वाह रे भाजपा : पिछले 18 दिनों से केपी मिश्रा अस्पताल में भर्ती, कोई देखने न गया
● हालात इतने बदतर हैं कि उधार के पैसों से काम चल रहा। अब नौबत कुछ कुछ गिरवी रखने की आ गई। क्या ऐसे होगा:- “सबका साथ, सबका विकास, भले ही छूटे अपनों का हाथ।”
● बुधवार की रात चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन खुद केपी मिश्रा को देखने पहुंचे
(हेमेन्द्र पीएस तोमर)
लखनऊ। आप हैं के पी मिश्रा जी। यूपी भाजपा के प्रदेश कार्यालय से सन् 1997 से जुड़े हुए। पिछले 18 दिनों से लखनऊ के लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (गोमतीनगर के लोहिया हॉस्पिटल के ठीक पीछे) के द्वितीय तल पर न्यूरो सर्जरी के आईसीयू वार्ड में बेड नंबर 7 पर पड़े हैं। एक बहुत गंभीर बीमारी से जूझ रहे। बीते कल 20 मार्च तक पूरे शरीर का चार बार खून बदला जा चुका है। लेकिन स्थिति ज्यों की त्यों। लेकिन ये भाजपा भी तो वैसी ही है। वो पहले भी ऐसी ही थी कि अपने लोगों का ऐसे मौके पर कुछ इसी तरह ‘साथ’ देती आई है। क्योंकि पिछले 18 दिनों से इन्हें देखने कोई न गया। जबकि इसी 2 सीटों के उपचुनाव के लिए वीआईपी दौरों के लिए इसी भाजपा कार्यालय में वह 18 घण्टे हर रोज़ समय दे रहे थे। जिस रात 2-3 बजे उन्हें यह विचित्र अटैक पड़ा, उस रात भी 12 बजे बीजेपी आफिस से वह निकले थे। अब उनके कमर के नीचे शरीर सुन्न हो चुका है। सुन्न तो भाजपा भी है अन्यथा इनकी यह स्थिति न होती। सन् 1999 में जब मुझे अपने अखबार की तरफ से बीजेपी कवर करने की जिम्मेदारी दी गई तो उस समय कंप्यूटर व मीडिया के कक्ष में व्यवस्था की ज़िम्मेदारी इन्ही को मिली थी, सो परिचय आ ही गया। मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बाद राम प्रकाश गुप्त जी से होते हुए बलिष्ठ राजनाथ सिंह के सीएम होते ही इन्हें पार्टी की तरफ से कार्यालयी समन्वय के काम से मुख्यमंत्री के राजकीय आवास पर रख दिया गया। उस जमाने में इग्नू से एमसीए कर के अपनी ज़िंदगी को संगठन के लिए होम करने वाले मिश्रा जी के लिए फिलहाल कुछ भी लिखने में उंगलियां कांप सी रही हैं। हालात इतने बदतर हैं कि उधार के पैसों से काम चल रहा। अब नौबत कुछ कुछ गिरवी रखने की आ गई।
क्या ऐसे होगा:- “सबका साथ, सबका विकास, भले ही छूटे अपनों का हाथ।”
मेरी यह पोस्ट सिर्फ इसलिए है कि इंसानियत के नाम पर ही सही, पर हे /भो/अरे भाजपा! सुध ले लो अपने के पी मिश्रा की अन्यथा पछताने के सिवा कुछ मिलेगा नहीं। क्योंकि संगठन के लिए निर्मल मन और पवित्र भाव से सब कुछ सौंपने वाले कार्यकर्ता आपसे बस मौके पर थोड़ी सी छांव ही तो चाहता है। चुनाव तो फिर जीत लोगे, अपने लोग हार गए तो फिर खाली हाथ रह जाओगे।।
अब आज दिन के 2 बज गए हैं। कई लोग मुझे फोन कर रहे हैं श्री के पी मिश्रा जी अर्थात कमला पति मिश्र जी के ताजा हाल जानने के लिए । अब इस क्षण मैं उनसे दूर हूँ, बस मन पास है उनके ही। कुछ जाने-अनजाने लोग उनके पास पहुंच रहे तो इधर कुछ लोग प्रदेश-देश में दूर है और वहीं से तत्काल अपनी आर्थिक सहायता भेजने की बात कर रहे। मेरे अनुरोध पर श्री मिश्र जी के परिवार ने बैंक की डिटेल सकुचाते हुए दी है, जिनको इस तरह मदद करनी है, वो बैंक ऑफ महाराष्ट्र, अलीगंज, लखनऊ के उनके बैंक खाते में सहयोग राशि भेज के कर सकते हैं। खाता इन्ही कमला पति मिश्रा के नाम से है और एकाउंट नंबर है 25033377815
फिर भी, मैं यही कहूंगा कि ऊपर वाले से प्रार्थना और दुआ जारी रखें। सच्चे मन की दुआ और प्रार्थना कभी निराश नहीं करती। जब तह बात सोशल मीडिया पर थोड़ी बहुत फैली तो बुधवार की रात चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन खुद केपी मिश्रा को देखने पहुंचे। उनके पहुंचने से माहौल थोड़ा बदला। लेकिन पैसे का अभाव तो उन्हें बना ही हुआ है। हालांकि इस लखनऊ में इस समय सभी हैं। सदन भी चल रहा है और भाजपा के नाक का सवाल बना राज्यसभा के चुनाव लिए कल वोटिंग भी है। भाजपा नेता सुनील बंसल भी मौजूद हैं लेकिन कोई और नहीं गया। ऐसे में देश-प्रदेश को बदलने का दावां करने बाली भाजपा जब खुद मानवीय व संवेदना के मुद्दे पर जब अपनों के लिए बदल नहीं पा रही तो और के लिए क्या बदलेगी सोच से परे है। खैर देर से ही जागे भाजपा जाग जाये तो यह उसके कार्यकर्ताओं के लिए आत्मबल प्रदान करने जैसा होगा।

