवे विभाग में इंजीनियर है)

